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संदेश

Sanatani hukaaar

_ सनातनी हुँकार सिंह सी दहाड़ कर  रण में आज पुकार कर  बढ़ चला मैं आज फिर  धर्म की पुकार पर  श्री राम ही आधार हैं  हिंदुत्व का अभिमान है  बढ़ गए हैं अब तो हम  हिंदू राष्ट्र की हुंकार है  तू अधर्म का विरोध कर  गीता का ही तो ज्ञान है  मैं खड़ा हूं तेरे साथ  तुझे क्यों नहीं अभिमान है  तेरे नाम से ही मान है  क्योंकि इस जग में आप ही महान है  जो कष्टों को है हरते सबके  वही तो करुणानिधि राम है  अब परीक्षा नहीं लीजिए  एक संकेत ही तो दीजिए  कृपा रही आपकी तो  अधर्म भी मिटेगा और धर्म भी टिकेगा आपके मान की है बात तो  हमारी जान से भी बढ़के है  गर्व है हमारा यह  कि आपके ही तो पुत्र हैं  बात हुई जो आपपे  तो शास्त्र नहीं शस्त्र हम उठाएंगे  यदि रण में जो उतर गए  अतः लहू हम बहाएंगे  बढ़ रहा अधर्म यहां तो  आपकी कृपा से धर्म हम बचाएंगे  जीवन की अंतिम सांस तक  हम जय श्री राम गाएंगे  यह धर्म ही है सबसे बढ़के  इसी के सब कल्पित महान है  काम ...

Paritripti

_ परितृप्ति आदमी महसूस करने लगा कि--- भूख,असहज होने का नाटकीय भाव है इसलिए जिंदा आदमी नाटकीय अभिक्रिया करता है  भूख से कोई नही मरता है  नही मरने वाला आदमी नर्क-द्वार की चौकीदारी करता है ! 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Vikrant Kumar  EDUCATION : ADDRESS :Begusaray Bihar  Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Dukh Ka Dard

_दुख का र्दद दिन हमने भी खूब दुख भरे देखें हैं। भूखी माँ को बच्चों का पेट भरते देखें हैं।। भगवान उसे हर रोज़ सताते थे फिर भी  मां को उनको हर सुबह पूजते देखें हैं।। टूटी झोपड़ी और बारिश का मौसम थी। छाते पकड़ कर मां झोपड़ी में रहती थी।। छाते के निचे बच्चों को सोलाते देखें हैं। हां मैंने मां को रात भर भीगते जागते देखें हैं।। मज़बूर हो के मां को तीन साल के बच्चें के साथ, पटरी पे सोते देखें हैं।। मंजर इतना भयानक की, मां कि मुस्कान के पीछे आंसुओ का सुनामी देखें हैं। जीना दुश्वार हुआ इतना की, आंखों कि आसूं को सूखते हमनें देखें हैं।। साथ कोई नहीं था, तीन साल के बच्चें को मां की हिम्मत बनते देखें हैं। किस से बदला लें,हमनें अपनो को अपनो से लड़ते देखें हैं। सयुक्त परिवार को हमनें टुकड़ों में बटतें भिखरते देखें हैं ।। अपनो को अपनो के साथ दुश्मन सा वार्तब करते देखें हैं। एक ही घर में सब के साथ होते हुऐ भी हमने कोसों की दूरी  देखें हैं।। हा हमनें भी खूब दुःख भरे दिन देखें हैं।। नाम   : देव कुमार पिता का नाम  : अनिल पासवान माता का नाम : प्रमिला देवी  जन्म भूमि  : म...

Meri maut

_ मेरी मौत मत पूछ मेरी मौत कैसे हुई पर जो भी हुईं बहुत दर्दनाक हुई प्यार करके तुझे दिल में बसाया एक तेरी खातिर परिवार को बेगाना बनाया सांसे होती थी कभी कभी मेहमान फीर भी तेरे नाम की माला को गले लगाया तेरी एक एक बातों में नज़ाकत थी फीर भी दीवाना था तेरी बातों का आया था संदेशा एक दिन मेरी बर्बादी का वो कुछ और नहीं बस एक सादी का कार्ड था उसी दिन मेरी मौत हुई पर जो भी हुईं बहुत दर्दनाक हुई Amrita tripathi

Sharab ka nasha

_ शराब का नशा तुम क्यों पीते हो अपनी मां का सुकून अपनी पत्नी की खुशी बहन की इच्छा एक बाप की इज्ज़त और एक घर का सम्मान सब एक साथ दो घूंट में पी जाते हो कभी पूछा इनकी खुशी क्या है? कभी पत्नी के गहने बेचकर पीते हो कभी पूछा कि उसके मां बाप ने वो गहने कैसे दिए कभी मां की तिज़ोरी के पैसे चुराकर पीते हो कभी मां से पूछा कि वो पैसे तिज़ोरी में क्यों बचाकर रखी थी? कभी घर का सामान बेचकर पीते हो कभी पूछा बाप से वो घर का सामान कैसे कमाकर लाए थे? मर्दाना कमज़ोरी से रंग दी गई है शहर की दिवारे और नशे की हालत में कहते हो की समझाने वाले ही कमज़ोर है तुमको लगता हैं तुम चोरी छिपे पीते हो तुम्हारे घर वाले जानते नही सब लोग जानते हैं बस सामने बोलकर अपना रिश्ता खराब नही करना चाहते हैं अपने परिवार वालों की खुशी चाहते हो तो आज से संकल्प लो शराब को हाथ नही लगाओगे Amrita tripathi

Sachhi Lagan

_ सच्ची लगन नेहा की आदत बचपन से कुछ अच्छा कुछ अलग करने की थी लेकिन अभी उसकी पढ़ाई पूरी ही नहीं हुईं उसके घरवाले उसकी सादी जल्दी ही कर दिए वह अपने ससुराल चली गई ससुराल के पारिवारिक जीवन में वह लगातार व्यस्त हो गईं उसकी सारी दुनिया एक कोने में बदल गई पति के व्यस्त होने के कारण वो अपनी सोच को बता नही पा रही थी और कुछ समय बच्चो को पालने में चला गया अब तो कैसे नेहा ने समझौता कर लिया हो की कुछ नहीं हो सकता है एक दिन अचानक टीवी चैनल देख कर उसे एक उससे संबंधित काम मिला उसने चुपचाप फार्म जमा कर दीया फीर कुछ दिनों में एक आदमी घर पर आया नेहा को बुलाकर कहा आपकी जॉब लगी है मेम कब ज्वाइन करना है आपको इतना सुनकर उसके घरवाले बहुत ज्यादा खुश हुए और उसे जॉब करने से मना नही किए उसकी सास ने कहा अच्छा लगा बहु जो तुमने नाम रोशन किया एसी बहु भगवान सबको दे इस कहानी से सीख मिलती है की समय जो भी हो लगन होना चाहिए कभी भी सपने पूरे होते हैं Amrita tripathi

Khali pet dawa

_ खाली पेट दवा एक 14साल का लड़का निखिल सोनम का दरवाजा खटखटा रहा था तो सोनम ने अचानक दरवाजा खोला तो सामने देखा एक लड़का निखिल खड़ा है वो लड़का बोला आंटी जी मुझे काम मिलेगा बदले में कुछ भोजन चाहिए और कुछ नहीं सोनम ने कहा मेरे घर पर कामवाली बाई है मुझे काम नही करवाना है लड़का रोने लगा और बोला मुझे बस एक दिन का काम करना है और बदले में कुछ खाना और कुछ नहीं सोनम ने सुना तो दौड़कर भोजन ले कर आई बोली बेटा खाना खा लो लड़के ने कहा मुझे फ्री में नही चाहिए काम के बदले सोनम ने आखिर कार पूछ ही लिया की तुम खाना क्यों ले कर जाना चाहते हैं फीर लड़के ने रोकर कहा मेरे पापा का सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है डॉक्टर ने कहा है कि दवा खाली पेट नही खाना है मेरा घर बहुत दूर है मेरे साथ भी कोई नही है मुझे बस थोडा सा भोजन चाहिए और कुछ नहीं सोनम ने जैसे इतना सुना तो उसकी आखों मे आंसू आ गए की 14साल का लड़का अपने मां बाप के लिए क्या क्या कर रहा है और एक मेरे बच्चे हैं स्कूल से घर वापस आते ही पूरा घर सर पर उठा लेते हैं उसने उस लड़के को समझाया और बोला बेटा भोजन लेकर जाओ पापा को दवा दे दो वो ठीक हो जाए कभी आना तो का...

Aalashya

  _आलस्य से दूर रहें एक 23साल की लड़की जब मेडिकल की पढ़ाई पूरी करके अपने घर पर आई तो घर के अगल बगल वाले बहुत लोगों का मिलना जुलना सुरु हो गया हर कोई उस लड़की से मुलाकात करता और जान पहचान रखता क्योंकि कब कहां कैसे किसे जरूरत पड़ जाए लेकीन वह लड़की बहुत ज्यादा आलसी थी देर से सोना देर से जागना देर रात में खाना पीना करना एक दिन अचानक गांव में एक आदमी बीमार हो गया था रात को उसे इलाज की जरूरत पड़ी 11bje रात को लड़की के घर पर कुछ लोग गए बुलाने की मैडम जी चले नही तो लखन चाचा को कुछ भी हो सकता है वह लड़की फोन चलाने में व्यस्त हो गई थी की बोली हम इस टाइम कुछ काम कर रहे हैं फोन पर सुबह आते हैं देख लेंगे मरीज को बहुत कोशिश किया गांव वालों ने वह लड़की नही गईं और अचानक देर रात में लखन चाचा की तबियत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई लड़की सुबह देर में उठी और नहाया धोया मेकप किया पर्स उठाया और चली गई जैसे लखन चाचा के घर पर पहुंची उनकी मौत हो चुकी थी लड़की को अचानक बहुत ज्यादा झटका लगा वो रोने लगी और बोली मेरी वजह से जान चली गई है मैं सही समय पर इलाज कर लेती तो वो ठीक हो सकते थे नही भी होते तो मैं सही स...

Aaj ki Shoutan

  _आज की सौतन मैं हमेशा मंदिर में पूजा पाठ करने जाती थी एक दिन अचानक मुझे एक लड़की से मुलाकात हुई वह मुझे जानती थी बाते करते करते बहुत गहरी जान पहचान हो गई थी हम दोनों एक दूसरे से अपनी बात करते थे और हो भी क्यों ना इंसान कब तक अपनी बात दिल में दबा कर रखे कोई ना कोई राजदार होना चाहिए तभी जिन्दगी आसानी से चल सकती है एक दिन प्लाक्षी अचानक मुझे मिली वो मंदिर के कोने में रो रही थी सायद उसके घर पर कुछ हुआ था पास जाकर उससे बात किया तो उसने बताया उसके पति ने उसे छोड़ने का फैसला लिया है लेकीन मैं पति को छोड़ना नहीं चाहती हूं मैं कहां जाऊंगी वो फफकर रोते हुए बोली आए दिन रोज पति मेरा घर में लड़ाई झगड़ा करते हुए रहता है 3साल से किसी लड़की के साथ रिलेसनसिप में है वो उसे छोड़ना नहीं चाहता है मैने प्लाक्षी के सिर पर हाथ रखते हुए बोला थोडा आराम से काम लो सब कुछ ठीक हो जाएगा और सहानभूति दिखाकर अपने घर पर आ गई घर पर जैसे तैसे आई तो देखा कामवाली बाई बहुत उदास है उसे दिल की बात जानी तो उसने कहा मेरा पति मेम साहब दारू पीकर रोज मारता पीटता हैं कया करू और लड़कियों के लिए पैसे लेकर जाता हैं होटल में ख...

Adha Chand

  _ आधा चांद (1) हर पगडंडी पर चढ़ते एक आलम आया था।  तेरी नजरों को मेरी नजरों से मिलता पाया था तेरा रूप बसे तो जग लगता है बाकी सब तो साया था आप कहने यह आया है कि तेरा मुझ पर साया था।  वर्षों बाद बसेरा है मेरा घर भी अब तेरा है  अब बदलता है कि कहना तुम, रातों के आंगन में हाथ पकड़कर  फिर यू कहना कि आधा चांद तेरा है आधा चांद मेरा है।  (2) तुम चाहती रही मैं निभाता रहा  तेरा गुस्सा भी मेरे काफिले मे आता रहा तेरा ना बोलना मुझे सताता रहा तू कोयल सी बोली मैं गाने लगी थी।  तेरे साए का साया मुझ तक ही आया वो पूछती रही कि तुमने क्या कमाया सारा जमाना छोड़ कर तुम्हें पाया।  👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Vivek Kumar Maurya EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha ...

Tera ishq

  ******* तेरा इश्क ******** अदालत हुस्न की होगी  मुकदमा तेरे इश्क का होगा।  गवाही मेरे दिल की होगी मुजरिम तेरा प्यार होगा।  कुछ जरूरी रहा होगा तुम्हारा बात करना उससे।  ठीक है ! कर लो!  जरूरत भी बन जाएगी।  पूछना था तुमसे तुम्हारा हाल कैसा है छोड़ने के पहले जैसा था क्या अब वैसा है।  👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Vivek Kumar Maurya EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Vakt

~   वक्त  ~ ये वक्त वक्त की बात है.....  जिवन की राहे कभी खुश तो कभी उदास है।  पास दरिया हो के भी बुझी नही प्यास है।  ये वक्त वक्त की बात है...   आज खुशियों के पल साथ तो       कल दु:खो की बरसात है।   कही जिंदगी भर का साथ तो  कही एक ही मुलाकात है।  ये वक्त वक्त की बात है....  आईनेसा साफ कुछ भी नही, छल  - कपट ही इंसानियत का पोषाख है।  जिंदगी के कुछ पल चमकिले, तो      कुछ चुल्हे की राख है।  ये वक्त वक्त की बात है...।  घर का प्यार भरा आंगन आज खाली और उदास है।  उड़ते पंछी को आज भी घोंसले की आस है।  ये वक्त वक्त की बात है....। 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet रुत्तिका सुघिर तिमाने  EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर...

Me Rishto ka Darji hu

  'में रिश्तो का दर्जी हूँ  में रिश्तो का दर्जी हूँ  करता सबसे अर्जी हूँ  रिश्ते नातों के लिवास में कहीं छेद ना होने पाए ऐसा रफूं करो कि फिर से कोई भेद ना दिखने पाए नहीं सिली पोशाक अभी तक ना पतलून बनाई है मानवता में भेद कर सके कुर्ता कोट न टाई है आस्तीन को जोड़ सके ना  गिरेवान क्यों छांट दिया मेरे इस लिवास को तुमने क्यों दो हिस्सों में बाँट दिया  किसने ये अधिकार दिया था या लज्जा बची न थोड़ी थी तुमने कुछ बिन समझे ही रिश्तों की तुरपन तोड़ी थी पहले नाप लिया होता तो शायद ऐसा ना करते  दीन इलाही या मौला से कुछ तो शायद तुम डरते,  पाठ पढ़ा ना मानवता का ना गिरेवान में झांक सके  ऐसा करने से पहले नहीं तुम्हारे हाथ रूके कुछ काट छाँट क्या करना सीखे भला बुरा ना छाँट सके गैरत ऐसी करनी पर जो मानवता को बाँट सके में ठहरा रिश्तो का दर्जी  कफन छोड़ सब सिलता हूँ  रिश्ते हों या लिवास  में सब पर इस्त्री करता हूँ  सिलवट कोई शेष रहे ना  सम्बन्धों के धागों पर आखिर उस मालिक की मर्जी में जीता अपने भागों पर नहीं मरेगी मानवता तेरे इन दुश्कर्मो...

Shramik

  _श्रमिक श्रमिक मैं श्रमिक परिश्रम से मेरी पहचान मै ना देखूं दिन मैं ना देखूं रात मेहनत ही मेरा विहार दो टूक पाने की प्रतिक्षा धन कमाने की इक्षा मै नही चाहता करोड़पति बनू जो हैं बस संतुष्ट रहूं बीबी बच्चों का भर्तार हूं समाज का आधार हूं यहीं हैं मेरा जीवन निर्वाह इसी से चलता मेरा परिवार मेरी जिन्दगी में बहुत कठिनाई है फिर भी यारों मेहनत की कमाई हैं Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi EDUCATION : ADDRESS :

Jhukna nhi aata

  _झुकना नहीं आता मुझे हर किसी  के आगे झुकना नहीं आता  चली हूं जबसे सफर पर रुकना नहीं आता जिसने सारी उम्र सिर्फ कहना ही सीखा है  उन्हें अक्सर किसी  को सुनना नही आता ख़ामोश रहना मुझे अब अच्छा लगता है सब कहते है की मुझे हंसना नहीं आता बचपन से जवानी तक वो रखते है जिन्हे उन बच्चो को बूढ़े मां बाप रखना नहीं आता जिससे रूठ जाए उसके अपने सभी  उस शख़्स को कभी रूठना नही आता  एक हार से ,जो जिंदगी हार जाते हैं  उन्हें गिरकर संभलना नहीं आता कहते है लोग की लिखना बड़ी बात है क्या हर किसी को जज़्बात लिखना नहीं आता साक्षी चौहान ग्वालियर (मध्य. प्रदेश) 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Sakshi Chauhan EDUCATION : ADDRESS :

Vastra

  _वस्त्र तुम जब धरा पर आए चारों तरफ़ खुशियां छाए मैने ढका था तुमको मैने सहारा दिया था तुमको मै न होता लोग हंसते कोमल काया को देखते मै हर मूल्यों में बिका हर देशों में मिला आत्म सम्मान का रखवाला हूं बड़ा ही दिलवाला हूं मेरे बीना कहां जाओगे न रहूं कैसे मुंह दिखाओगे मैं ही लाज रखता हूं हमेशा साथ देता हूं अफसोस... तुम चिता पर जले मैने साथ छोड़ा तुमको बस बाय बाय बोला घबराओ नहीं फिर मिलता हूं अगले जन्म में..... Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंब पर संपर्क करें।

Ladki ka Dard

  _लड़की का दर्द मां बाप की लाडली बेटी हूं मुझे फलने फूलने दो सतयुग त्रेता द्वापर हर युग में मेरी पहचान थी बस कलयुग में मेरा उल्लास चला गया मेरी खुशी चली गई मै खुशी दू तो सब खुश हो जाएं मै रूठ जाऊं तो सब रुठ जाएं फिर.. समाज में मैं नगर.. डगर.. प्रताड़ित ही प्रताड़ित मै घर में असुरक्षित मां के गर्भ में असुरक्षित मै न औलाद न ही वारिस पराए घर की मेहमान मै प्रकृति हूं और सृजन भी क्यों कष्ट देते हो घर के बाहर कानून है घर में कैसे लाऊं कानून मुझे सम्मान दो मेरी रक्षा करो मां के गर्भ में बचाओ वो दिन दूर नहीं जब भारत में राम राज्य होगा बस राम राज्य Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi EDUCATION : ADDRESS :

Dhoop

  _धूप गर्मी में अच्छी नहीं लगती सर्दी में मन को लुभाती  कुछ पल के लिए कभी नहीं टिकती कभी कभी पेड़ो के झुरमुट छिपती देखो कोई देख न ले अरे... कोई पूछ न ले खिड़की से झांक लेती और आंगन से खिलखिला जाती कभी कभी तो दबे पांव भाग जाती आपने भी देखा हमने भी देखा कैसा है ये प्रकृति का लेखा शहर हो गांव हो हर जगह बस मेरी भरमार हो Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Pita Mere

  _पिता मेरे पिता मेरे । शत् शत् नमन.. सागर से भी गहरा, अंबर से भी ऊँचा जिसका प्यार है ' पिता " इक शब्द नहीं, संपूर्ण संसार है,  अनुभूति से आनंद तक ... असीम आशीर्वाद है पिता तेरा हमसभी पर अनमोल अनुराग है  मेरी रग-रग में बसा तेरा संस्कार है..  रक्त की हर बूंद तेरी ही कर्जदार है. ये जिंदगी, जज्बा, जुनून, तेरा दिया उपहार है..  मेरी हिम्मत, हौंसला और ये हंसीं तेरा दिया प्यार है..  सागर से भी गहरा, अंबर से ऊंचा जिसका प्यार है पिता इक शब्द नहीं संपूर्ण संसार है  जीवन एक परीक्षा है,सफलता पिता की शुभेच्छा है  जंग भी तेरी, जीत भी तेरी, मेरा जीवन तेरी ही इच्छा है  पिता हमारी पहचान है, सारी खुशियां सारा जहान है  वजूद से जिसके लगता जीवन, हर क्षण नया विहान है.  आदर्श तुमही हो, पिता मेरे ,तुमसे मेरा आत्मविश्वास है  जीवन बने सफल मिले सुख-समृद्धि तेरे आशीष की आश है सागर से भी गहरा, अंबर से भी ऊँचा तेरा प्यार है मेरे  "पिता" तू ही मेरा संपूर्ण संसार है.... 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amita ...

Nyi Umang

  _नई उमंग नई शाम के नया सबेरा होता है छोटी छोटी कलियों से बगिया में फूल खिलता है दुःख जायेंगे सुख आयेंगे एक पत्थर हमको सिखाता है बनती है प्रतिमा काट काट के मंदिर में जब लगती है फूल बरसता है प्रतिमा पर दुनियां सारी पूजती है इसी प्रकार जीवन है निर्मल कभी सहे जेठ की तपन तो कभी सावन की फुहार दुःख से तुम ना घबराओ जीवन है अनमोल उपहार कभी हसीं है कभी नमी और कभी मां की ममता सा प्यार धरा पर जीवन ऐसा जीओ छाई हो बसंत की बहार Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Father's day

_Father day अगर नौ महीने कोख में रखती है मां तो नौ महीने दिमाग़ में रखते हैं पापा भोजन पकाती है मां तो भोजन का इंतजाम करते हैं पापा तैयार करके स्कूल भेजती है मां तो पढ़ाई पूरी कराते हैं पापा कपड़े पसंद करती हैं मां तो बिल पे करते हैं पापा मां दुनियां में लाती है तो सम्मान दिलाते है पापा मां पूरा घर संभालती हैं तो घर का पूरा खर्च उठाते हैं पापा मां दिल में रखती है तो सिर के ताज होते हैं पापा घर में निडर बनाती है मां तो बाहर घुमाने ले जाते हैं पापा बर्थडे याद रखती है मां तो बर्थडे केक लाते है पापा घर की लक्ष्मी होती है मां तो घर के मुखिया कहलाते है पापा पिता दिवस पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Bhookh

  _भूख भूख लगी है मां कुछ तो खाने को दो राशन के पैसे अब तो लाने को दो भूख अब सहा नहीं जाता हैं मां अब कुछ कहा नहीं जाता रसोई में कुछ रखा हो तो लाके दो खाली डिब्बों मे चिवड़ा झाड़ के दो पेट में चूहे दौड़े है भूख सहने में आंसू पोछे है हाय हाय क्या नसीब है समाज में अब भी गरीब लोग है Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Mere Shabd

  _मेरे शब्द बुराई जब भी पनपे उसे जड़ से उखाड़ फेको इस इंसानी दुनियां में नफरत का बीज मत बोओ बिस्वास किसी भी मज़बूत रिश्ते का आधार है कुछ चीजें कीमत से नही किस्मत से हमको मिलती है कभी कभी खूबसूरती भी घातक होती है जैसे कि हीरा सहनसीलता रखो वसुंधरा के जैसे सबकी कद्र करना सीखो किस्मत तुम्हारी कद्र करेगी जो दिल को प्यारा लगता है उसकी झलक ही सारे दुखों को दूर कर देती है हम खुश रहेंगे तो हमारे आस पास का माहौल भी खुशनुमा रहेगा सच को छुपाने की हज़ार कोशिश कर लो फिर भी सच तो सच होता है जीवन का गणित ये कहता है कि जो झुकता है वही आगे बढ़ता है माता पिता और गुरू से बढ़कर इस संसार में कोई नहीं अपनी खुशियों के लिए किसी का हक मारना ये समझदारी नही बेवकूफी है स्त्री प्रेम से कांटों को भी फूलों में ढाल देती है Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Kya Khareeda

  _क्या खरीदा पैसे से हमने मकान खरीदा आनंद नही खरीद पाए पैसे से हमने शान शौकत खरीदी इज़्जत नही खरीद पाए पैसे से हमने भोजन खरीदा भूख नही खरीद पाए पैसे से हमने बिस्तर खरीदा नींद नही खरीद पाए पैसे से हमने वस्त्र खरीदा वाणी नही खरीद पाए पैसे से हमने गहने खरीदे रूप न खरीद पाए पैसे से हमने कुंडली खरीदी किस्मत नही खरीद पाए पैसे से हमने डिग्री खरीदी ज्ञान नही खरीद पाए पैसे से हमने पानी खरीदा प्यास नही खरीद पाए पैसे से हमने फोन खरीदा रिश्ते नही खरीद पाए पैसे से दूसरो को रुला दिया आंसू नहीं पोंछ पाए पैसा जीवन को चलाने के लिए हमारी अजीविका हैं लेकिन पैसे से बढ़कर भी कुछ है हमे उसे समझना और समझाना चाहिए Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Maa

  _माँ माँ तू है त्याग और बलिदान की मूर्ति,   हमेशा मेरे हर एक जरूरत को है पूरी करती, जब भी उदास या परेशान होता हूँ,   तेरे पास दौड़ा चला आता हूँ,  बिना कुछ सोचें समझें अपनी मन की हर एक बात तुझे बताता हूँ,  तू मेरे हर एक परेशानी को यूँ पल में दूर कर देती है,  मुझे दर्द में देखकर अपने हर दर्द को भुला देती है,  माँ तू है त्याग और बलिदान की मूर्ति,   हमेशा मेरे हर एक जरूरत को है पूरी करती,   हमेशा मेरे हर एक जरूरत को है पूरी करती। 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Hariom Gupta  अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Anmol Vachan

  _अनमोल वचन मेहनत करके खाओ दया का पात्र बन के नही आंसू बहाओ ईश्वर के सामने इंसानों के नही जो दूसरों पर हंसते हैं दुनियां उन पर हंसती है मज़ाक ऐसा मत करो कि वो तीर तलवार बन जाए दूसरो की सहायता इतना ना करो कि तुम एक निर्धन भिखारी हो जाओ धन दौलत होने पर कोमल बनो अभिमानी नही खुशियां बाटने से मिलती है छीनने से नही दिल खूबसूरत रखो चेहरा नही अपने आप को पानी बनाओ जिस रंग में रहो वही रंग जाओ दुख सहते सहते हम मज़बूत बनते हैं कमज़ोर नही आंखे सबके पास होती है बस देखने का तरीका अलग अलग होता है उम्मीद की थाली मे हमे प्यार परोसना चाहिए नफ़रत नही हम आशा करते रहें आप सब हमारी बातों से सहमत हैं Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

O My Lovely Beloved

_ O my Beloved One  O my lovely beloved once look at me for thine I bring my heart Everything what thou wish in dream I bring these gifts smart Look here the red bangles and bracelets too in a heap Not only red but all colours like a rainbow deep A dear name of heritage and a big mansion of my ancestors A loving heart of my parents where a flower bloom in my respected mother clusters A dream which every girl seen alone to play a love beam with her loving lover A fresh heart where no thorns a glowing face with love where no gloom cover Never wait for the consent of siblings I promise to take their acceptance I promise coming in my arms no misery or problems touch thou in repentance Every lovely flower gets proud seeing my love and caring For thou not worry I will bear all miseries with laughing sharing I know thou have a pain of separation thy own But I have thou in covering all tears separate zone 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Vijay Pa...

Deepawali

  _दीपावली आज छेड़ो दिलों में नया राग दिन है कुछ खास दिल में खुशी भरके बजाओ कोई साज मौसम बना है आज पर्व है महान घटा छाई है खुशियों की चारो ओर मस्ती में ढोल बजा रहे हैं लोग क्योंकि दीपावली है आज सीता राम सहित लक्ष्मण आएं हैं आज खुशियों के पल चुरा लो आज नाच लो आज खुशी का दिन है खोल दो दिलों के दरवाजे लक्ष्मी माता का हो जाए वास क्योंकि दीपावली है आज गणेश जी का हो सबके घरों में वास सुख शांति का हो सदाबहार खुशी से करते हैं अभिवादन हम आज सबके चेहरे पर रहे मुस्कान क्योंकि दीपावली है आज Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Log Kahenge

  _लोग कहेंगे कुछ तो लोग कहेंगे के चलते यूंही बीत जाती हैं जिंदगी समाज में ये शब्द चुप रहते हैं लेकिन दोस्तो दिलों के अरमानों को दबा देते हैं कुछ तो लोग कहेंगे इसके चलते कई लोगों की दुनियां और घर उजड़ जाते हैं हमारे दिल की इच्छा बंद कमरे में अपने अरमानों का गला घोट देती हैं कुछ तो लोग कहेंगे ये शब्द दुनियां में एक कटाक्ष बन गया है ये दुनियां आधुनिक हुई समाज बदला हम सब बदले लेकिन ये शब्द नही बदला आज भी सबके दिलो में मौजूद हैं कुछ तो लोग कहेंगे के चलते हमारे सपनों को बांधते हैं एक डोर जैसे और बना देते हैं हमको एक कुएं का मेढ़क बस इस कल्पना के चलते की कुछ तो लोग कहेंगे Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Aaj ki Shadi

  _आज की शादी लग जाता है बाप एक बेटी को खुशियां देने में दिन रात प्रयास करता है रिश्ता सटीक होने मे पहले का अपना जमाना था लड़का न देखे लड़की को लड़की न देखे लड़के को बात पक्की हो जाती चट मंगनी पट ब्याह शादी धूमधाम से हो जाती आया है कलयुग मार्डन जमाना लड़का बोले शादी से पहले लड़की को है होटल घुमाना दिल मिले दिमाग़ मिले फिर है रिश्ता आगे बढ़ाना लड़का लड़की मिलते हैं गुपचुप बात इधर उधर हो जाना है बाते चलती घंटो लगभग फिर भी समझ नहीं आना है इस कलयुग में बोलो भाई शादी कैसे रचाना है Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।