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Holi

 होली  - रंगों की झोली आया समय दहन का हिरण्यकश्यप की बहन का । भस्म न हुआ प्रल्हाद वो  विष्णु भक्त महान वो । आओ खेलें हीर ,गुलाल की होली  भर दे खुशियों से सबके मन की झोली। होलिका का दहन हुआ  बुराइयों का पतन हुआ । विजय हुई धर्म की पराजय हुई अधर्म की  । आओ खेलें हीर ,गुलाल की होली  भर दे खुशियों से सबके मन की झोली। आई विभिन्न रंगों की होली  नाचते , गाते लोगों की टोली। मिट जाए अंधकार जैसा मल न करे कोई किसी से छल। आओ खेलें हीर ,गुलाल की होली  भर दे खुशियों से सबके मन की झोली। हर दिन हो जाए इंद्रधनुष सा रंगीन  मिटे आपसी मन मुटाव बने जीवन हसीन । रंगों की छटा ऐसी बरसाए  हर एक पल जीवंतता से खिलखिलाए । आओ खेलें हीर ,गुलाल की होली  भर दे खुशियों से सबके मन की झोली। होली की हार्दिक शुभकामनाए ! दीप्ति परचुरे Education -- M.A.English

Parwati Shakti Tandav Stuti

  _  श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति    || संस्कृत काव्य ✒️ ||  || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || _______________________________________ कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी, उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी। अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी, करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी  ||१|| ललाट-बिन्दु-सिन्धु-रक्त-रञ्जिता-स्व-भालका, धनुर्धरा त्रिशूलिनी कपाल-पाश-धारिणी। कराल-काल-मर्दिनी समस्त-दुःख-हारिणी, नमामि शैल-पुत्रिणीं सदा शिवा भवानी  ||२|| रणत्-क्वणत्-कणत्-किङ्किणी-नूपुर-घोष-मण्डिता, चलत्-चलत्-पद-क्रमैः सु-विश्व-चक्र-चालिनी। अघोर-रूप-धारिणी घोर-शत्रु-घातिनी, प्रचण्ड-शक्ति-रूपिणी सदा शिवा भवानी  ||३|| जगज्जननी पावनी प्रसन्न-मन्द-हासिनी, सु-भक्त-वृन्द-वन्दिता समस्त-विघ्न-नाशिनी। प्रलय-वह्नि-रञ्जिता महानिभय-दायिनी, जयतु जयतु पार्वती सदा शिवा भवानी  ||४|| जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी, विलोम-शक्ति-रूपिणी कराल-खड्ग-धारिणी। धगद्-धगद्-धगज्-ज्वलत्-ललाट-पट्ट-पावके, किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिं प्रतिक्षणं मम  ||५|| महा-विचित्र-नृत्त-नाद-डम्ब...