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Tanha

_ मैं बेचारा तन्हा अकेला  मैं बेचारा तन्हा अकेला भीगी राहों पर ढूँढ रहा, खुद को, कहीं | सड़कें भीगीं, शहर धुंधला, आसमान में घना कोहरा | भीगे आँखों से छलके यादों की धार, हर बूँद में गूँजे तेरा प्यार। शहर की भीड़ में, मैं खुद से पूछता, अपनी परछाई से ही अब मैं रूठता। पत्थरों में चमक, पर दिल में अँधेरा, टूटे सपनों सा लगता जीवन | खोया है कुछ, या पाया सवेरा? मैं मुस्कुराता नहीं मगर, हार भी मानता नहीं | सपनों की राख से, गढ़ता कोई सितारा।  ~ बाल कृष्ण मिश्रा Address: Bal Krishna Mishra          Flat No. 253, Ground Floor, Shri Krishna Apartment, J-2, Sector: 16, Rohini: 110089, New Delhi.          

मातृभूमि

  _ मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम यह कविता मातृभूमि के प्रति गहरी श्रद्धा, प्रेम और गर्व को व्यक्त करती है। कवि बाल कृष्ण मिश्रा ने देश की संस्कृति, त्याग और पावन धरा का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया है। उगता सूरज तिलक लगाता उज्जवल चंद्र किरण की वर्षा , नतमस्तक हूँ तेरे चरणों में तेरे चरणों में चारों धाम | मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || तेरी माटी शीतल चंदन , जिसमें खेले खुद रघुनन्दन । जिसमें कान्हा ने जन्म लिया , कभी खाई , कभी लेप किया । सीता की मर्यादा यहाँ , यहाँ मीरा का प्रेम | मन के दर्पण का तू दर्शन तेरे आँचल में संस्कृति का मान। मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || कल कल करती नदियां अपनी संगीत सुनाए। चू चू करती चिड़िया अपनी गीत सुनाए। मातृभूमि की पावन धरा , हर हृदय में प्रेम संजोए काशी विश्वनाथ की आरती, हर मन में दीप जलाए | आध्यात्म की गहराई यहाँ और विज्ञान की उड़ान | मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || दिव्य अलौकिक अजर अमर कंकर भी बन जाता यहाँ शंकर | बलिदानों की गाथा तू , तू वीरों की पहचान | जय-जय माँ भारती, जय यह पवित्र धरा महान मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || ~ बाल कृष्ण मिश्रा Addres...

Manavata

 _  मानवता 🙏🙏जय माँ सरस्वति🙏🙏 “यह कविता ‘मानवता’ हमारे समाज में बढ़ती ठिठुरन और दया-भाव के अभाव को व्यक्त करती है। खुशबू पांडे त्रिपाठी द्वारा लिखित यह हिंदी कविता विशेष रूप से शीत, कोहरा तथा मानवीय संवेदनाओं पर केंद्रित है।” ठिठुर रहा है सब, वन उपवन ठिठुरा रहा जग सारा । ठिठुर गई हैं सुन्दर कलियाँ, है ठिठुरा हुआ नजारा ।। ठिठुर गई है धरती अम्बर है, ठिठुरा हुआ उजियारा । ठिठुर गई हैं बहती नदियाँ, ठिठुरा हुआ किनारा ।। ठिठुर न ज़ाए पुलकित मानव दया का ह्रदय तुम्हारा । ठिठुर गई हैं गीली रातें हैं, ठिठुरा हुआ दिन बेचारा ।। टपक रहै हैं‌ ओश ऐसे,टपके जैसे मोती। घासों के झुरमुट में गुंथे गुंथी‌‌ हो‌ जैसे‌ चोटी।। धूल लपेटे वृक्ष खड़े हैं, लिपटी हों जैसे धोती। कोहरे की मुस्कान खिली है, नज़र बड़ी खोटी।। सूरज की किरणों को देखकर शर्दी खूब बड़ाए। रातों को यह ठंडे कोहरे फूले नहीं समाए।। ठिठुर रही है ,अब मानवता, प्रेम जगह न पाए। रोश ,क्रोध और निन्दा नफरत दिन प्रति पैर बड़ाए।। ~ खुशबु पांडे त्रिपाठी

Nani

नानी मां की भी मां, जिसे कहते है नानी जितनी प्यारी मां, उससे अधिक नानी, मां की हूं लाडली, नानी की हूं नूर, भाग्य से ही मिली है, ऐसी नानी हुजूर। जब भी जाती ननिहाल, प्यार अटूट वो करती, पलकों पर बिठाए रखती, लाड असीम करती। मुझसे ज्यादा वो खुश होती, जब में वहां होती, गोदी में बिठा, निहारती और दुलारती होती। मुझे देख प्रफुलित हो जाती, बच्चों जैसे घुलमिल जाती, अच्छे - अच्छे पकवान बनाती, दूध - मलाई मुझे खिलाती, रूखा - सुखा ही खुद पाती। उम्र का जखीरा अब झलक रहा है, सीधा खड़ा होना अब अखर रहा है, झुक गई है कमर,  कम हो गई है नज़र, जमाने का असर सहस दिख रहा है, जिंदगी का दिया बुझ सा रहा है। 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet  Vijay singh jagawat EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं।

Jindagi

_जिंदगी जिंदगी के धूप में चल सको तो चलते जाओ इस भीड़ में रास्ता बना सको तो बनाते जाओ किसी के न होने से जिंदगी नही रुकती उन्हें भूलकर जी सको तो जीते जाओ यहां कोई किसी की मदद नही करता अपने को संभाल कर बढ़ सको तो बढ़ते जाओ यही है जिंदगी की कहानी समझ सको तो समझते जाओ Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet  Amrita tripathi EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं।

Karm Bhumi he Kehti

   _ कर्म भूमि है कहती तुम किसी की मदद करके तो देखो तुम्हे मदद न मिले तो कहना किसी के आंसू पोंछ कर तो देखो तुम्हारी आंखों में आसूं आए तो कहना तुम किसी को गिराकर तो देखो तुम न गिरे तो फिर कहना दिन दुखियों की सेवा करके तो देखो तुम्हारी सेवा न हो तो कहना किसी की बहन बेटी का अपमान करके तो देखो तुम्हारी बहन बेटी अपमानित न हो तो फिर कहना किसी की वस्तु चोरी करके तो देखो तुम्हारी वस्तु न खो जाए तो फिर कहना किसी को अपशब्द कह के तो देखो वही अपशब्द कहीं से लौटकर न आए तो कहना माता पिता को दुखी करके तो देखो तुम्हारे बच्चे तुम्हे दुखी न करे तो फिर कहना किसी के रिश्ते में खटास घोलकर तो देखो तुम्हारे रिश्ते खराब न हो जाए तो फिर कहना ये कर्म भूमि है दोस्तो यहां पर जो करोगे वही वापस पाओगे Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet  Amrita Tripathi EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 93021159...

Aakhir Kyo

_   आखिर क्यों अपनी बेटी संस्कारी दूसरे की बेटी खराब क्यों दूसरे की बेटी पढ़े तो क्या होगा पढ़कर अपनी बेटी टीचर बने आखिर क्यों दूसरे की बेटी जमीन पर बैठे अपनी बेटी सिर पर आखिर क्यों दूसरे की बेटी बाहर जाए तो तकलीफ़ अपनी बेटी दुनियां भ्रमण करे आखिर क्यों दूसरे की बेटी में हजारों कमियां अपनी बेटी में कोई कमी नहीं आखिर क्यों दूसरे की बेटी पागल सी अपनी बेटी समझदार आखिर क्यों दुसरे की बेटी का गुजर बसर नही होगा अपनी बेटी को सब सुख क्यों दुसरे की बेटी शक्ल अच्छी नहीं अपनी बेटी मिस इंडिया क्यों दुसरे की बेटी सही होकर भी गलत अपनी बेटी गलत होकर भी सही क्यों दुसरे की बेटी अनपढ़ गंवार अपनी बेटी रानी बिद्दोतमा क्यों दुसरे की बेटी झूठ बोलती है अपनी बेटी राजा हरिचंद्र की वंशज क्यों दुसरे की बेटी को कोई पसंद नहीं करेगा अपनी बेटी के लिए दूर से रिश्ते आते है आख़िर क्यों दुसरे की बेटी बहुत कामचोर अपनी बेटी कारबारी आख़िर क्यों मत करो बेटियों में भेदभाव ये प्रकृति है इनमे भेदभाव करके आप पतन के रास्ते पर जाओगे बस एक ही नारा हो अपनी बेटी सबकी बेटी Amrita tripathi        ...

Kalam kehti he

_कलम कहती है  कलम कहती है मुझसे खुद को अकेला मत समझना दोस्त खुदा खुद तेरे साथ है तू कहां अकेला है तेरा सपना तेरे साथ है जिस मंजिल को पाना है वह रास्ता तेरे साथ है अगर लगे कि तू है अकेला तो पूछ इन किताबों से वह हर पल तेरे साथ है माता पिता भाई बहन सब साथ छोड़ देते हैं पर पूछ अपने टैलेंट से वह तेरे साथ है तू रुक मत दोस्त तू झुक मत दोस्त गिर के उठने का जो हुनर है पूछ उस हुनर से वह तेरे साथ है हो कभी गम अकेलेपन का तो रो ले मगर याद रख किसी के पास आंसू बहाने के लिए आंखें भी नहीं है पूछ लेना इन आंसुओं को इस खुशी में कि हाथ है तेरे पास जो कई लोगों के पास नहीं है तू कहां अकेला है मेरे दोस्त मैं हूं ना तेरे साथ  कलम..............                            👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet  Suman Saharan EDUCATION : ADDRESS :Rajasthan Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना ...

Paritripti

_ परितृप्ति आदमी महसूस करने लगा कि--- भूख,असहज होने का नाटकीय भाव है इसलिए जिंदा आदमी नाटकीय अभिक्रिया करता है  भूख से कोई नही मरता है  नही मरने वाला आदमी नर्क-द्वार की चौकीदारी करता है ! 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Vikrant Kumar  EDUCATION : ADDRESS :Begusaray Bihar  Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Dukh Ka Dard

_दुख का र्दद दिन हमने भी खूब दुख भरे देखें हैं। भूखी माँ को बच्चों का पेट भरते देखें हैं।। भगवान उसे हर रोज़ सताते थे फिर भी  मां को उनको हर सुबह पूजते देखें हैं।। टूटी झोपड़ी और बारिश का मौसम थी। छाते पकड़ कर मां झोपड़ी में रहती थी।। छाते के निचे बच्चों को सोलाते देखें हैं। हां मैंने मां को रात भर भीगते जागते देखें हैं।। मज़बूर हो के मां को तीन साल के बच्चें के साथ, पटरी पे सोते देखें हैं।। मंजर इतना भयानक की, मां कि मुस्कान के पीछे आंसुओ का सुनामी देखें हैं। जीना दुश्वार हुआ इतना की, आंखों कि आसूं को सूखते हमनें देखें हैं।। साथ कोई नहीं था, तीन साल के बच्चें को मां की हिम्मत बनते देखें हैं। किस से बदला लें,हमनें अपनो को अपनो से लड़ते देखें हैं। सयुक्त परिवार को हमनें टुकड़ों में बटतें भिखरते देखें हैं ।। अपनो को अपनो के साथ दुश्मन सा वार्तब करते देखें हैं। एक ही घर में सब के साथ होते हुऐ भी हमने कोसों की दूरी  देखें हैं।। हा हमनें भी खूब दुःख भरे दिन देखें हैं।। नाम   : देव कुमार पिता का नाम  : अनिल पासवान माता का नाम : प्रमिला देवी  जन्म भूमि  : म...

Meri maut

_ मेरी मौत मत पूछ मेरी मौत कैसे हुई पर जो भी हुईं बहुत दर्दनाक हुई प्यार करके तुझे दिल में बसाया एक तेरी खातिर परिवार को बेगाना बनाया सांसे होती थी कभी कभी मेहमान फीर भी तेरे नाम की माला को गले लगाया तेरी एक एक बातों में नज़ाकत थी फीर भी दीवाना था तेरी बातों का आया था संदेशा एक दिन मेरी बर्बादी का वो कुछ और नहीं बस एक सादी का कार्ड था उसी दिन मेरी मौत हुई पर जो भी हुईं बहुत दर्दनाक हुई Amrita tripathi

Sharab ka nasha

_ शराब का नशा तुम क्यों पीते हो अपनी मां का सुकून अपनी पत्नी की खुशी बहन की इच्छा एक बाप की इज्ज़त और एक घर का सम्मान सब एक साथ दो घूंट में पी जाते हो कभी पूछा इनकी खुशी क्या है? कभी पत्नी के गहने बेचकर पीते हो कभी पूछा कि उसके मां बाप ने वो गहने कैसे दिए कभी मां की तिज़ोरी के पैसे चुराकर पीते हो कभी मां से पूछा कि वो पैसे तिज़ोरी में क्यों बचाकर रखी थी? कभी घर का सामान बेचकर पीते हो कभी पूछा बाप से वो घर का सामान कैसे कमाकर लाए थे? मर्दाना कमज़ोरी से रंग दी गई है शहर की दिवारे और नशे की हालत में कहते हो की समझाने वाले ही कमज़ोर है तुमको लगता हैं तुम चोरी छिपे पीते हो तुम्हारे घर वाले जानते नही सब लोग जानते हैं बस सामने बोलकर अपना रिश्ता खराब नही करना चाहते हैं अपने परिवार वालों की खुशी चाहते हो तो आज से संकल्प लो शराब को हाथ नही लगाओगे Amrita tripathi

Adha Chand

  _ आधा चांद (1) हर पगडंडी पर चढ़ते एक आलम आया था।  तेरी नजरों को मेरी नजरों से मिलता पाया था तेरा रूप बसे तो जग लगता है बाकी सब तो साया था आप कहने यह आया है कि तेरा मुझ पर साया था।  वर्षों बाद बसेरा है मेरा घर भी अब तेरा है  अब बदलता है कि कहना तुम, रातों के आंगन में हाथ पकड़कर  फिर यू कहना कि आधा चांद तेरा है आधा चांद मेरा है।  (2) तुम चाहती रही मैं निभाता रहा  तेरा गुस्सा भी मेरे काफिले मे आता रहा तेरा ना बोलना मुझे सताता रहा तू कोयल सी बोली मैं गाने लगी थी।  तेरे साए का साया मुझ तक ही आया वो पूछती रही कि तुमने क्या कमाया सारा जमाना छोड़ कर तुम्हें पाया।  👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Vivek Kumar Maurya EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha ...

Tera ishq

  ******* तेरा इश्क ******** अदालत हुस्न की होगी  मुकदमा तेरे इश्क का होगा।  गवाही मेरे दिल की होगी मुजरिम तेरा प्यार होगा।  कुछ जरूरी रहा होगा तुम्हारा बात करना उससे।  ठीक है ! कर लो!  जरूरत भी बन जाएगी।  पूछना था तुमसे तुम्हारा हाल कैसा है छोड़ने के पहले जैसा था क्या अब वैसा है।  👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Vivek Kumar Maurya EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Vakt

~   वक्त  ~ ये वक्त वक्त की बात है.....  जिवन की राहे कभी खुश तो कभी उदास है।  पास दरिया हो के भी बुझी नही प्यास है।  ये वक्त वक्त की बात है...   आज खुशियों के पल साथ तो       कल दु:खो की बरसात है।   कही जिंदगी भर का साथ तो  कही एक ही मुलाकात है।  ये वक्त वक्त की बात है....  आईनेसा साफ कुछ भी नही, छल  - कपट ही इंसानियत का पोषाख है।  जिंदगी के कुछ पल चमकिले, तो      कुछ चुल्हे की राख है।  ये वक्त वक्त की बात है...।  घर का प्यार भरा आंगन आज खाली और उदास है।  उड़ते पंछी को आज भी घोंसले की आस है।  ये वक्त वक्त की बात है....। 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet रुत्तिका सुघिर तिमाने  EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर...

Vastra

  _वस्त्र तुम जब धरा पर आए चारों तरफ़ खुशियां छाए मैने ढका था तुमको मैने सहारा दिया था तुमको मै न होता लोग हंसते कोमल काया को देखते मै हर मूल्यों में बिका हर देशों में मिला आत्म सम्मान का रखवाला हूं बड़ा ही दिलवाला हूं मेरे बीना कहां जाओगे न रहूं कैसे मुंह दिखाओगे मैं ही लाज रखता हूं हमेशा साथ देता हूं अफसोस... तुम चिता पर जले मैने साथ छोड़ा तुमको बस बाय बाय बोला घबराओ नहीं फिर मिलता हूं अगले जन्म में..... Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंब पर संपर्क करें।

Pita Mere

  _पिता मेरे पिता मेरे । शत् शत् नमन.. सागर से भी गहरा, अंबर से भी ऊँचा जिसका प्यार है ' पिता " इक शब्द नहीं, संपूर्ण संसार है,  अनुभूति से आनंद तक ... असीम आशीर्वाद है पिता तेरा हमसभी पर अनमोल अनुराग है  मेरी रग-रग में बसा तेरा संस्कार है..  रक्त की हर बूंद तेरी ही कर्जदार है. ये जिंदगी, जज्बा, जुनून, तेरा दिया उपहार है..  मेरी हिम्मत, हौंसला और ये हंसीं तेरा दिया प्यार है..  सागर से भी गहरा, अंबर से ऊंचा जिसका प्यार है पिता इक शब्द नहीं संपूर्ण संसार है  जीवन एक परीक्षा है,सफलता पिता की शुभेच्छा है  जंग भी तेरी, जीत भी तेरी, मेरा जीवन तेरी ही इच्छा है  पिता हमारी पहचान है, सारी खुशियां सारा जहान है  वजूद से जिसके लगता जीवन, हर क्षण नया विहान है.  आदर्श तुमही हो, पिता मेरे ,तुमसे मेरा आत्मविश्वास है  जीवन बने सफल मिले सुख-समृद्धि तेरे आशीष की आश है सागर से भी गहरा, अंबर से भी ऊँचा तेरा प्यार है मेरे  "पिता" तू ही मेरा संपूर्ण संसार है.... 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amita ...

Bhookh

  _भूख भूख लगी है मां कुछ तो खाने को दो राशन के पैसे अब तो लाने को दो भूख अब सहा नहीं जाता हैं मां अब कुछ कहा नहीं जाता रसोई में कुछ रखा हो तो लाके दो खाली डिब्बों मे चिवड़ा झाड़ के दो पेट में चूहे दौड़े है भूख सहने में आंसू पोछे है हाय हाय क्या नसीब है समाज में अब भी गरीब लोग है Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Mere Shabd

  _मेरे शब्द बुराई जब भी पनपे उसे जड़ से उखाड़ फेको इस इंसानी दुनियां में नफरत का बीज मत बोओ बिस्वास किसी भी मज़बूत रिश्ते का आधार है कुछ चीजें कीमत से नही किस्मत से हमको मिलती है कभी कभी खूबसूरती भी घातक होती है जैसे कि हीरा सहनसीलता रखो वसुंधरा के जैसे सबकी कद्र करना सीखो किस्मत तुम्हारी कद्र करेगी जो दिल को प्यारा लगता है उसकी झलक ही सारे दुखों को दूर कर देती है हम खुश रहेंगे तो हमारे आस पास का माहौल भी खुशनुमा रहेगा सच को छुपाने की हज़ार कोशिश कर लो फिर भी सच तो सच होता है जीवन का गणित ये कहता है कि जो झुकता है वही आगे बढ़ता है माता पिता और गुरू से बढ़कर इस संसार में कोई नहीं अपनी खुशियों के लिए किसी का हक मारना ये समझदारी नही बेवकूफी है स्त्री प्रेम से कांटों को भी फूलों में ढाल देती है Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Kya Khareeda

  _क्या खरीदा पैसे से हमने मकान खरीदा आनंद नही खरीद पाए पैसे से हमने शान शौकत खरीदी इज़्जत नही खरीद पाए पैसे से हमने भोजन खरीदा भूख नही खरीद पाए पैसे से हमने बिस्तर खरीदा नींद नही खरीद पाए पैसे से हमने वस्त्र खरीदा वाणी नही खरीद पाए पैसे से हमने गहने खरीदे रूप न खरीद पाए पैसे से हमने कुंडली खरीदी किस्मत नही खरीद पाए पैसे से हमने डिग्री खरीदी ज्ञान नही खरीद पाए पैसे से हमने पानी खरीदा प्यास नही खरीद पाए पैसे से हमने फोन खरीदा रिश्ते नही खरीद पाए पैसे से दूसरो को रुला दिया आंसू नहीं पोंछ पाए पैसा जीवन को चलाने के लिए हमारी अजीविका हैं लेकिन पैसे से बढ़कर भी कुछ है हमे उसे समझना और समझाना चाहिए Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।