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केनवास  निखर रही हूँ थोड़ी सी  तुम्हारे सानिध्य में उकेर रही हूँ  आकृतियांँ टेढी मेढ़ी  आड़ी-तिरछी  कलम फिसल कर जाती है  जब केन्वास के कोरों तक....   तब तुम्हारी  उंगलियांँ थाम लेती है  मेरी उँगलियों की डोर..  तब उभरती है  एक सुगढ़ सुंदर आकृति...  सुनो..  क्या रंग भी भरोगे इसमे? बिछोह की  पीड़ा से परिपूरित..  प्रेम और स्नेह के शब्दों से....??? हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Vandana Bhandari EDUCATION :M.A in Political science and public administration ADDRESS : Mumbai Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Sambhavna

संभावना     उत्तर प्रत्युत्तर के      खेल और मेल मे         देखना    भवनाओं से  खिलवाड़ हो ना जाए ,  इन स्नेह की चाय की  प्याली कि..... देखना मिठास     कहीं खो ना जाए   कृष्ण की बांसुरी की          मधुर धुन    शिव का सती क्रंदन      ना हो पाए      यू सहेजना     इन भवनाओं को...... प्रेम के शब्दों और लिपियों से    फागुन का शृंगार हो जाए    पिरोना माला प्रेम पुष्पों की       जैसे हमारे प्रेम से   प्रेम का अभिनंदन हो जाए,      और वंदन हो जाए।  हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Vandana Bhandari EDUCATION :M.A in Political science and public administration ADDRESS : Mumbai Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. ...

Moun

  मौन   देखो मौन बोल रहा है,   आंखो से मोती चुन रहा है,   अधरों को खोल रहा है,   सासों की सरगम लिए,   शब्दों की उमंग लिए,   भीनी सी मुस्कान लिए ,  होंठो के टांके खोल रहा है,   दिल की बात बोल रहा है,   सारे राज खोल रहा है,   देखो मौन बोल रहा है।    हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Vandana Bhandari EDUCATION :M.A in Political science and public administration ADDRESS : Mumbai Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Prem

. प्रेम मेरे प्रेम से पूरित दिए को ,  तुम प्रेम से प्रज्वलित कर देना।   स्नेह की मासूम कोपलों को,  स्नेह से सिंचित कर देना।   हृदय मे उपजी भावनाओं को ,  पन्नों मे लिखित कर देना।   मै व्याकुल हू इस विरह से ,  मुझे इस दुख से वंचित कर देना।   मै अनभिज्ञ हु तुम्हारे प्रेम से ,  तुम इसे परिभाषित कर देना॥  हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Vandana Bhandari EDUCATION : M. A in political science and public administration ADDRESS : Mumbai Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Setu

    ✍सेतु    प्रीत का धागा बुनते बुनते.....       एक सेतु बना ही लूँगी       एक छोर बांधूंगी मुझसे.....    तुम्हारा छोर भी पा ही लूँगी     प्रेम की धुन को चुनते चुनते......       मधुर संगीत बना ही लूँगी     कागज़ का आलिंगन करके......       तुम्हारी तस्वीर बना ही लूँगी       प्रश्नों को दोहराते दोहराते......       सारे उत्तर पा ही लूंगी       मैं तुम तक सेतु बना ही लूँगी.......  हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Vandana Bhandari EDUCATION : M. A in political science and public administration ADDRESS : Mumbai Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर...

Virah

विरह अधूरा चाँद, अधूरा इश्क़  अधूरे एहसास, फिर..  ये विरह पीड़ा क्यू पूरी है जो यादों के रूप मे   उठती है...  किसी बवंडर सी श्वासों के उछवास सी  तुम्हें ही खुद मे..  महसूसती हूँ  हर श्वांस के साथ..  फिर शांत होकर  छोड़ जाती है करोड़ों ओस के कण जो मानस पटल पर  जम जाते हैं  फिर उन कणों पर  उंगली घुमा कर..  उकेरती हूँ तुम्हारा नाम  जोड़ती हूँ ... अपने नाम के साथ और फिर होंठो से छूकर .. अपनी प्रीत की मुहर लगाती हूँ  सुनो..  सदा रहना  मेरे अंदर  यादों से पूरित  ओस की बूँदें बनकर.. हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Vandana Bhandari EDUCATION : M. A in political science and public administration ADDRESS : Mumbai Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya P...

Himmat

हिम्मत  शेष क्षणों को कट जाना है मिट जाना है सागर की मिट्टी जैसे  बुझ जाना है विरक्त, दंभी चांद को भी  और तारों की चादर को ढंक जाना है  बादल के नीचे  नम आँखों पर ठहरे आँसुओं को  कापोलों की सतह को छू जाना है  सारे विक्षोभ और पीड़ाओं को  होठों से गुज़र बाहर आ जाना है  देखना..... एक दिन  हाथों की उंगलियों के कंपन को  मुट्ठी बन हिम्मत बन जाना है  असंभव को संभव कर जाना है ✍️ हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 add Poet Vandana Bhandari EDUCATION : M. A in political science and public administration ADDRESS :  Mumbai Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Viyog

वियोग कुछ के प्रेम यूं भी होते हैं,  मृग तृष्णा से होते हैं ,  रस्मों की गठरी धोते हैं दुनिया से थोड़ा संभलते हैं  वियोग के आँसू  रोते हैं  मौन की भाषा कहते हैं  एक दूजे की साँसों मे बहते हैं एक बंधन बांध के सोते हैं ख़्वाबों मे स्वतंत्र बहते हैं  प्रेम गीत जो गाते हैं खुद को ही बहलाते हैं मृगतृष्णा कहलाते हैं  रूह से रूह को मिलाते हैं आवाज प्रियतम की सुनते हैं  इच्छाओं को भरके आँखों मे  विरह का विष घूँट पीते हैं  कुछ प्रेम ऐसे भी होते हैं  रस्मों की गठरी धोते हैं ।  हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Vandana Bhandari EDUCATION : M. A in political science and public administration ADDRESS : Mumbai Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते ...

Prateeksha

प्रतीक्षा रास ना आए बात सांझ की,  तुम सुबह की आस बुझने ना देनाषष।  सहेजना प्रतिक्षा के क्षणों को,  मिलन की प्यास बुझने ना देना।  एक रंग नीला एक रंग पीला लेना,  मिलाकर तन मन हरित कर देना।  सूरज के तेज से तपाना स्वयं को ,  चांद की चांदनी का आँचल लेना ।  उष्ण शीत मिलाकर प्रीत हमारी,  अंजलि मे भर तुम पी लेना ।  मै भेजूंगी अपनी रूह यहाँ से ,  प्रियतम तुम रूह वहां से भेज देना ।  बीच समुन्दर मे प्रेम भँवर को ,  मिलन का हमारा द्वीप कर देना ।  हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Vandana Bhandari EDUCATION :M.A in political science & Public administration ADDRESS : Mumbai Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप न...

Prem

 प्रेम तुम इन्हे दूरियां कहो  या नजदीकिया  कुछ तो बंदिशे हैं  कुछ विवशता भी  और कुछ लुकाछिपीयां भी  मै छुपी हूँ तुम मे  और छुपे हो तुम मुझमे  एक दूसरे मे एकाकार हो कर अपना अस्तित्व सौंप कर वफ़ाओं के अंदाज़ लिए  हाँ मुहब्बत के राज लिए गूंजते हैं दोनों एक दूसरे के दिलों मे मंदिर की घंटियों जैसे विस्मय नहीं इस प्रेम पर हमे ये तो प्रेम है हर विस्मय से परे सुनते हुए धड़कनों की आवाज़ें  दिल मे बजते हुए साजों पर  थिरकते दो मनों के पैर  विचरण करते हुए आकाश मे  नापते हुए धरती की धूरियों को  फूलों की नव पुलकित कोंपलों को  चूमते अबोध अधरों से  एक दूजे की अत्माओं को  तन और मन से आत्मसात करते हुए  दोपहर की बाहों मे कसमासाते हुए  केसरीया सांझ को बुलाते हुए  क्या ये हमारा प्रेम मोहताज  है???  किसी पहचान का.... हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Vandana Bhandari EDUCATION :  M.A in political science & Public administration ADDRESS :  Mumbai Pu...