(भवानी माता) (गीत) भवानी माता पहाड़ों से आई मेरे आंगन, जगदम्बा माता नौ दिन विराजे मेरे आंगन। शैलपुत्री देवी पहले दिवस में पधारी, आरोग्य आशीष वरदान संग पधारी, चरणों में गऊ घृत अर्पण करूँ मेरे आंगन। ब्रह्मचारिणी माता दूजे दिवस में आई, चिरायु आशीष संग में लेकर माँ आई, शकर के भोग से हुई प्रसन्न मेरे आंगन। चंद्रघंटा मैया तीजे दिवस में विराजी, मन इच्छा पूरी करने को है मैया राजी, पायस का भोग तुझको जिमाऊँ मेरे आंगन। कूष्मांडा देवी चौथे दिवस में आई, रोग शोक मेरे नष्ट करने को आई, मालपुए अपने हाथ खिलाऊँ मेरे आंगन। स्कंदमाता पंचम दिवस में पधारी, सिद्धि देने माँ मेरे भवन में पधारी, केले के भोग से हुई प्रसन्न मेरे आंगन। कात्यायनी मैया छठवें दिवस घर आई, आकर्षण देने सुन्दर बनाने चली आई, शहद का भोग भेंट करूँ मेरे आंगन। कालरात्रि देवी सप्तम दिवस में आई, रोगों से मुक्ति देने को माँ चली आई, मीठे के भोग से मैया प्रसन्न मेरे आंगन। महागौरी देवी आठवें दिन घर आई, असंभव कार्य करने तुरन्त चली आई, नारियल का भोग हाथ खिलाऊँ मेरे आंगन। सिद्धिदात्री मैया न...
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