मेरी बोलती है कंगना
मेरी बोलती है कंगना
अब आजा मेरे सजना
तेरी याद सताती है
मुझे नींद न आती है
अब तो मुझको तेरे बीना आ आ आ।
तेरे बिन सेज लगे सुनी आँगन भी सुना है
चन्दा के बिना जैसे चकोर अधूरा है
दिल लगता नहीँ तेरे बिन कितना अकेला है
प्रीत का पायल छनके ना आ आ आ
मेरी बोलती है- - - - - - - - -
प्यासी मेरी अखिया बेचैन सांसे है
आमों की डाली से कोयल जो गाती है
उसकी मीठी बोली मुझको जलाती है
काटों सा चूभे मुझे दिन रैना आ आ आ
मेरी बोलती है कंगना- - - - - - - - -
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Poet
Geeta Patel/Jeetendranath Verma
Publisher
Om Tripathi
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Shourya Paroha
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