Sannata सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Sannata

_  विरह का सन्नाटा


सूरज छुपा धुँध के पीछे,

आँखों में ठहरा आसमान।

इस अकेलेपन की रात में,

दिल ढूँढ रहा तेरे निशाँ।


शहर सो गया, नींद के आगोश में,

मेरा जहाँ बस तेरी यादों में सिमटा।


चीख़ रहा अंदर सन्नाटा,

बाहर का मौसम बदला।


हर साँस में बस तेरी खुशबू,

हर धड़कन पे तेरा पहरा।


सन्नाटों में तेरा साया,

नींद के आगोश में,

शहर समाया ।।


धुंधले हुए हैं रास्ते सारे,

कैसे ढूँढूँ मैं अपनी डगर?

खो गए हैं सारे सहारे,

कहाँ ले जाएगा यह सफ़र?


ख़ामोशी ने शोर मचाया,

दिल ने फिर खुद से की उलझन।

टूटे सपनों की राख तले,

दबी हुई है मेरी चुभन।


क्यों थम न जाता ये जीवन,

थक-सा गया हर एक क्षण।

चाँद भी आज बादलों का,

ओढ़कर आया है कफ़न।


~ बाल कृष्ण मिश्रा,

   नई दिल्ली 



टिप्पणियाँ

  1. बेनामी6:21 pm

    यह कविता विरह की गहरी भावना और अकेलेपन के दर्द को बहुत खूबसूरती और गहराई से व्यक्त करती है। यह उन भावनाओं का एक मार्मिक चित्रण है जिनका अनुभव तब होता है जब कोई अपने प्रियजन से दूर होता है।कविता अपने शीर्षक 'विरह का सन्नाटा' के साथ पूरी तरह न्याय करती है। "चीख़ रहा अंदर सन्नाटा" और "हर साँस में बस तेरी खुश्बू" जैसी पंक्तियाँ अकेलेपन की तीव्र पीड़ा और प्रिय की निरंतर उपस्थिति के अहसास को प्रभावी ढंग से पकड़ती हैं।
    🙏

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

हमें बताएं आपको यह कविता कैसी लगी।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Shiv Shakti

_ ॥ शिव-शक्ति संकल्प ॥ शिवालयों से शंखनाद हुआ,  गूंजा यह संदेश, हर नारी में दुर्गा जागे,  हर पुरुष शिव रूप बन जाए। हर थिरकन में सृष्टि की लय, साँसों में ओमकार समाए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। सृष्टि का हर कण है पावन,  शक्ति का हर रूप अनमोल, नारी जब सँवारे घर-आँगन,  और रण में भरती हुँकार। दुर्गा बन संहारे दानव,  काली बन मिटाए अंधकार, उसकी ममता में विष्णु बसें,  संहार में बसा महेश का सार। ब्रह्मा-विष्णु-महेश की शक्ति  हर थिरकन में सृष्टि की लय हर नारी में दुर्गा जागे,  हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पुरुष जब ध्यान में लीन हो,  जटा में गंग बहे अविरल, डमरू की थाप पर नाचता,  काल भी बन जाए शांत और सरल। मिट जाए असुरत्व जगत से, सतयुग सा उजियारा आए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पार्वती संग प्रेम है उसका,  अर्धनारीश्वर रूप महान, हर पुरुष में वही शिवत्व है,  जो त्याग और तप का है ज्ञान। ~ बाल कृष्ण मिश्रा, नई दिल्ली |

Ummeede

_   उम्मीदें उम्मीदें इस जहाँ में बस ख़ुदा से रखना तुम साबरी इंसान कभी किसी के साथ वफ़ा नहीं करते। जो क़ैद कर ले किसी को अपनी यादों में, तो मरने तक उनको उस यादों से रिहा नहीं करते। रूह से इश्क़ करना ये बस ख़्वाबों-ख़यालों  फिल्मों में सुन रखा होगा सबने, हक़ीक़त में इस जहाँ में लोग बिना जिस्म के इश्क़ का सौदा नहीं करते। वादे करके भूल जाना तो इंसान की फ़ितरत है। यहाँ वादे ख़ुदा से भी करके लोग पूरा नहीं करते। ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)