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Naye jamane ke badalte rishte

नये जमाने के बदलते रिश्ते 

   (गीत ) 

पास में हैं पर पास नहीं है 

साथ में हैं लेकिन साथ नहीं है 

कैसा ये आया अब नया दौर 

अपने तो हैं पर अपने नहीं है ।


हुए पराए अपने ,अपने पराये हो गये 

प्रेम भी अब तो नफरत सी हो गये

चलने लगे जब घर दूसरो से 

ये समझो कि घर अब अदालत हो गये ।


जिसे समझा अपना वही दर्द दे गये 

उम्रभर साथ क्या सारे मर्ज दे गये

जमाने को हमने बहुत ही टटोला 

जिसे समझा सच वही झूठे निकल गये ।


अधेरो में रहना अब तो पसंद है 

दीपक की लौ से भी अब तो जलन है 

उजालो में दिखता साफ चेहरा नजर 

कम से कम अंधेरो में सारे रंग भंग है ।


देखा है हमने जमाना कितना झूंठा है 

जो मीठा बोलता वह कितना जहरीला है 

मीठी मीठी बातों में फसते गये हम 

उलझे अभी तक सुलझे नहीं हम।

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Poet

Geeta Patel

EDUCATION :Asawalpur, Pindra, Varanasi (U.P)           
ADDRESS :असवालपुर पिन्डरा वाराणसी 

Publisher

Om Tripathi

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