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Sharab ka nasha

_ शराब का नशा




तुम क्यों पीते हो

अपनी मां का सुकून अपनी पत्नी की खुशी

बहन की इच्छा एक बाप की इज्ज़त

और एक घर का सम्मान

सब एक साथ दो घूंट में पी जाते हो

कभी पूछा इनकी खुशी क्या है?

कभी पत्नी के गहने बेचकर पीते हो

कभी पूछा कि उसके मां बाप ने वो गहने कैसे दिए

कभी मां की तिज़ोरी के पैसे चुराकर पीते हो कभी मां से पूछा कि वो पैसे तिज़ोरी में क्यों बचाकर रखी थी?

कभी घर का सामान बेचकर पीते हो

कभी पूछा बाप से वो घर का सामान कैसे कमाकर लाए थे?

मर्दाना कमज़ोरी से रंग दी गई है शहर की दिवारे और नशे की हालत में कहते हो की समझाने वाले ही कमज़ोर है

तुमको लगता हैं तुम चोरी छिपे पीते हो तुम्हारे घर वाले जानते नही

सब लोग जानते हैं

बस सामने बोलकर अपना रिश्ता खराब नही करना चाहते हैं

अपने परिवार वालों की खुशी चाहते हो तो आज से

संकल्प लो शराब को हाथ नही लगाओगे



Amrita tripathi



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Ummeede

_   उम्मीदें उम्मीदें इस जहाँ में बस ख़ुदा से रखना तुम साबरी इंसान कभी किसी के साथ वफ़ा नहीं करते। जो क़ैद कर ले किसी को अपनी यादों में, तो मरने तक उनको उस यादों से रिहा नहीं करते। रूह से इश्क़ करना ये बस ख़्वाबों-ख़यालों  फिल्मों में सुन रखा होगा सबने, हक़ीक़त में इस जहाँ में लोग बिना जिस्म के इश्क़ का सौदा नहीं करते। वादे करके भूल जाना तो इंसान की फ़ितरत है। यहाँ वादे ख़ुदा से भी करके लोग पूरा नहीं करते। ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)

Shiv Shakti

_ ॥ शिव-शक्ति संकल्प ॥ शिवालयों से शंखनाद हुआ,  गूंजा यह संदेश, हर नारी में दुर्गा जागे,  हर पुरुष शिव रूप बन जाए। हर थिरकन में सृष्टि की लय, साँसों में ओमकार समाए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। सृष्टि का हर कण है पावन,  शक्ति का हर रूप अनमोल, नारी जब सँवारे घर-आँगन,  और रण में भरती हुँकार। दुर्गा बन संहारे दानव,  काली बन मिटाए अंधकार, उसकी ममता में विष्णु बसें,  संहार में बसा महेश का सार। ब्रह्मा-विष्णु-महेश की शक्ति  हर थिरकन में सृष्टि की लय हर नारी में दुर्गा जागे,  हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पुरुष जब ध्यान में लीन हो,  जटा में गंग बहे अविरल, डमरू की थाप पर नाचता,  काल भी बन जाए शांत और सरल। मिट जाए असुरत्व जगत से, सतयुग सा उजियारा आए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पार्वती संग प्रेम है उसका,  अर्धनारीश्वर रूप महान, हर पुरुष में वही शिवत्व है,  जो त्याग और तप का है ज्ञान। ~ बाल कृष्ण मिश्रा, नई दिल्ली |

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