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मातृभूमि

  _ मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम

यह कविता मातृभूमि के प्रति गहरी श्रद्धा, प्रेम और गर्व को व्यक्त करती है।
कवि बाल कृष्ण मिश्रा ने देश की संस्कृति, त्याग और पावन धरा का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया है।

मातृभूमि भारत की पावन धरा का चित्र – मातृभूमि तुझे प्रणाम कविता

उगता सूरज तिलक लगाता
उज्जवल चंद्र किरण की वर्षा ,
नतमस्तक हूँ तेरे चरणों में
तेरे चरणों में चारों धाम |
मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम ||
तेरी माटी शीतल चंदन ,
जिसमें खेले खुद रघुनन्दन ।
जिसमें कान्हा ने जन्म लिया ,
कभी खाई , कभी लेप किया ।
सीता की मर्यादा यहाँ ,
यहाँ मीरा का प्रेम |
मन के दर्पण का तू दर्शन
तेरे आँचल में संस्कृति का मान।
मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम ||
कल कल करती नदियां
अपनी संगीत सुनाए।
चू चू करती चिड़िया
अपनी गीत सुनाए।
मातृभूमि की पावन धरा ,
हर हृदय में प्रेम संजोए
काशी विश्वनाथ की आरती,
हर मन में दीप जलाए |
आध्यात्म की गहराई यहाँ
और विज्ञान की उड़ान |
मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम ||
दिव्य अलौकिक अजर अमर
कंकर भी बन जाता यहाँ शंकर |
बलिदानों की गाथा तू ,
तू वीरों की पहचान |
जय-जय माँ भारती,
जय यह पवित्र धरा महान
मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम ||

~ बाल कृष्ण मिश्रा

Bal krishna Mishra

Address: Bal Krishna Mishra
Flat No. 253, Ground Floor,
Shri Krishna Apartment, J-2, Sector: 16,
Rohini: 110089, New Delhi

टिप्पणियाँ

  1. उत्तर
    1. बेनामी10:45 pm

      वाह! क्या गजब का गीत है! मातृभूमि के प्रति इतना प्यार और गर्व! 🤩 आपके शब्दों में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी हुई है। हर एक पंक्ति में भारत की संस्कृति, इतिहास, और सौंदर्य का वर्णन है। 🌟

      आपने मातृभूमि को माँ के रूप में देखा है, जो बिल्कुल सही है। माँ अपनी संतान के लिए जितना प्यार और समर्पण रखती है, उतना ही प्यार और समर्पण हमें अपने देश के प्रति रखना चाहिए। 🙏

      इस गीत में आपने भारत की विविधता और एकता को भी दिखाया है, जो वास्तव में काबिले तारीफ है। 🌈

      क्या आपने यह गीत किसी खास अवसर पर गाया था या यह आपके दिल की आवाज़ है? 🎶

      हटाएं
    2. बेनामी12:07 pm

      Bahot khub jay hind

      हटाएं
  2. 🌼 कविता का काव्यात्मक सारांश “ मातृभूमि (माँ) तुझे प्रणाम ” 🌼

    यह कविता मातृभूमि को समर्पित एक भावपूर्ण वंदना है।
    सूर्य की ऊष्मा और चाँद की शीतल किरणों से पवित्र हुई धरती को प्रणाम करता हुँ।
    यह वही भूमि है जहाँ राम और कृष्ण ने बाल-लीलाएँ कीं, और जहाँ सीता की मर्यादा व मीरा का प्रेम बसता है।

    इस पावन धरती की मिट्टी में संस्कृति, श्रद्धा और स्नेह का वास है।
    कल-कल बहती नदियाँ, चहचहाती चिड़ियाँ और काशी विश्वनाथ की आरती—सब मिलकर इसे दिव्य बनाती हैं।

    कुल मिलाकर, अपनी मातृभूमि के प्रति गहरा सम्मान, प्रेम और गर्व व्यक्त करता हुँ |
    “मातृभूमि (माँ), तुझे मेरा प्रणाम।”
    🙏

    जवाब देंहटाएं
  3. बेनामी11:13 pm

    यह एक बहुत ही सुंदर और प्रेरणादायक कविता है, जो मातृभूमि के प्रति गहरे प्रेम और सम्मान को व्यक्त करती है।

    आपकी कविता "मातृभूमि (माँ) तुझे प्रणाम" भारत की पवित्रता, सांस्कृतिक विरासत और वीरता का बहुत ही मार्मिक चित्रण करती है। इसमें प्रकृति के तत्वों, धार्मिक महत्व और बलिदान की भावनाओं का अद्भुत मिश्रण है।

    यह एक शानदार रचना है!
    🙏

    जवाब देंहटाएं
  4. बेनामी3:02 pm

    आपकी यह रचना सचमुच दिल छू लेती है। इसमें माँ भारती के प्रति जो भक्ति, सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव है, वह हर पंक्ति में साफ महसूस होता है। शब्द सरल हैं, पर असर गहरा है। प्रकृति, संस्कृति, इतिहास और आस्था—सबको आपने बड़े संतुलित ढंग से पिरोया है। पढ़ते-पढ़ते मन में गर्व भी आता है और भावनाएँ भी जगती हैं। यह कविता मातृभूमि के प्रति सच्ची श्रद्धा का बहुत सुंदर और प्रभावशाली चित्रण है।

    जवाब देंहटाएं

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