होली - रंगों की झोली
आया समय दहन का
हिरण्यकश्यप की बहन का ।
भस्म न हुआ प्रल्हाद वो
विष्णु भक्त महान वो ।
आओ खेलें हीर ,गुलाल की होली
भर दे खुशियों से सबके मन की झोली।
होलिका का दहन हुआ
बुराइयों का पतन हुआ ।
विजय हुई धर्म की
पराजय हुई अधर्म की ।
आओ खेलें हीर ,गुलाल की होली
भर दे खुशियों से सबके मन की झोली।
आई विभिन्न रंगों की होली
नाचते , गाते लोगों की टोली।
मिट जाए अंधकार जैसा मल
न करे कोई किसी से छल।
आओ खेलें हीर ,गुलाल की होली
भर दे खुशियों से सबके मन की झोली।
हर दिन हो जाए इंद्रधनुष सा रंगीन
मिटे आपसी मन मुटाव बने जीवन हसीन ।
रंगों की छटा ऐसी बरसाए
हर एक पल जीवंतता से खिलखिलाए ।
आओ खेलें हीर ,गुलाल की होली
भर दे खुशियों से सबके मन की झोली।
होली की हार्दिक शुभकामनाए !
दीप्ति परचुरे
Education --M.A.English
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