_धूप
गर्मी में अच्छी नहीं लगती
सर्दी में मन को लुभाती
कुछ पल के लिए कभी नहीं टिकती
कभी कभी पेड़ो के झुरमुट छिपती
देखो कोई देख न ले अरे... कोई पूछ न ले
खिड़की से झांक लेती और आंगन से खिलखिला जाती
कभी कभी तो दबे पांव भाग जाती
आपने भी देखा हमने भी देखा
कैसा है ये प्रकृति का लेखा
शहर हो गांव हो हर जगह बस मेरी भरमार हो
Amrita tripathi
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Poet
Amrita Tripathi
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Nice 👍 sister
जवाब देंहटाएंGood 😊👍
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