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संदेश

Shree mahakal tandav stuti

_ श्री महाकाल तांडव स्तुति  सदाशिव शंकर महेश्वर महेश, परमेश्वर त्रिलोचन त्रयंबक त्रिनेत्र। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, भव-भय हरन भोलेनाथ, जय जय शिव शंकराय॥ प्रचंड-तांडव-नृत्य-रत, दिगंबर-विश्वरूपम्, शून्य-हृदय-निवासी, पूर्ण-ब्रह्म-अनुपमम्। अनादि-अनंत-कालचक्र-अधिपति, महादेव-महंतम्, क्षण-भंगुर-लीलाधारी, विभु-अविनाशी-अनंतम्॥ जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी, शीश-शशांक-धवल-दीप्ति, अमृत-रस-झरी। व्याल-कराल-माल-कंठ, भस्म-विलेपन-धारी, वैराग्य-पुंज-महायोगी, त्रिपुर-अरि-विनाशकारी॥ त्रिशूल-धारिणी-शक्ति, न्याय-वज्र-प्रहारम्, डमरू-नाद-गुंजित-ब्रह्मांड, सृजन-स्वर-सारम्। महानाश-कुक्षि-स्थित, नूतन-सृष्टि-विधानम्, रुद्र-भीषण-संहार, शिव-सौम्य-निर्माणम्॥ काल-काल-महाकाल, काल-जयी-अनामी, चराचर-जगत-रक्षक, विश्वेश्वर-स्वामी। करुणा-पारावार-शंभू, तारन-तरन-हारी, शरण्य-चरण-कमल-अर्पित, जय-जय-पुरारी॥ ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, हर हर महादेव, जय शिव शंकराय॥ ~ बाल कृष्ण मिश्रा, नई दिल्ली |

Love Shayari -1

 _  लव शायरी – 1 मुझ पर मुकदमा तू दायर कर दे तू अल्फ़ाज़ बन और मुझे शायर कर दे तेरे पैरों की मैं पायल बनके छनकूँ हर वक्त तू अपने नैनों से मुझे कुछ इस तरह घायल कर दे ~Adarsh dixit

Shiv Shakti

_ ॥ शिव-शक्ति संकल्प ॥ शिवालयों से शंखनाद हुआ,  गूंजा यह संदेश, हर नारी में दुर्गा जागे,  हर पुरुष शिव रूप बन जाए। हर थिरकन में सृष्टि की लय, साँसों में ओमकार समाए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। सृष्टि का हर कण है पावन,  शक्ति का हर रूप अनमोल, नारी जब सँवारे घर-आँगन,  और रण में भरती हुँकार। दुर्गा बन संहारे दानव,  काली बन मिटाए अंधकार, उसकी ममता में विष्णु बसें,  संहार में बसा महेश का सार। ब्रह्मा-विष्णु-महेश की शक्ति  हर थिरकन में सृष्टि की लय हर नारी में दुर्गा जागे,  हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पुरुष जब ध्यान में लीन हो,  जटा में गंग बहे अविरल, डमरू की थाप पर नाचता,  काल भी बन जाए शांत और सरल। मिट जाए असुरत्व जगत से, सतयुग सा उजियारा आए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पार्वती संग प्रेम है उसका,  अर्धनारीश्वर रूप महान, हर पुरुष में वही शिवत्व है,  जो त्याग और तप का है ज्ञान। ~ बाल कृष्ण मिश्रा, नई दिल्ली |

Sannata

_  विरह का सन्नाटा सूरज छुपा धुँध के पीछे, आँखों में ठहरा आसमान। इस अकेलेपन की रात में, दिल ढूँढ रहा तेरे निशाँ। शहर सो गया, नींद के आगोश में, मेरा जहाँ बस तेरी यादों में सिमटा। चीख़ रहा अंदर सन्नाटा, बाहर का मौसम बदला। हर साँस में बस तेरी खुशबू, हर धड़कन पे तेरा पहरा। सन्नाटों में तेरा साया, नींद के आगोश में, शहर समाया ।। धुंधले हुए हैं रास्ते सारे, कैसे ढूँढूँ मैं अपनी डगर? खो गए हैं सारे सहारे, कहाँ ले जाएगा यह सफ़र? ख़ामोशी ने शोर मचाया, दिल ने फिर खुद से की उलझन। टूटे सपनों की राख तले, दबी हुई है मेरी चुभन। क्यों थम न जाता ये जीवन, थक-सा गया हर एक क्षण। चाँद भी आज बादलों का, ओढ़कर आया है कफ़न। ~ बाल कृष्ण मिश्रा,    नई दिल्ली 

Haan Tum

 _  हाँ तुम !   मैंने चाहा है तुमको  मेरी चाहतों में तुम I    गुजरे कल में तुम  उगते सूरज में तुम I    बहती हवाओं में तुम  बरसते बादलों में तुम I    खिलते फूलों में तुम  ढलती शामों में तुम I हाँ तुम ! मन की सुंदरता  तन का सुंदर रूप I लब तेरे मधुशाला  हर अंग पुष्प की माला I स्वप्न की परी  तुम  हो यौवन रस का अमृत  प्याला I हाँ तुम ! तुम जीवन ज्योति  तुम करुणा तुम भक्ति   तुम ही मेरा बंधन I मेरा इश्क तुम   मेरी जान तुम  मेरा हर लम्हा तुमसे  तुम ही मेरा दर्पण I हाँ तुम ! बेचैन दिल तन्हा मन  तस्वीर तेरी चूमते नयन I मिलकर तुमसे  लिपटूंँ मैं ऐसे  जैसे चंदन से लिपटे भुजंग I मेरा ख्वाब मेरी हकीकत  मेरी चाहत मेरा जूनू  हाँ तुम !                   -बाल कृष्ण मिश्रा

Dansh le jo tu mujhe

_   दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए ! यह कविता भीतर के सूनापन, अधूरेपन और गहरी मोहब्बत की उस कसक को व्यक्त करती है, जो यादों और चाहत के बीच इंसान को बेचैन भी करती है और सुकून भी देती है। भाव इतने गहरे हैं कि हर पंक्ति दिल की धड़कनों को छूती है। 💔 दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए 💔 बीते लम्हों का सूनापन तेरी यादों का महकता चंदन आंखें में थमी तेरी परछाई, रोशनी बनकर बूंदों में घुल जाए । दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए | कहां मुमकिन है मोहब्बत को लफ्ज़ों में बयां कर पाना । आसान नहीं भुला, यादें सुकून की नींद में सो जाना । ज़िस्म से रूह तलक, बस सुकून छा जाए । दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए | जीवन के पावन ‘निर्झर’ को, तुम यूँ ही बह जाने दो । एक पल, बस एक पल, नीले अँधेरे में गुम हो जाने दो । तारों की चादर ओढ़, चाँद की रोशनी में खो जाऊं । तेरी मोहब्बत की खुशबू में, खुद को फिर से पा जाऊं । ज़िस्म से रूह तलक, बस सुकून छा जाए । दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए | तेरे बिना सारा जहाँ, सूना सा लगता है, जैसे एक सिसकी.… जैसे एक सिसकी । ये कैसा अधूरापन ? ये कैसा सूनापन ? शायद यही है इश्क...

Jindagi

 _   आसान नही होती लड़को की जिंदगी अपने अंदर कितना दर्द छुपा कर रखते है. फिर भी कभी किसी से कुछ कहते नही है. हमने तो यूं ही उन्हे पत्थर समझ लिया।  ना जाने सबके लिए क्या कुछ नही किया।।  जितना हम सोचते उतनी आसान नहीं होती लड़को की जिंदगी उनके कंधो पर बचपन से डाल दी जाती है जिम्मेदारी।  पता नहीं कहाँ से आ जाती इनमे यह समझदारी।।  सब की ख्वाइश इनको करनी होती है पूरी।  क्योंकि इनके लिए वही है सबसे जरूरी।।  जितना हम सोचते उतनी आसान नहीं होती लड़को की जिंदगी मुश्किल है, इनकी तरह हर हाल मे शांत रहना।  अपने आँसुओ को आँखों मे ही रहने देना।।  फिर भी कभी किसी से कुछ न कहना।  इनकी आदत है यह सब कुछ सहना।।  जितना हम सोचते उतनी आसान नहीं होती लड़को की जिंदगी दिल मे हर दर्द को छुपाया है इन्होंने।  हर पल सबको हंसाया है इन्होंने।।  पता नही कितने दर्द दफना दिये। चेहरे पर हमारी मुस्कराहट के लिए।।  जितना हम सोचते उतनी आसान नहीं होती लड़को की जिंदगी लड़कियों के जाने पर तो जमाना रोता है।  इनके जाने से परिवार चैन की नींद सोता है...

Naree Shakti

 _  नारी  शक्ति  नारी  तू  शक्ति  है ,  श्रद्धा  सुमन  भक्ति  है  तू  गौरी  ,  तू  लक्ष्मी  ,  तू  सरस्वती  है || तू करुणा है,  तू ममता है,  तू जननी है,  तू माया है तू शक्तिस्वरुपिणी दुर्गा,  सत्यस्वरुपिणी राधा है || तू  भाव है, तू भावना है,  तू लज्जा है,  तू सज्जा है तू नंदिनी, तू कामिनी, तू सद्गुण वैभव शालिनी  है || तू  इत्र  है ,  तू  मित्र  है ,  तू  चित्र  है ,  तू  चरित्र  है तू  दृष्टि , तू  चेतना , तू  सृष्टि ,  तू  बंदना  है || मीरा  की  भक्ति  तुझमें ,  मां  अहिल्या  का  धैर्य  पद्मावती  सी  साहस  तुम  में,  लक्ष्मीबाई का शौर्य  तेरे  ज्ञान  से  है  जीवन  तेरे  कर्मो  से  है  पहचान ऋृणी रहेगी ये धरती तू है  हाड़ी  रानी  का बलिदा...

Tanha

_ मैं बेचारा तन्हा अकेला  मैं बेचारा तन्हा अकेला भीगी राहों पर ढूँढ रहा, खुद को, कहीं | सड़कें भीगीं, शहर धुंधला, आसमान में घना कोहरा | भीगे आँखों से छलके यादों की धार, हर बूँद में गूँजे तेरा प्यार। शहर की भीड़ में, मैं खुद से पूछता, अपनी परछाई से ही अब मैं रूठता। पत्थरों में चमक, पर दिल में अँधेरा, टूटे सपनों सा लगता जीवन | खोया है कुछ, या पाया सवेरा? मैं मुस्कुराता नहीं मगर, हार भी मानता नहीं | सपनों की राख से, गढ़ता कोई सितारा।  ~ बाल कृष्ण मिश्रा Address: Bal Krishna Mishra          Flat No. 253, Ground Floor, Shri Krishna Apartment, J-2, Sector: 16, Rohini: 110089, New Delhi.          

मातृभूमि

  _ मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम यह कविता मातृभूमि के प्रति गहरी श्रद्धा, प्रेम और गर्व को व्यक्त करती है। कवि बाल कृष्ण मिश्रा ने देश की संस्कृति, त्याग और पावन धरा का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया है। उगता सूरज तिलक लगाता उज्जवल चंद्र किरण की वर्षा , नतमस्तक हूँ तेरे चरणों में तेरे चरणों में चारों धाम | मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || तेरी माटी शीतल चंदन , जिसमें खेले खुद रघुनन्दन । जिसमें कान्हा ने जन्म लिया , कभी खाई , कभी लेप किया । सीता की मर्यादा यहाँ , यहाँ मीरा का प्रेम | मन के दर्पण का तू दर्शन तेरे आँचल में संस्कृति का मान। मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || कल कल करती नदियां अपनी संगीत सुनाए। चू चू करती चिड़िया अपनी गीत सुनाए। मातृभूमि की पावन धरा , हर हृदय में प्रेम संजोए काशी विश्वनाथ की आरती, हर मन में दीप जलाए | आध्यात्म की गहराई यहाँ और विज्ञान की उड़ान | मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || दिव्य अलौकिक अजर अमर कंकर भी बन जाता यहाँ शंकर | बलिदानों की गाथा तू , तू वीरों की पहचान | जय-जय माँ भारती, जय यह पवित्र धरा महान मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || ~ बाल कृष्ण मिश्रा Addres...

Manavata

 _  मानवता 🙏🙏जय माँ सरस्वति🙏🙏 “यह कविता ‘मानवता’ हमारे समाज में बढ़ती ठिठुरन और दया-भाव के अभाव को व्यक्त करती है। खुशबू पांडे त्रिपाठी द्वारा लिखित यह हिंदी कविता विशेष रूप से शीत, कोहरा तथा मानवीय संवेदनाओं पर केंद्रित है।” ठिठुर रहा है सब, वन उपवन ठिठुरा रहा जग सारा । ठिठुर गई हैं सुन्दर कलियाँ, है ठिठुरा हुआ नजारा ।। ठिठुर गई है धरती अम्बर है, ठिठुरा हुआ उजियारा । ठिठुर गई हैं बहती नदियाँ, ठिठुरा हुआ किनारा ।। ठिठुर न ज़ाए पुलकित मानव दया का ह्रदय तुम्हारा । ठिठुर गई हैं गीली रातें हैं, ठिठुरा हुआ दिन बेचारा ।। टपक रहै हैं‌ ओश ऐसे,टपके जैसे मोती। घासों के झुरमुट में गुंथे गुंथी‌‌ हो‌ जैसे‌ चोटी।। धूल लपेटे वृक्ष खड़े हैं, लिपटी हों जैसे धोती। कोहरे की मुस्कान खिली है, नज़र बड़ी खोटी।। सूरज की किरणों को देखकर शर्दी खूब बड़ाए। रातों को यह ठंडे कोहरे फूले नहीं समाए।। ठिठुर रही है ,अब मानवता, प्रेम जगह न पाए। रोश ,क्रोध और निन्दा नफरत दिन प्रति पैर बड़ाए।। ~ खुशबु पांडे त्रिपाठी

शेर भी जानता था

 _ शेर भी जानता था शाम का वक्त था। श्याम जैसे ही दफ्तर से लौटकर घर आया, पूरे घर में रौनक सी फैल गई। बच्चे, बूढ़े, औरतें – सब उसके पास आकर दिनभर की बातें साझा करने लगे। हर दिन की तरह आज भी सबसे अंत में उसका वफादार कुत्ता “शेर” आया। वह चुपचाप श्याम को देखता, सर झुकाकर अपनी खुशी जाहिर करता और फिर पास में बैठ जाता। धीरे-धीरे श्याम की जिंदगी एक ढर्रे पर चलने लगी थी। श्याम की पत्नी विमला, तेज-तर्रार और साफ बोलने वाली महिला थी। अक्सर वह आंगन में खड़ी होकर पड़ोसियों से बातें करती और बीच-बीच में श्याम को ताना भी मारती, "श्याम! आकर खाना क्यों नहीं खा लेते? मैं बाकी औरतों की तरह नहीं हूं जो बार-बार खाना गरम करके दूं।" लेकिन श्याम जानता था कि विमला जैसी दिखती है, वैसी नहीं है। उसके दिल में प्यार भी था, बस तरीका कड़वा था। कुछ दिन पहले विमला के भाई की शादी थी, लेकिन श्याम आर्थिक तंगी के कारण विमला को नए कपड़े नहीं दिला सका था। यही बात विमला के गुस्से की वजह बन गई थी। श्याम पूरे घर का एकमात्र कमाने वाला था। उसकी तनख्वाह से ही सब चलता था। वह दिन-रात मेहनत करता ताकि अपने परिवार की जरूरतें पूर...

Faasle

_ फासले  यूँ फासले जो तेरे मेरे दरमियाँ आने लगे, हमें लगता है, तुम कहीं और दिल लगाने लगे। अपनी थकावट सुना कर अब जो तुम, हमें बहलाकर, हमें ही सुलाने लगे। हम समझ गए हैं — कि "जान", "जानू", "डार्लिंग" कहकर, तुम अब किसी और को बुलाने लगे।  ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)

Pagal

_ पागल हो क्या तुम? क्यों कोई तुमको आँखों में बसा ले काजल हो क्या तुम? शहर की गलियों में गाँव वाली मोहब्बत ढूंढ रही हो, पागल हो क्या तुम? अब कहाँ कोई छत पर आकर तोहफ़े में दुपट्टा दिया करते हैं, अब तो व्हाट्सऐप चैट पर बिना कपड़ों के फोटो मंगा लिया करते हैं। बिना देखे मोहब्बत करने का दौर गुज़रे बरसों हुआ करते हैं, देखो सूरज ढलने को आया, चलो अपने-अपने घर चलते हैं। ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)

Ghar se Nikli

- घर से निकली घर से निकली तब जा कर ये बात समझ आई मुझे, कि कहीं खा न जाए महफ़िल की तन्हाई मुझे, जो लगती थी अक्सर। अपनों की बातें रुसवाई मुझे, लड़खड़ाने पर क़दम मेरे सभाली उनकी ही परछाईं मुझे। पहले नादान थे जो, समझ न पाते थे रिश्तों को, आज जो अकेले हुए तो समझ आई उनकी गहराई मुझे। जो न आती मैं घर वापस तो मार देती लोगों की बेवफ़ाई मुझे | ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)

Adhuri Mohhabat

_ अधूरी मोहब्बत ना मैं उसके तक़दीर में ना वो मेरी हाथों की लकीर में ये मोहब्बत इतना आसान नहीं होता,  साबरी कभी-कभी तो लोग पागल बनकर बंध जाते हैं लोहे की ज़ंजीर में। ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)

Ummeede

_   उम्मीदें उम्मीदें इस जहाँ में बस ख़ुदा से रखना तुम साबरी इंसान कभी किसी के साथ वफ़ा नहीं करते। जो क़ैद कर ले किसी को अपनी यादों में, तो मरने तक उनको उस यादों से रिहा नहीं करते। रूह से इश्क़ करना ये बस ख़्वाबों-ख़यालों  फिल्मों में सुन रखा होगा सबने, हक़ीक़त में इस जहाँ में लोग बिना जिस्म के इश्क़ का सौदा नहीं करते। वादे करके भूल जाना तो इंसान की फ़ितरत है। यहाँ वादे ख़ुदा से भी करके लोग पूरा नहीं करते। ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)

Hamari Pehli MulaKat

 _ हमारी पहली मुलाक़ात हमारी पहली मुलाक़ात हमें हमारी दूरियाँ बता रही थी। वो अपनी बीवी और बच्चों के साथ सामने से आ रहा था। उसे किसी और के साथ देखकर दिल मेरा जैसे बैठा जा रहा था। वो भी अपनी पलकों को बार-बार झुका रहा था, शायद अपने आँसू छिपा रहा था। बदलकर रुख अपना उसकी तरफ से, जो मैं आगे को निकली, तो कोई मुझे मेरे नाम से पुकार रहा था। पलटकर जो मैं देखी तो, पता चला — माँ-बाप और समाज से हारा हुआ एक लड़का, अपनी बेटी को अपनी माशूका के नाम से बुला रहा था ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)

Khushhal Khushi

. खुशहाल ख़ुशी खुशियों की लहर दौड़ पड़ी रामदत्ती परिवार में पाकर एक सुंदर सी कन्या भर गए जज़्बात में बेटे के बाद बेटी आई इस छोटे से परिवार में "ख़ुशी" जिसका नामकरण हुआ इस जहान में। नाज़ुक सी, कोमल सी कली है वो सब के दिलों की धड़कन है वो पापा की लाडली, मम्मा की दुलारी भाई की नज़रों में बहुत ख़ास है वो। एक मामा की आँखों का नूर है तो दूसरे मामा के जीवन का हूर है सभी मौसियों की वो चश्म-ए-बद दूर है सादगी सा जीवन, करती नहीं मगरूर है। पढ़ाई में हमेशा ही वो अव्वल रहती है अपने भविष्य की वो सदैव क़दर करती है जी जान से मेहनत वो करती रहती है और सुनहरे सपने वो सदा बुनती रहती है। --- बहुत कुछ मन में संजोए रखा है अपना निश्चित उद्देश्य बनाए रखा है सफलता का मन में हठ निश्चय कर रखा है बिना किसी सहयोग के, स्वयं को परखा है। भविष्य में कुछ अच्छा करने की ठानी है परिवार में उसके जैसा नहीं कोई सानी है भोली मासूम सी, लेकिन लगती बेगानी सी है जल्द ही किसी से खुलती पहचान नहीं लेकिन अपनी तो दीवानी है। खूब करो मेहनत और अच्छी ज़िंदगी बनाओ समाज और परिवार में खूब नाम कमाओ यही दुआ करता है ईश्वर से ये ना...

Gauraiya ki Pukaar

 गौरेया की पुकार तपती दुपहरी और तेज धूप, छोटा सा आसियान मेरा भी है। आप के आराम के वक्त, मैं भी आई थी। तपती दुपहरी में सो रहे थे आप,  मैं मुंडेर से पुकार कर लौट आई। 'कूलर' की कर्कस आवाज ने,  मेरी करूण पुकार को दबा दिया।। - राधेश्याम जोशी कोहिणा Poet  राधेश्याम जोशी कोहिणा EDUCATION : ADDRESS :

Basant Ki Bahaar

बसंत की बाहार बसंत की बाहार फूलों की भरमार खुशबू से भरा ये संसार  रंगों से रंगा में हूँ पलास तन भी सुंदर मन भी सुंदर l ओर मेरा जीवन है सुंदर, धूप लगे न प्यास  मानव मन मोहित हो जाता भूख लगे ना प्यास l रहो आप सुखमय जीवन में खुशियों की बाहार l  अवनि भी अपना रंग बिखरे, केशर और हरियाली की शान l मानव मन मोहित जाता भूख लगे ना प्यास  फूलों सा रंग लगावो जाति,  धर्म का भेद मिटावो l रहो आप सुखमय जीवन में खुशियों की बाहार, धरा को भी आंच न आए फूलों सा रंग लगावो खुशियों की बाहार l रहो आप सुखमय जीवन में खुशियों की बाहार  जाति धर्म का भेद मिटावो होली का त्यौहार मनावो  खुशियों की बाहार, मिल बाट कर खुशियां मनावो सुख समृद्धि घर में लाओ  होली का त्यौहार मनावो फूलों सा रंग लगावो  रहो आप सुखमय जीवन में खुशियों की बाहार  बसंत की बाहार फूलों की भरमार खुशबू से भरा ये संसार  रहो आप सुखमय जीवन में खुशियों की बाहार l                          सुरेश कटारा एम. एस. सी वनस्पति शास्त्र  प्रक...

Mann ki vriti

 मन की वृत्ति अशांत है - - मन की वृत्ति अशांत है,   विचारो की हिम् चहलाहट है।   आल्हादिनी की ध्व ध्वरे,   हृदय पराजित जो थे मेरे।   जीवन पराकलम्बी हो गया,   मन मृत आवेग में खो गया।   वही जीवन महान है,   जिसका मन प्रशांत है।                          -     Poet  "दीनानाथ सागर"   EDUCATION : ADDRESS :

Premika ki akhiri khwahish

_ प्रेमिका की आखिरी ख्वाहिश " इश्क से भी ज्यादा इश्क है तुमसे,   खुद से‌ भी ज्यादा मोहब्बत है तुमसे,   अगर मेरी आखिरी  ख्वाहिश कोई पूछे मुझसे,   तो मेरे दिल से यही आवाज आएगी कि वो ख्वाहिश है सिर्फ तुमसे..! Poet  Secret Queen EDUCATION : ADDRESS :

Hoslon ki udaan

"हौसलों की उड़ान"   एक लड़की की हैयह कहानी प्यारी  उसको पढ़नेका हैशौक बड़ा  पर उसके साथ आज तक कोई खड़ा ना हुआ,  उसनेअकेलेही चलना सीख लिया  दुनिया सेभी लड़ना सीख लिया  कदम बढ़ेंगेउसके आगेसदा,  घबराई सी सहमी सी  दुनिया वो अकेले कैसे लड़ेगी  भला  सपना है उसका बहुत  बड़ा  पर कोई उसके साथ नहीं है खड़ा,  फिर भी आगे चल रही है  अपने सपनों की मजिंल खद ही तय कर रही है,  हैउसको खुद पर ये यकीन बड़ा  एक ना एक दि न कोई जरूर होगा उसके भी साथ खड़ा,  आगे बढ़ेगी अपने सपनों तक मजिंल तक  पा लेगी वो एक दिन शिखर बड़ा  आए हजारों मश्किलें लेकिन  वो अपना रास्ता बना ही लेगी  खुद के मन को बहला ही लेगी  पर वो ना रोकेगी कदम अपना,  उसको हैयकींकी मजिंल मिल ही जाएगी  जो भी करेगा मेहनत सदा,  एक लड़की की है ये कहानी प्यारी  जिसका कदम कभी ना रुका है  तलाश उसको अभी भी अपनी मजिंल की  वो ना रुकेगी जब तक है उसमें जां..!  Poet  Secret queen EDUCATION ...

Gazal

ग़ज़ल दुनियाँ की ये अजब यहांँ तस्वीर है।  गमों से भरी हुई यहांँ जिंदगी है ॥ प्यार करने वाले प्यार कर ना सके।  लुटने को यहांँ जिंदगी है ॥ दो कदम साथ-साथ जो यहांँ चले।  बिछड़ने को अब जिंदगी है ॥ हाल क्या पूछोगे इन गरीबों के।  दफन होती यहां उनकी जिंदगी है ॥  मत हो जिंदगी यहांँ खराब कोई भी।  कीमती सभी की यहांँ जिंदगी है॥  👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet  Dinanath Sagar EDUCATION : ADDRESS :

Dadi Maa

दादी मांँ दादी रोज सवेरे उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि करके भगवान की पूजा करती और समय पर रसोई में आकर अपने पसंद का नाश्ता बनवाती है दादी के घर में सब संस्कारी है। दादी ने सबको संस्कारी बनाया घर में आए हुए थेअतिथि का पूरा आदर् सत्कार हो तथा बच्चे बड़े बूढ़े सब का सम्मान हो। दादी अपना कोई काम अगर किसी पड़ोस में भी कह दे तो कोई मना नहीं करता ।बच्चे बूढ़े गली गुवाड़ सब दादी का कहना मानते हैं। दादी छोटी उम्र में ही विधवा हो गई। उस जमाने में विधवा होने का मतलब अभिशाप था दादी कहीं बाहर नहीं निकलती और छायली कपड़े पहनकर रहती। दादी काम में बहुत चतुर रसोई बनाने से लेकर कशीदा काश्तकारी सभी में परफेक्ट थी घर में शादी विवाह या पड़ोस में शादी ब्याह होता तो सब का कार्य करके घर बैठे मुफ्त में कर देती। किसी के आगे अपने स्वाभिमान को नहीं गिराया अनपढ़ थी फिर भी सब कुछ कार्य करने में उत्साहित रही और कार्य करते-करते अपनी जिंदगी को व्यस्त रखना चाहती थी। दादी का एक बेटा और एक बेटी थी बेटी की शादी करके ससुराल भेज दिया और बेटे के भी छोटी उम्र में शादी कर दी। ताकि दादी का अकेलापन कम हो जाए। दादी ...

परिवार विघटन

_आधुनिक एकल परिवार विघटन   आज हमारे सामने एक ऐसे समाज की तस्वीर सामने आती है  जहां  परिवार  और  घर जैसे शब्द विलुप्त होते जा रहें हैं ।आज की पीढ़ी में  आत्मनिर्भर बनने के साथ -साथ ,माता-पिता, भाई -बहन ,पति- पत्नी ,सभी निजी संबंधों  में  निजता की कमी  देखने को मिलती है ।आज  के समय में  अस्तित्ववाद अहम भूमिका निभा रहा है  लेकिन  अनेक विसंगतिया भी दिखाई दे रही है जैसे आजकल गाव् लड़की भी नौकरी पर जाने लगी है  जिससे पति पत्नियों के बीच  अहं की भावना के कारण दाम्पत्य जीवन  में   भी अनेक कठिनाई हो गयी है। इस   वैश्विकरण का प्रभाव सबसे ज्यादा ग्रामीण समाज पर अधिक दिखाई दे रहा है ।ग्रामीण लड़की और लडके  एक  शहरी जीवन जीते  है  जिससे उसका  परिवार और  समाज के साथ तालमेल स्थापित नही हो पाता जिससे समाज उसे   गलत तरीके से देखने लगता है  ना तो वह  शहरी बन पाता  है और ना ही  ग्रामीण । आगे बढ़ने की होड़ में  वह कुंठा से भर जाता है। जिससे पर...

Jeewan

जीवन जीवन है अनमोल रे वंदे जीवन है अनमोल। जीवन है अनमोल रे वंदे जीवन है अनमोल।। रहो हमेशा खुश रे वंदे,जीवन है अनमोल। उठो सबेरे सैर करो तुम, रोग न तुमको चाहेगा । नित्य- नियम पानी पी लेना कब्ज दूर हो जाएगा ।। हाथ धो कर भोजन करना स्वस्थ रहोगे हरदम तुम। अटर-पटर मुंह में कुछ न लेना बीमार तुरंत पड़ जाओगे।। जीवन है अनमोल रे वंदे जीवन है अनमोल। समय के साथ आगे बढ़ना, मंजिल न दूर होगा । आलस बुरी बलाई रे वंदे,हरदम याद रखना।। गिरो,उठो,संभालो,खुद को, कोई क्या कर लेगा। अगर बुलंद है जोश अपना, बाधा कुछ न कर पाएगा।। जीवन है अनमोल रे वंदे जीवन है अनमोल। रहो हमेशा सावधान प्यारे,नेकी राह अपनाना। माता- पिता-गुरुजनों से दूरी कभी न करना।। वैर कि भावना कमजोर ही करता,सत्य कि राह पर रहना। धीरज बनाए सदा तू रखना चाहत कमजोर न करना।। जीवन है अनमोल रे वंदे जीवन है अनमोल। मिलेगी सफलता, मिलेगी शोहरत, कृति होगी चारों ओर। गूंज उठेगा कोयल संग भवरे, नाचे गली- गली में मोर।। नन्द बिहारी कहता सबको दुनियां एक परिवार है। जीवन है अनमोल रे वंदे जीवन है अनमोल।। रहो हमेशा खुश रे वंदे जीवन है अनमोल। जीवन है अनमोल रे वंदे जी...