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Gauraiya ki Pukaar

 गौरेया की पुकार



तपती दुपहरी और तेज धूप,
छोटा सा आसियान मेरा भी है।
आप के आराम के वक्त,
मैं भी आई थी।
तपती दुपहरी में सो रहे थे आप, 
मैं मुंडेर से पुकार कर लौट आई।
'कूलर' की कर्कस आवाज ने, 
मेरी करूण पुकार को दबा दिया।।

- राधेश्याम जोशी कोहिणा

Poet

 राधेश्याम जोशी कोहिणा

EDUCATION :
ADDRESS :
Awdhesh Joshi







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Ummeede

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