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Haan Tum

 _  हाँ तुम !



  मैंने चाहा है तुमको

 मेरी चाहतों में तुम I

   गुजरे कल में तुम

 उगते सूरज में तुम I

   बहती हवाओं में तुम 

बरसते बादलों में तुम I

   खिलते फूलों में तुम 

ढलती शामों में तुम I

हाँ तुम !


मन की सुंदरता 

तन का सुंदर रूप I

लब तेरे मधुशाला 

हर अंग पुष्प की माला I

स्वप्न की परी  तुम

 हो यौवन रस का अमृत  प्याला I

हाँ तुम !


तुम जीवन ज्योति

 तुम करुणा तुम भक्ति

  तुम ही मेरा बंधन I

मेरा इश्क तुम  

मेरी जान तुम

 मेरा हर लम्हा तुमसे

 तुम ही मेरा दर्पण I

हाँ तुम !


बेचैन दिल तन्हा मन 

तस्वीर तेरी चूमते नयन I

मिलकर तुमसे  लिपटूंँ मैं ऐसे 

जैसे चंदन से लिपटे भुजंग I

मेरा ख्वाब मेरी हकीकत

 मेरी चाहत मेरा जूनू 

हाँ तुम !

               

  -बाल कृष्ण मिश्रा



टिप्पणियाँ

  1. बेनामी10:50 am

    यह बाल कृष्ण मिश्रा द्वारा लिखी गई एक खूबसूरत हिंदी कविता है, जिसका शीर्षक 'हां तुम !' है, और यह किसी प्रिय व्यक्ति के प्रति गहन प्रेम, चाहत और हर पल में उसकी मौजूदगी को दर्शाती है, जिसमें कवि अपने प्रिय को हर जगह देखता है—अतीत, सूरज, हवा, बादल, फूल और शाम में—और उसे जीवन का प्रकाश, करुणा और भक्ति का रूप मानता है। इसमें कवि ने अपने प्रिय को अपने जीवन, ख्वाबों और जुनून का केंद्र बताया है।

    कविता का सार (मुख्य बिंदु):
    प्रिय की सर्वव्यापकता: कवि प्रिय को गुजरे कल, उगते सूरज, बहती हवा, बरसते बादलों, खिलते फूलों और ढलती शामों में देखता है।
    प्रिय का रूप: प्रिय मन की सुंदरता, तन का सुंदर रूप, मधुशाला जैसे होंठ और फूलों की माला जैसा अंग है।
    प्रिय का महत्व: वह जीवन ज्योति, करुणा, भक्ति, बंधन, इश्क, जान और हर लम्हा है, जो कवि का दर्पण है।
    गहराई और जुनून: कवि बेचैन दिल के साथ प्रिय की तस्वीर को चूमना चाहता है और चंदन से लिपटे भुजंग की तरह उससे लिपट जाना चाहता है, क्योंकि प्रिय उसका ख्वाब, हकीकत और जुनून है।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बेनामी10:53 am

      🙏🙏🙏

      हटाएं
    2. बेनामी11:47 am

      हर पंक्ति में भावनाओं की गहराई है… बहुत सुंदर रचना 👏

      हटाएं

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