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संदेश

अतः, सच भी, अर्ध सत्य बोलता है

  अतः, सच भी, अर्ध सत्य बोलता है  ~~~~~~~~~~~~~~~~~ मंच मौन है,अतः, रच-रच के, नेपथ्य बोलता है, सत्य गौण,अतः, सज-धज के, सौजन्य बोलता है । मजमा लगा हुआ है, हर जगह, मन्तव्य बोलता है, चश्मा चढ़ा हुआ है,अतः,सच भी,अर्ध सत्य बोलता है । 1.हर कोई दे रहा है, सिर्फ, संविधान की दुहाई, हर कोई लड़ रहा है, सिर्फ, अधिकार की लड़ाई । कर्तव्य गौण, बस खुल के, अकर्मण्य बोलता है, चश्मा चढ़ा हुआ है,अतः,सच भी,अर्ध सत्य बोलता है । 2.व्यक्तित्व, खुद के भय से, व्यक्तव्य बोलता है, अस्तित्व खुद से डर के, बस, वर्चस्व बोलता है । हुकूमत के दर पे भी, बस, हास्य-व्यंग्य बोलता है, चश्मा चढ़ा हुआ है,अतः,सच भी,अर्ध सत्य बोलता है । 3.आजाद हर डगर है, कहीं कोई, बाध्य नही है, विवाद हर जगह है, कहीं कोई, साध्य नहीं है । सबके साथ, सबके अंदर, बस, चाणक्य बोलता है, चश्मा चढ़ा हुआ है,अतः,सच भी,अर्ध सत्य बोलता है । 4.आधा भरा है, शायद आधा, खाली गिलास है, अधकचरा है, शायद ज्यादा, बाकी लिबास है । अधिनायक भी, अब सिर्फ, सच के सिवाय बोलता है, चश्मा चढ़ा हुआ है,अतः,सच भी,अर्ध सत्य बोलता है । 5.अर्थव्यवस्था का कोई, अब, औचित्य नही है, किसी भी...

मेरा यार समनज़ार

 मेरा यार समनज़ार       ---------------------------                        >> रामावतार दाधीच  संदल की वादी सा , तेरा चेहरा लगता है ।   नैनों में उतर जाऊँ, समंदर गहरा लगता है ।।  रहते हो , तुम दिल में   अहसास करा दूँ, पल में  दिल मजरुह सा डोल रहा तन्हा  मौहब्बत की महफ़िल में   तेरी काली जुल्फों में , नूतन सवेरा लगता है ।। नैनों में उतर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,  अंजन तेरी आँखों में , यादों की सलाखों में ,  कातिल अदा है, सब तुम पे फिदा   हो तुम एक ही लाखों में ।  तेरे कजरारे नैनों में , मुकद्दर मेरा लगता है ।। नैनों में उतर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,  तेरे लबों की गुलाबी सुरेखा  दिल को हमने लुटते देखा  घनघोर घटा सी छाई दिल पे हमारे , तेरे काजल की पतली रेखा ।  हया भरी है आँखों में तेरा रंग सुनहरा लगता है ।  नैनों में उतर ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, संदल की वादी सा तेरा चेहरा लगता ह...

वापस, लो रे सरकार

  कृषि बिल को फौरन,वापस, लो रे सरकार ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ वापस लो, वापस लो, वापस लो रे सरकार, कृषि बिल को फौरन,वापस, लो रे सरकार । ये बिल हमें हरगिज, नहीं,नही,नहीं है स्वीकार, वापस लो, इस बिल पर, पुनः करो रे विचार, कृषि बिल को फौरन, वापस, लो रे सरकार । 1.जाने कैसे, क्यों, कहाँ, किसका, दिमाग है फिरा, किया न गया किसी से, कोई, सलाह मशविरा । निभा रहा है, न जाने कौन, किसका किरदार, कृषि बिल को फौरन, वापस, लो रे सरकार । 2.राजनीति से हमारा, कोई, काम नही है, किसी की कुर्सी भी, हमारा, मुकाम नही है । हम मांग रहे हैँ, सिर्फ, हमारा कृषि अधिकार, कृषि बिल को फौरन वापस, लो रे सरकार । 3.हमसे खान-पान है, हमी से जिंदगी में जान है, फिर भी,कभी अभिमान ना किया, हम वो किसान हैं । देखो, हर हाल में हम, सबके लिए, रहते हैँ तैयार, कृषि बिल को फौरन,वापस, लो रे सरकार । 4.भूखे रह के भी, हमने,हमेशा,सबका पेट भरा है, बाढ़, सूखे में भी न हमारा,कभी भी, रेट बढ़ा है । हमसे ही संतुलित है, भारत देश का बाज़ार, कृषि बिल को फौरन, वापस, लो रे सरकार । 5.हम किसान हैँ, धरती से हम, अनाज हैं उगाते, एहसान मान, हमसे ही, तुम, राज-काज ह...

ज़िंदगी

  फ़लसफ़ा ज़िंदगी का ना कोई समझ पाया पर ये वो तराना है जो हर किसी ने गाया। दुख की परछाइयां है सुख के उजालों में हर कोई जाना चाहे बचपन के ज़माने में रेस के घोड़े हैं बाजिया लगाते है छोटी छोटी खुशियों पर शर्तें लगाते हैं गैस के गुब्बारे से उड़ते वो जाते हैं कब हवा निकल जाए भूल सब जाते हैं खाली हाथ आकर भी जेबों को वो भरते हैं। खाली हाथ जाना है शोहरत को तरसते हैं नेकी की कमाई का संदेश सब देते हैं खुद पर आए जो  मुंह फेर लेते हैं पिंजरे का जो तोता है इक दिन उड़ जाएगा।  दुनियां से हस्ती क्या नाम तलक मिट जाएगा Written by Anita Maishra Hariana, Hoshiyarpur Punjab Posted by Om Tripathi

🌹 दर्द-ऐ-तन्हाई 🌹

उस से क्यूँ रहा नही गया मुझ से #दर्द सहा नही गया  दुर तक यह #तन्हाईयोँ का सिलसिला दिया दायरे इनकार के,,, इकरार की सरगोशियाँ दिल से भूला देने का मुझे ना कोई #गिला दिया दर्द-ऐ-तन्हाई की सारी तहे और हादसे गुजार दिये सब हो गये धुँआ एक एक वाकिया #विसार दिये #लज्जत-ऐ-वस्ल से भी बढ कर है मजा इक सफीना सा है तेरी तन्हाई की सजा दिल में छिपे हसरतों के #मयखाने सजते रहे हिचँकिया रात भर #दर्द-ऐ-तन्हाई बजते रहे  उस से क्यूँ रहा नही गया  मुझ से #दर्द सहा नहीं गया  Written by डाँ मोहन लाल अरोड़ा  ऐलनाबाद सिरसा 26-10-2020 9896853750 Posted by Om Tripathi

क्षण भंगुर है जीवन अपना

  क्षण भंगुर है जीवन अपना मिट्टी की है देह मानव तू फिर भी इतराता कैसा तेरा है ये नेह साथ न अपने जाना है कुछ साथ न अपने जाएगा फिर भी तेरे अंदर का मिटे न ये कलेश समय का पहिया घूमे है जग में बैरी है ये खेल तेरा मेरा करते करते बिगड़ जाएगा तेरा खेल प्रीत लगा तू उससे अपनी जो लाया तुझे इस देश कर ना प्रेम सभी से तू मिटेगा फिर तेरे अंदर का अंधेरा , मिट जाएगा कलेश हां प्यारे मिट जाएगा कलेश कंचन सी काया, माया मिट जाएगी माटी में मिट जाएगा ये फिर भेष जग में रह ले प्यार से धुल जाएं फिर ये कलेश स्व त... Written by kanchan Varshney Posted by Om Tripathi

भाई

  कैसा भी हो एक भाई होना चाहिये………. बड़ा हो तो रक्षा करे जो बहन की छोटा हो तो हमारे पीठ पीछे भी खयाल रखे……….!! बड़ा हो तो चुपचाप हमारे दिल की सुने छोटा हो तो मन की सुने………!! छोटा हो या बड़ा मन में मैल न रखे जो एक भाई होना चाहिये…….!! बड़ा हो तो, गलती पे हमारे कान खींचे छोटा हो तो अपनी गलती पर, सॉरी दीदी कहने वाला… खुद से ज्यादा हमे प्यार करने वाला एक भाई होना चाहिये..!!  और भाई होकर बहन को जो न समझे ऐसा भाई भी नहीं होना चाहिए......!! भाई दूज की शुभ कामनाएं!!  Written by स्व रचित ......( कंचन वार्ष्णेय) Posted by ओम त्रिपाठी

💐 #मौत 💐

#मौत आनी है  मगर ना जाने कब और किस पल और किस रूप मे #अनिश्चितता के साये में  यह #जिंदगी से बेहतर  #मौत ही लिखती है  जीत और हार की दास्ताँ कभी उस और जाते कदम कभी #लौट कर आते कदम #खुदकशी की हिम्मत  हस्पताल की #बिमारी या फिर #बुढापे की लाचारी  शायद इन रूपो से  सजेगी #चिता हमारी हिम्मत कहुँ या #कायरता  नही भय हमे #मौत से  बहुत बार गई है #लौट के  #चौखट हुई ना पार #मौत गई हार इस #मौत के जादू से  ना कोई #बचा हैं  ना ही #शायद कोई बचेगा #जिंदगी की इस जंग में  क्यूँ कर कोई #जंचेगा राते भी होने लगी #सर्द  चेहरा पड़ने लगा #जर्द #डाक्टर भी ना समझे डुबती #नब्ज का दर्द  शायद,,,आ गई है #मौत Written by डाँ मोहन लाल अरोड़ा  ऐलनाबाद सिरसा Posted by ओम त्रिपाठी

💐 अर्थी 💐

सजने लगी अर्थी हमारी कितने कंधो पर पड़ेगी भारी रोने लगी पत्नी हमारी थी बेचारी किस्मत की मारी समझाने लगी जनता सारी चलने लगी जब अर्थी हमारी कंधा दे बेटा साथ में बेटी बेचारी पोते ने किया नमन मारी किलकारी  बहु बेटे को भी लगी चित्कारी समझाने लगी जनता सारी  आगे बढी जब अर्थी हमारी  रिति रिवाजो की थी भरमारी  निभने लगी रिस्ते और नातेदारी  यह सब है दुनिया दारी समझाने लगी जनता सारी  पहुँची जब शिव धाम में अर्थी हमारी  होने लगी दाह संस्कार की तैयारी  किसी ने शाल किसी ने चद्दर वारी यह थी हमारी आखिरी सवारी समझाने लगी जनता सारी  चिता पर सजी जब अर्थी हमारी  दे मुख अग्नि रित निभाई सारी हम से हमारी जिंदगी हारी आज हमारी कल आपकी बारी समझाने लगी जनता सारी  सजने लगी जब अर्थी हमारी  समझाने लगी जनता सारी  Written by डाँ मोहन लाल अरोड़ा  ऐलनाबाद सिरसा Posted by ओम त्रिपाठी

स्त्री

  आओ मिलकर आज करें हम, स्त्री प्रसंग विमर्श। मनुज प्रकृति प्राणीमात्र का,जिस बिन ना उत्कर्ष।।     पौरुष केवल बीज मात्र है, स्त्री अखिल है सृष्टि।     जन्मदात्री पोषणकर्ता, है संपूर्ण ब्रह्मांड समष्टि।। पुरुष यदि पदार्थ मुख्य है, स्त्री है उत्कृष्ट ऊर्जा। कोख में धारण करें तभी तो, बनता पुर्जा पुर्जा।।        स्वदुग्ध और लहू से करती,वह संतान का पालन।        निर्बल नहीं निर्मात्री है स्त्री, योग्य सदा आराधन।। मातु भगिनी दार रुप में, सदा पुरुष का सहयोगी। कलुषित दृष्टि डाल रहे जो, वो नितांत मनोरोगी।। Rajendra Sharma "राज" 09.11.2020 आओ मिलकर आज करें हम, स्त्री प्रसंग विमर्श। मनुज प्रकृति प्राणीमात्र का,जिस बिन ना उत्कर्ष।।     पौरुष केवल बीज मात्र है, स्त्री अखिल है सृष्टि।     जन्मदात्री पोषणकर्ता, है संपूर्ण ब्रह्मांड समष्टि।। पुरुष यदि पदार्थ मुख्य है, स्त्री है उत्कृष्ट ऊर्जा। कोख में धारण करें तभी तो, बनता पुर्जा पुर्जा।।        स्वदुग्ध और लहू से करती,वह संतान का पालन।    ...

जिंदगी की जंग

  जिंदगी की जंग में कभी हारे कभी जीते...... ए जिन्दगी फिर भी तेरे साथ रहे हैं हम...... जीने की जिजीविषा से जूझते रहे  हालातों से कभी टूटे नहीं हम ए जिन्दगी फिर भी तेरे साथ रहे हैं हम........ अनेकों झंझावात से लड़ते रहे हरदम ए जिन्दगी फिर भी तेरे साथ रहे हैं हम...... मौत आई थी मगर पुकार कर चली गई जिंदगानी में मगर जिंदगी देकर गई, सामना करते रहे झुके नहीं कभी हम ए जिन्दगी फिर भी तेरे साथ रहे हैं हम....... गम नहीं अब हमें कोई कौन साथ रहे , कौन छूटे हम तो मौत के भी पास आकर जीते रहे हैं हम ए जिन्दगी फिर भी तेरे साथ रहे हैं हम........ Written by  kanchan Varshney B-30/A, Yamuna vihar Ph no.8802631009 Posted by Om Tripathi

🌹 दर्द-ऐ-तन्हाई 🌹

उस से क्यूँ रहा नही गया मुझ से #दर्द सहा नही गया  दुर तक यह #तन्हाईयोँ का सिलसिला दिया दायरे इनकार के,,, इकरार की सरगोशियाँ दिल से भूला देने का मुझे ना कोई #गिला दिया दर्द-ऐ-तन्हाई की सारी तहे और हादसे गुजार दिये सब हो गये धुँआ एक एक वाकिया #विसार दिये #लज्जत-ऐ-वस्ल से भी बढ कर है मजा इक सफीना सा है तेरी तन्हाई की सजा दिल में छिपे हसरतों के #मयखाने सजते रहे हिचँकिया रात भर #दर्द-ऐ-तन्हाई बजते रहे  उस से क्यूँ रहा नही गया  मुझ से #दर्द सहा नहीं गया  Written by डाँ मोहन लाल अरोड़ा  ऐलनाबाद सिरसा 26-10-2020 9896853750 Posted by Shourya Paroha

शायरी

मैंने खाली गागर को भी छलकते हुए देखा है....  इश्क़ वो रिश्ता है....  जिसे मैंने दिलो से निकल कर भी रंगों मै ढलते हुए.. देखा है.... काफी अच्छी वाकफियत हैं....  उसके खयालो से मेरी...  फिर भी ना जाने क्यो इतना गैर समझता है...  वो मुझे...  और कौन है दूसरा...  जो उन्हें छोड़ दू उसके दर पे...  मै एकलौता हु अपनी मॉ का...  कोई पूछे तो मेरे मन से.  तू है मेरे दम से.  मगर मेरी मॉ नहीं मेरे तन से.  हक़ीक़त तो ये है.  की मै हु अपनी मॉ तन से... निगाहो ने ना तसदिक की जिसकी...  दिल उसका एहतराम कर बैठा है...  मुसलसल आंसुओं से ना हरी हो सकी जो ज़मीन..  दिल उस बंजर ज़मीन से प्यार कर बैठा है.. सौंप दो अपनी तकलीफे मुझे...  मे ना इन्हे बर्बाद करूंगा....  मे तो शायर हु साहब...  हसकर ही इनसे बात करूंगा... काश हमें भी किसी ने ठोकर मार दी होती..  दिल टूटता..  तभी तो कमाई होती...  क़ैद ए हुनर मालूम था. उसे  वो पैसे ए सय्यद था.  वफ़ा करता भी तो कैसे करता.  हाथों मे उसके जाल था.     ...

माँ

  हर एक कपडे का तुकडा माँ का आँचल हो नही सकता  माँ की जो ममता है वो कही खो नही सकता । जो मेरे जिस्म से आती हे खूशबू वो माँ कि है मेरी  चाहे कोई भी कीतना वो दूर हो नही सकता ।        ये जो दिल मे है मेरे वो आज बया करती हु         माँ से प्यार करती हु माँ पे ही मै मरती हु  उठे हाथ कभी मेरा ईबादत के वास्ते मांगु तुझसे वर मे इतना जो मेरे रब दे  ना हो कोई सुबह ना कोई भी शाम हो  जीसपे लीखा ना मेरे माँ का नाम हो । Written by Pratima Suresh Mahto mahtopratima9054r@gmail.com Posted by Om TRIPATHI

वो पहाड़ों की हरियाली

   वो पहाड़ों की हरियाली  वो खेतों की हरियाली,  अब देखने को नहीं मिलती।। कभी आबाद हुआ करते थे गांव वहां,  मगर अब उन गांवों की आबादी देखने को नहीं मिलती।  वो लोगों का साथ- साथ उठना- बैठना,  साथ में कभी-कभी लड़ना- झगड़ना।  मगर कुछ दिनों बाद फिर एक हो जाना न जाने कहां खो गया है,  वो लोगों की हंसी अब देखने को नहीं मिलती।।  बच्चों का स्कूल जाना और घर आने के बाद उछलना कूदना,  बातों बातों पर हंसना वो रोना आज एक सपना सा लगता है।  क्योंकि सब चले गए पहाड़ को छोड़कर  जहां पे कभी लोगों में प्यार वो अपनापन दिखाई देता था।  वो प्यार वो अपनापन अब लोगों में देखने को नहीं मिलता।। Written by Deepanshu Pandey Palyoun, Almora Uttrakhand Posted by Om Tripathi  

फूल सी बेटी

 फूल सी बेटी को मां बाप  सौंप देते अनजाने हाथ में  अपना मान कर चल देती है  बेटी भी जिनके साथ में  अपना तन-मन-धन लगाकर    घर वालों को अपना बनाती अपना कहकर बेगाना मानते  फिर भी वह पराई कहलाती  मां बाप ने कोई बात ना सिखाई  बेअकल है उठ कर आई  चली जा तू अपने घर को  मैंने तो आफत है लाई  सौ सौ ताने सुनकर भी वह  पति को अपना देवता माने  हद तो तब होती है जब वह  उसके दुख को ना पहचाने  पति-पत्नी तो गाड़ी के ही   दो पहिए हैं माने जाते   पति पत्नी को नीचे दिखाएं तो    पत्नी किसको दुख बतलाए  अंदर अंदर घुटती रहे वो   अपना दुख ना किसी को बताए    पति ही गर ना समझ पाए तो    जीवन साथी क्यों कहलाए Written by - Anita Mishra Haryana, Hoshiyarpur Punjab Posted by - Om Tripathi

वक़्त

  वक़्त भी क्या चीज़ है जो सबकी औकात दिखा जाता है किसी को अपना तो किसी को बेगाना बना जाता है वक़्त के साथ बदल जाते हैं चेहरे हर चेहरा नया सबक सिखा जाता है जिसे मानते है हम अपना वही अपना रंग दिखा जाता है  वक़्त के फेर जब भी चलते है  अपने पराए की पहचान करा जाते है कुछ अपनों के मुखौटे उतर जाते है और कभी पराए भी फ़रिश्ते बन जाते हैं Written by - Anita Mishra      Haryana  Hosiyaarpur Punjab Posted by - Om Tripathi

भारत की बिटीया

   मैं भारत की बेटी हूं,  जो अपने दम पर जीती है  अपने नए कारनामों से सब को गौरवान्वित करती है चाहे हो वो खेल कूद यां हो जंग का कोई मैदान नहीं डरती है किसी से भी हमेशा जीत का करती ऐलान झांसी की रानी वीरांगना जिसने अंग्रेजो को था खदेड़ दिया इंदिरा , प्रतिभा ने राज़ संभाल कर देश को था हैरान किया जो कहते थे लड़की है ये नहीं कुछ कर सकती है चूल्हा चौंका करना है बस क्यूं स्कूल में पढ़ती है आज करते झुक कर सलाम गुजरती हूं जिधर से भी सब की बेटियां हो ऐसी ही कहते हैं आपस में वही चूल्हा चौंका हो या हो फिर ऑफिस का कोई भी काम कोई फील्ड हो चाहे देश हो लेती हूं सब संभाल कमान  पूरे संसार में सबसे आगे हम भारत की बेटियां तभी तो हम सब देते नारा पढ़ें -बढ़ें भारत की बेटियां।  Written by Anita Mishra Haryana, Hoshiyarpur Punjab Posted by Om Tripathi

नारी

 पूजते हो कभी मुझे तुम, देवी मां के रूप में। कभी मांगते आशीष मुझसे, अपनी मां के रूप में। बहुत प्यारी लगती हूं, जब भैय्या भैय्या बुलाती हूं। फूले नहीं समाते हो तब, जब पत्नी रूप में आती हूं। अपने सारे रिश्तों को तुम, बहुत प्यार से निभाते हो। फिर दूसरों की बेटियों पर, बूरी नज़र क्यूं जमाते हो? देखकर दूसरों की बेटी, हो जाता है तुमको क्या? जाग जाता शैतान तुम्हारा, मर जाती इंसानियत भी क्या? औरत है तो क्या उसे, जीने का कोई हक ही नहीं? वो भी इंसान है, दिल बहलाने की वस्तु तो नहीं। जानवर से भी बत्तर जब, तुम उसको नोचते हो। इंसानियत भी चीख उठे, ऐसी हैवानियत करते हो। उसकी तड़प और चिखो से, क्या रूह तुम्हारी कांपती नहीं? उस बिटिया के रूप में तुम्हे, अपनी मां बेटी नज़र आती ही नहीं? राक्षस भी हो जाए शर्मिंदा, खुदा की तो बात ही क्या। इंसानियत के नाम पर हो धब्बा, तुम जैसों की जात ही क्या। Written by Anita Mishra Hariana,      hosiyarpur,  Punjab Posted by Om Tripathi

छलक गये

छलक गये, हैं आंसू ये।                   याद तुम्हारी, आखों में॥  ढूंढ रहा हूँ, हर पल में।                    मैं अपनी ,ही यादों में॥  कहाँ खो गए हो , यादों में,                    अभी मिलना   भी तो बाकी है॥  सर पर हाथ जरा रख दो,                  मजिंल मिलाना बाकी है॥  धुंधला हूँ साफ बना जाओ,                  टु कडा हूँ काग बना जाओ॥  खोए हुए हो याद में,                बस हाथ ही सर पर फिरा जाओ॥  Written by -Shourya Paroha Posted by -Om Tripathi

कोरोना वायरस, मजदूर और सरकार

बाजीकरण के दौर में, कोरोना फैल चुका है,  संक्रमण के चलते देश, व्यापार आदि सब बंद हो चुका है।  ये दौर बहुत मुश्किल है सच में मजदूरों के लिए,  वो पहले भी मरते थे या मारे जाते थे पूंजीपतियों द्वारा फैक्ट्रीयों में, कारखानों में मीलों में और अब भी वो मारे जा रहे हैं भूख द्वारा सडकों पर पैदल चलने से  मालगाड़ीयों से कटने से  और रेलगाड़ी के भटकने से लेकिन दलील यह होगी  मध्यमवर्ग की कि सडको ंं पर  निकलना नहीं चाहिए था उन्हें या पटरी पर सोना नहीं चाहिए था उन्हें मगर मुआफ़ कीजिये यह पूंजीपतियों की ही भाषा है ये हुक्म्रानों  और सत्ताधारीयों की ही जुबान है ,  जो मजदूरों का खून पीकर भी उन्हें ही दोषी मानती है तो इस दलील पर यह सवाल है की मजदूर को रोटी कहाँ से मिलेगी उन्हें आराम की नींद भूखे पेट कैसे मिलेगी?  जब लाॅकडाउन के नाम पर बिना व्यवस्था के सब कुछ बंद कर दिया कोरोना वायरस महामारी ही एक समस्या नहीं है समस्या भूख , सरकार की लापरवाही और अव्यावश्था भी है चाहे मर जाए कोई ट्रेन से कटकरक, हाईवे पर गाड़ीयों से कुचलकर ,  या भूख से बिलखकर सरक...

हमारा प्यारा भारत

   जिससे मिलती सबको आहत,  जीससे मिलती हर चीज़ को राहत।  सबको है, बस एक ही चाहत,  वह है हमारा प्यारा भारत॥                      फूलों की एक बाग सी,                     चिड़ियों की चहचाहट सी।                     वह है हमारा प्यारा भारत,                     जहाँ मिलती है सबको पनाह सी॥  जहाँ चलती है ,हवा सुहानी ,  जो सबके मन को लुभानी।  हर दुश्मन चाहते भारत पे शासन करना,  पर चलती है न यहाँ किसी की मनमानी॥                    दुश्मनों की क्या मजाल,                   जो बुने भारत से दुश्मनी का जाल।                   अगर कोई भारत से औकात पूछले ,            ...

रंग रूप में भेद भाव

   🌿🌿जाहा आस लगाई वही पर निराशा मिली 🌿🌿 🍃🍃जितनी रोशनी कि और गई इतना ही अंधेरा मिला 🌿🌿 😞😞डर लगता है इस अंधरे मे खो ना जाऊ किस्मत को कया मजुर है पता नही लेकिन कही इस समाज के काला गोरा सुदंर बदसूरत भेदभाव के ताने मे कही खुद को खो ना दु🍃🍃 🌿🌿कयोकि ज्यादा यहा सकल सुरत देखी जाती है किसी का सचा दिल नही 🌿🌿 🍃🍃 अब खोना कया पाना कया अब तो सारी उम्र रोना है 🌿🌿 🍃🍃रोना भी एसा आॅसु बाहार ना आए अगर छलक पडे आसु पोछने बाला कोई नही मजाक उठाने बाले हजारो होगे 🌿🌿 🍃🍃इसि भेदभाव को सहते हुए जमाने को यह बतलाना है सकल सुरत से ज्यादा इंसान का गुण और सच्चा दिल देखो 🌿🌿 🍃🍃 या मतलब भरी दुनिया चहरो पर ज्यादा मरती है गुणों पर नही 🌿🌿🌿 Written by          -  Ritu kavar        Anoopshehar, Bhadra,Hanumangar (Rajasthan)  Posted by - Om Tripathi

प्यार कब हो जाए

   प्यार कब हो जाए, कुछ पता नहीं,  प्यार किससे हो जाए, कुछ पता नहीं।  प्यार किस उम्र में हो जाए, पता नहीं,  प्यार में क्या पाएगा कुछ, पता नहीं॥                  प्यार में क्या खोएगा, कुछ पता नहीं,                प्यार में कब तक रहेगा, कुछ पता नहीं।                प्यार किस हद तक जाएगा, पता नहीं,                प्यार में साथ कौन निभाएगा, पता नहीं॥  प्यार में ऋषि कब तक रोए, कुछ पता नहीं,  प्यार उसका कभी वापस नहीं पाएगा, उसे पता नहीं।  क्यों दिल लगाया है, ऋषि एसी लड़की से,  क्या उसके बारे में तुम्हें, कुछ पता नहीं॥                शेयर कर दो यह संदेश हमारा,               ऋषि अब भी रो रहा है, क्या लड़की को पता नहीं।              जीवन भर रोना लिखा है, ऋषि किस्मत में,  ...

आया कोरोना आया कोरोना

  उमड़ धुमड़कर पूरे विश्व में, यह देखो - खूब कहकर बरसाया कोरोना  आया कोरोना- आया कोरोना ||                                                                             देखो देखो सभी गाँव  शहर वाहन इत्यादी हुए बंद,                 इसी से होगा कोरोना का कहर कम;                कितनो देशोमै हड़कंप मचाया कोरोना॥                 आया कोरोना आया कोरोना॥    आज किस गाँव शहर शहर में आया,  किस घर को अपना  शिकार बनाया कोरोना,  बहुतों को सताया कोरोना।  आया कोरोना आया कोरोना॥               देश-विदेश सब गाँव शहर भी,               नगर मुहल्ला बाजार शहर भी;  ...

रक्षाबंधन का महत्व

  बंधन-बंधन प्यार का बंधन।  सबसे न्यारा है, ये रक्षाबंधन॥  बहना जो भाई के कलाई पर राखी बांधी जाए।  भाई जन्मों- जन्मों तक बहन की रक्षा का पात्र निभाता जाए॥ राखी एक ऐसा बंधन कहलाए जो भाई बहन के प्यार एक सूत्र में बाधीं जाए॥  श्रावण माह का ये प्यारा त्योहार।  जो दिखाए भाई-बहनों का अटूट सा प्यार॥  जो भाई अपनी बहनों से अटूट प्यार है करते।  वे ही बहनों की खुशीयों के खातिर दुनिया से है लड़ते॥  यह पर्व भाई-बहन के लिए खास रहे जब किसी मुश्किल घड़ी में बहना आए।  भाई को है रक्षा करना यह पर्व याद दिलाए॥  धर्म गृहों के अनुसार सबसे पहले माँ लक्ष्मी ने राजा बली को बाधीं राखी।  तब से लोग हुए इस पर्व के आदआदि॥  इतिहास में सिकंदर की पत्नी रोकजाना ने पोरस को बाधीं राना सांगा की पत्नी कर्णावती ने हुमायूं को बाँधी राखी ये है हिंदू मुस्लिम के प्यार के साक्षी॥  रक्षाबंधन का लक्ष्य है अभी अधूरा जब भारतीय लोग जात-पात छोड़ कर बनेगें एक दूसरे का सहारा तभी होगा रक्षाबंधन का न पूरा।  हम सब भारतीय भाइयों को रक्षाबंधन में प्रतिज्ञा है करना की भ...

मेरा प्यार

  दुनिया भी बेकार है,  भगवान भी बेकार है। तरस खाता नहीं मेरे ऊपर,  कैसे का भगवान है।            नहीं चाहिए खुदा तुमसे कुछ भी,            स्वर्ग जन्नत अनंत जीवन भी।            देना है तो बस यही दे जाओ,            हर दुख दूर हो, शाम को आए नींद भी।  क्या दिल लगाने की सजा यही है,  जो रो रहा हूँ क्या प्यार यही है।  मान रहा हूँ हर गलती अपनी,  हमें माफ़ करना क्या खता नहीं है।            मैं अंधा था, अज्ञानी था          हममें चंचलता और जवानी थी।           प्यार में उसके रोता मैं,         क्या देखा नहीं प्रभु अंधा था।  प्रभु बिन दुनिया में कुछ हो सकता नहीं,  फिर मेरे आँखों में आँसू आया क्यूँ।  आँसू आए क्या मर्जी तेरी,  तेरी मर्जी है तो मेरा प्रभु क्यूँ।          तुम मर गए प्यार के कारण,...