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संदेश

Shramik

  _श्रमिक श्रमिक मैं श्रमिक परिश्रम से मेरी पहचान मै ना देखूं दिन मैं ना देखूं रात मेहनत ही मेरा विहार दो टूक पाने की प्रतिक्षा धन कमाने की इक्षा मै नही चाहता करोड़पति बनू जो हैं बस संतुष्ट रहूं बीबी बच्चों का भर्तार हूं समाज का आधार हूं यहीं हैं मेरा जीवन निर्वाह इसी से चलता मेरा परिवार मेरी जिन्दगी में बहुत कठिनाई है फिर भी यारों मेहनत की कमाई हैं Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi EDUCATION : ADDRESS :

Jhukna nhi aata

  _झुकना नहीं आता मुझे हर किसी  के आगे झुकना नहीं आता  चली हूं जबसे सफर पर रुकना नहीं आता जिसने सारी उम्र सिर्फ कहना ही सीखा है  उन्हें अक्सर किसी  को सुनना नही आता ख़ामोश रहना मुझे अब अच्छा लगता है सब कहते है की मुझे हंसना नहीं आता बचपन से जवानी तक वो रखते है जिन्हे उन बच्चो को बूढ़े मां बाप रखना नहीं आता जिससे रूठ जाए उसके अपने सभी  उस शख़्स को कभी रूठना नही आता  एक हार से ,जो जिंदगी हार जाते हैं  उन्हें गिरकर संभलना नहीं आता कहते है लोग की लिखना बड़ी बात है क्या हर किसी को जज़्बात लिखना नहीं आता साक्षी चौहान ग्वालियर (मध्य. प्रदेश) 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Sakshi Chauhan EDUCATION : ADDRESS :

Vastra

  _वस्त्र तुम जब धरा पर आए चारों तरफ़ खुशियां छाए मैने ढका था तुमको मैने सहारा दिया था तुमको मै न होता लोग हंसते कोमल काया को देखते मै हर मूल्यों में बिका हर देशों में मिला आत्म सम्मान का रखवाला हूं बड़ा ही दिलवाला हूं मेरे बीना कहां जाओगे न रहूं कैसे मुंह दिखाओगे मैं ही लाज रखता हूं हमेशा साथ देता हूं अफसोस... तुम चिता पर जले मैने साथ छोड़ा तुमको बस बाय बाय बोला घबराओ नहीं फिर मिलता हूं अगले जन्म में..... Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंब पर संपर्क करें।

Ladki ka Dard

  _लड़की का दर्द मां बाप की लाडली बेटी हूं मुझे फलने फूलने दो सतयुग त्रेता द्वापर हर युग में मेरी पहचान थी बस कलयुग में मेरा उल्लास चला गया मेरी खुशी चली गई मै खुशी दू तो सब खुश हो जाएं मै रूठ जाऊं तो सब रुठ जाएं फिर.. समाज में मैं नगर.. डगर.. प्रताड़ित ही प्रताड़ित मै घर में असुरक्षित मां के गर्भ में असुरक्षित मै न औलाद न ही वारिस पराए घर की मेहमान मै प्रकृति हूं और सृजन भी क्यों कष्ट देते हो घर के बाहर कानून है घर में कैसे लाऊं कानून मुझे सम्मान दो मेरी रक्षा करो मां के गर्भ में बचाओ वो दिन दूर नहीं जब भारत में राम राज्य होगा बस राम राज्य Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi EDUCATION : ADDRESS :

Dhoop

  _धूप गर्मी में अच्छी नहीं लगती सर्दी में मन को लुभाती  कुछ पल के लिए कभी नहीं टिकती कभी कभी पेड़ो के झुरमुट छिपती देखो कोई देख न ले अरे... कोई पूछ न ले खिड़की से झांक लेती और आंगन से खिलखिला जाती कभी कभी तो दबे पांव भाग जाती आपने भी देखा हमने भी देखा कैसा है ये प्रकृति का लेखा शहर हो गांव हो हर जगह बस मेरी भरमार हो Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Pita Mere

  _पिता मेरे पिता मेरे । शत् शत् नमन.. सागर से भी गहरा, अंबर से भी ऊँचा जिसका प्यार है ' पिता " इक शब्द नहीं, संपूर्ण संसार है,  अनुभूति से आनंद तक ... असीम आशीर्वाद है पिता तेरा हमसभी पर अनमोल अनुराग है  मेरी रग-रग में बसा तेरा संस्कार है..  रक्त की हर बूंद तेरी ही कर्जदार है. ये जिंदगी, जज्बा, जुनून, तेरा दिया उपहार है..  मेरी हिम्मत, हौंसला और ये हंसीं तेरा दिया प्यार है..  सागर से भी गहरा, अंबर से ऊंचा जिसका प्यार है पिता इक शब्द नहीं संपूर्ण संसार है  जीवन एक परीक्षा है,सफलता पिता की शुभेच्छा है  जंग भी तेरी, जीत भी तेरी, मेरा जीवन तेरी ही इच्छा है  पिता हमारी पहचान है, सारी खुशियां सारा जहान है  वजूद से जिसके लगता जीवन, हर क्षण नया विहान है.  आदर्श तुमही हो, पिता मेरे ,तुमसे मेरा आत्मविश्वास है  जीवन बने सफल मिले सुख-समृद्धि तेरे आशीष की आश है सागर से भी गहरा, अंबर से भी ऊँचा तेरा प्यार है मेरे  "पिता" तू ही मेरा संपूर्ण संसार है.... 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amita ...

Nyi Umang

  _नई उमंग नई शाम के नया सबेरा होता है छोटी छोटी कलियों से बगिया में फूल खिलता है दुःख जायेंगे सुख आयेंगे एक पत्थर हमको सिखाता है बनती है प्रतिमा काट काट के मंदिर में जब लगती है फूल बरसता है प्रतिमा पर दुनियां सारी पूजती है इसी प्रकार जीवन है निर्मल कभी सहे जेठ की तपन तो कभी सावन की फुहार दुःख से तुम ना घबराओ जीवन है अनमोल उपहार कभी हसीं है कभी नमी और कभी मां की ममता सा प्यार धरा पर जीवन ऐसा जीओ छाई हो बसंत की बहार Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Father's day

_Father day अगर नौ महीने कोख में रखती है मां तो नौ महीने दिमाग़ में रखते हैं पापा भोजन पकाती है मां तो भोजन का इंतजाम करते हैं पापा तैयार करके स्कूल भेजती है मां तो पढ़ाई पूरी कराते हैं पापा कपड़े पसंद करती हैं मां तो बिल पे करते हैं पापा मां दुनियां में लाती है तो सम्मान दिलाते है पापा मां पूरा घर संभालती हैं तो घर का पूरा खर्च उठाते हैं पापा मां दिल में रखती है तो सिर के ताज होते हैं पापा घर में निडर बनाती है मां तो बाहर घुमाने ले जाते हैं पापा बर्थडे याद रखती है मां तो बर्थडे केक लाते है पापा घर की लक्ष्मी होती है मां तो घर के मुखिया कहलाते है पापा पिता दिवस पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Bhookh

  _भूख भूख लगी है मां कुछ तो खाने को दो राशन के पैसे अब तो लाने को दो भूख अब सहा नहीं जाता हैं मां अब कुछ कहा नहीं जाता रसोई में कुछ रखा हो तो लाके दो खाली डिब्बों मे चिवड़ा झाड़ के दो पेट में चूहे दौड़े है भूख सहने में आंसू पोछे है हाय हाय क्या नसीब है समाज में अब भी गरीब लोग है Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Mere Shabd

  _मेरे शब्द बुराई जब भी पनपे उसे जड़ से उखाड़ फेको इस इंसानी दुनियां में नफरत का बीज मत बोओ बिस्वास किसी भी मज़बूत रिश्ते का आधार है कुछ चीजें कीमत से नही किस्मत से हमको मिलती है कभी कभी खूबसूरती भी घातक होती है जैसे कि हीरा सहनसीलता रखो वसुंधरा के जैसे सबकी कद्र करना सीखो किस्मत तुम्हारी कद्र करेगी जो दिल को प्यारा लगता है उसकी झलक ही सारे दुखों को दूर कर देती है हम खुश रहेंगे तो हमारे आस पास का माहौल भी खुशनुमा रहेगा सच को छुपाने की हज़ार कोशिश कर लो फिर भी सच तो सच होता है जीवन का गणित ये कहता है कि जो झुकता है वही आगे बढ़ता है माता पिता और गुरू से बढ़कर इस संसार में कोई नहीं अपनी खुशियों के लिए किसी का हक मारना ये समझदारी नही बेवकूफी है स्त्री प्रेम से कांटों को भी फूलों में ढाल देती है Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Kya Khareeda

  _क्या खरीदा पैसे से हमने मकान खरीदा आनंद नही खरीद पाए पैसे से हमने शान शौकत खरीदी इज़्जत नही खरीद पाए पैसे से हमने भोजन खरीदा भूख नही खरीद पाए पैसे से हमने बिस्तर खरीदा नींद नही खरीद पाए पैसे से हमने वस्त्र खरीदा वाणी नही खरीद पाए पैसे से हमने गहने खरीदे रूप न खरीद पाए पैसे से हमने कुंडली खरीदी किस्मत नही खरीद पाए पैसे से हमने डिग्री खरीदी ज्ञान नही खरीद पाए पैसे से हमने पानी खरीदा प्यास नही खरीद पाए पैसे से हमने फोन खरीदा रिश्ते नही खरीद पाए पैसे से दूसरो को रुला दिया आंसू नहीं पोंछ पाए पैसा जीवन को चलाने के लिए हमारी अजीविका हैं लेकिन पैसे से बढ़कर भी कुछ है हमे उसे समझना और समझाना चाहिए Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Maa

  _माँ माँ तू है त्याग और बलिदान की मूर्ति,   हमेशा मेरे हर एक जरूरत को है पूरी करती, जब भी उदास या परेशान होता हूँ,   तेरे पास दौड़ा चला आता हूँ,  बिना कुछ सोचें समझें अपनी मन की हर एक बात तुझे बताता हूँ,  तू मेरे हर एक परेशानी को यूँ पल में दूर कर देती है,  मुझे दर्द में देखकर अपने हर दर्द को भुला देती है,  माँ तू है त्याग और बलिदान की मूर्ति,   हमेशा मेरे हर एक जरूरत को है पूरी करती,   हमेशा मेरे हर एक जरूरत को है पूरी करती। 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Hariom Gupta  अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Anmol Vachan

  _अनमोल वचन मेहनत करके खाओ दया का पात्र बन के नही आंसू बहाओ ईश्वर के सामने इंसानों के नही जो दूसरों पर हंसते हैं दुनियां उन पर हंसती है मज़ाक ऐसा मत करो कि वो तीर तलवार बन जाए दूसरो की सहायता इतना ना करो कि तुम एक निर्धन भिखारी हो जाओ धन दौलत होने पर कोमल बनो अभिमानी नही खुशियां बाटने से मिलती है छीनने से नही दिल खूबसूरत रखो चेहरा नही अपने आप को पानी बनाओ जिस रंग में रहो वही रंग जाओ दुख सहते सहते हम मज़बूत बनते हैं कमज़ोर नही आंखे सबके पास होती है बस देखने का तरीका अलग अलग होता है उम्मीद की थाली मे हमे प्यार परोसना चाहिए नफ़रत नही हम आशा करते रहें आप सब हमारी बातों से सहमत हैं Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

O My Lovely Beloved

_ O my Beloved One  O my lovely beloved once look at me for thine I bring my heart Everything what thou wish in dream I bring these gifts smart Look here the red bangles and bracelets too in a heap Not only red but all colours like a rainbow deep A dear name of heritage and a big mansion of my ancestors A loving heart of my parents where a flower bloom in my respected mother clusters A dream which every girl seen alone to play a love beam with her loving lover A fresh heart where no thorns a glowing face with love where no gloom cover Never wait for the consent of siblings I promise to take their acceptance I promise coming in my arms no misery or problems touch thou in repentance Every lovely flower gets proud seeing my love and caring For thou not worry I will bear all miseries with laughing sharing I know thou have a pain of separation thy own But I have thou in covering all tears separate zone 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Vijay Pa...

Deepawali

  _दीपावली आज छेड़ो दिलों में नया राग दिन है कुछ खास दिल में खुशी भरके बजाओ कोई साज मौसम बना है आज पर्व है महान घटा छाई है खुशियों की चारो ओर मस्ती में ढोल बजा रहे हैं लोग क्योंकि दीपावली है आज सीता राम सहित लक्ष्मण आएं हैं आज खुशियों के पल चुरा लो आज नाच लो आज खुशी का दिन है खोल दो दिलों के दरवाजे लक्ष्मी माता का हो जाए वास क्योंकि दीपावली है आज गणेश जी का हो सबके घरों में वास सुख शांति का हो सदाबहार खुशी से करते हैं अभिवादन हम आज सबके चेहरे पर रहे मुस्कान क्योंकि दीपावली है आज Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Log Kahenge

  _लोग कहेंगे कुछ तो लोग कहेंगे के चलते यूंही बीत जाती हैं जिंदगी समाज में ये शब्द चुप रहते हैं लेकिन दोस्तो दिलों के अरमानों को दबा देते हैं कुछ तो लोग कहेंगे इसके चलते कई लोगों की दुनियां और घर उजड़ जाते हैं हमारे दिल की इच्छा बंद कमरे में अपने अरमानों का गला घोट देती हैं कुछ तो लोग कहेंगे ये शब्द दुनियां में एक कटाक्ष बन गया है ये दुनियां आधुनिक हुई समाज बदला हम सब बदले लेकिन ये शब्द नही बदला आज भी सबके दिलो में मौजूद हैं कुछ तो लोग कहेंगे के चलते हमारे सपनों को बांधते हैं एक डोर जैसे और बना देते हैं हमको एक कुएं का मेढ़क बस इस कल्पना के चलते की कुछ तो लोग कहेंगे Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Aaj ki Shadi

  _आज की शादी लग जाता है बाप एक बेटी को खुशियां देने में दिन रात प्रयास करता है रिश्ता सटीक होने मे पहले का अपना जमाना था लड़का न देखे लड़की को लड़की न देखे लड़के को बात पक्की हो जाती चट मंगनी पट ब्याह शादी धूमधाम से हो जाती आया है कलयुग मार्डन जमाना लड़का बोले शादी से पहले लड़की को है होटल घुमाना दिल मिले दिमाग़ मिले फिर है रिश्ता आगे बढ़ाना लड़का लड़की मिलते हैं गुपचुप बात इधर उधर हो जाना है बाते चलती घंटो लगभग फिर भी समझ नहीं आना है इस कलयुग में बोलो भाई शादी कैसे रचाना है Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Amrit Vachan

  _अमृत वचन शिक्षा हमे सदाचारी बनाती है अज्ञानी और अभिमानी नही ईश्वर ने धरा पर भेजा है खूबियां निकालने के लिए कमियां नही हार कर जितने के बाद ही जीत का सुखद अनुभव होता है खुशियां दिल से बांटी जाती हैं दिमाग़ से नही यादों की चादर बहुत लंबी होती है जब मन दुःखी होता है तो कोई खुशी भी अच्छी नहीं लगती है जिन्दगी का सफ़र चुनौतियों से भरा होता है हमारे सुख के साथी बहुत मिलेंगे लेकिन दुःख के कम अमीरों को सब जानते हैं गरीबों को बहुत कम जिन्दगी में कभी भी हार मत मानो क्योंकि एक हार से कोई फ़कीर नही बनता है जिन्दगी की पहली पाठशाला की शिक्षक एक मां होती है अपने आप को कभी छोटा मत समझो दोस्तों क्योंकि एक चींटी एक हाथी को हरा देती है Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Sansaar

  _संसार क्यों करते हो अभिमान इस संसार में सब कुछ पराया है किराए की माया है किराए का शरीर पराए नगरी पर मन क्यूं ललचाता है रूह को अपनी पहचान क्यूं इस संसार में बनाता है कुछ अपने को बनाओ कुछ सवारों पुण्य कर्म कर जाओ बस मोह माया का ये संसार है खेल होता यहां बेशुमार है यह धन दौलत मोह माया और ये शरीर सब यहीं रह जायेगा काम किसी के ना आएगा इस संसार में क्या लेकर आएं हैं क्या लेकर जाना है सब तिल तिल मरके यहीं छोड़ कर चले जाना है मुझे पता है थोड़ा बहुत अजीब सा लगता हैं लेकिन दोस्तो यहीं संसार की सच्चाई है जिन्दगी का मोल समझने के लिए Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Aansu

  _आंसू दिल में कोई दर्द तकलीफ़ हो तभी आखों में आंसू निकलते हैं कभी कभी छोटी सी बात पर ये आंखो से झलक जाते हैं कभी कभी हम सब सोचते है इनको छुपा ले लाख तकलीफ़ हो फिर भी इनको हम सबकी नजरों से बचा ले लेकिन नही ये खुद अपने आप आखों से झलक जाते हैं इन आंसुओं का कोई घर संसार जाति धर्म भाषा नही है लेकिन ये जिसे मिले बहुत दर्द दे जाते हैं आज का इंसान ये कैसे कहे कि वह हर पल खुश हैं बस आंसू छिपाके हसता रहता है जिन्दगी जब जब परिक्षा लेती है तब तब ये आंखो में शोभा पाते हैं कुछ भी हो यारों ये आंसू हमारी जिन्दगी में कभी न कभी जरूर आते हैं Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Jal

  _जल मुझे गर्व है मै जल हूं इस धरती मां शान मुझसे ही फलते है हर इंसान मै ही इनका जीवन हूं साक्षात मै ही पेड़ पौधों का वरदान कलियों की मुस्कान मुझसे ही है जीवन संसार मुझसे ही अनपूर्णना मुझसे ही तुम्हारा भरण पोषण मै नही तो जीवन मृत्यु समान मै ही प्रकृति और सृजन मै ही प्राणी के जीने का आधार मुझसे ही ये धरती और फसलों की शान मै परिमाप हूं जीवन का आधार भी मुझे गर्व है मै जल हूं इस धरती मां की शान Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi  अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Maa Ka Pyaar

  _मांँ का प्यार मां एक ऐसा नशा है तुझमें डूब जाते हैं हम अपने सब दुख भुलाकर तुम्हारे सीने में सिमट जाते हैं हम क्योंकि इसमें शामिल हैं कोमल हाथों की थपकियां आंसुओं की भीगी पलकों की झिलमिलाती झपकियां मां तुझमें ही है प्रथम गुरु की महिमा जिससे बनेगी एक दिन हमारे मान सम्मान की गरिमा तुम्ही हो जननी तुम्ही सहायिका तुम्ही हो मेरे आने वाले कल की नायिका तुम्हारे साथ हम बेहाल हो जाते हैं अंदर से निडर हो जाते हैं आखिर कैसा नशा है तुझमें मां डूब जाते हैं हम Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Ladkiyan

  _लड़कियांँ लड़कियां कोमल होती है नाजुक होती है खूबसूरत होती है मासूम होती है इसका मतलब ये नहीं है कि वो कमजोर भी होती है लड़कियां पानी की तरह होती है जिस रंग में डालोगे उस रंग में रंग जायेगी लड़कियों के आंखो में शर्म और दिल में प्यार होता है लड़कियों का दिल दिमाग हमेशा साफ़ रहता है गंदगी तो ये समाज भरता है लड़कियों को खिलौना नही खेल समझो ये आती है तो खेल सुरु जहां लड़किया सह लेती है वहा लडको का मान सम्मान है जहां नही सहती है देखो कैसा हाल है लड़कियां जितना समर्पण करती है लड़के उतना कभी नहीं कर सकते हैं लड़कियों से ही संसार चलता है फूलता है और सृजन करता है देश वासियों आप तो जानते ही हैं जो लड़कियों का सम्मान करते हैं लक्ष्मी जी उन पर प्रसन्न होती है तो आप सब भी अपनी बहन बेटियों का सम्मान करते रहें Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. ...

Basant Ritu

  _बसंत ऋतु देखो मां बसंत ऋतु आया है मेरे दिल को भाया है उपवन में खुशबू का छाया है चारों तरफ़ महकाया है महका है संसार खिले हैं फूल हज़ार रंगो की माला से हुआ है बसंत ऋतु का सम्मान चांद ने अपनी चांदनी है बिखराई धरती पर मानो मनमोहक छटा है छाई तितलियों के रंग बिरंगे पंख सबके मन को भाए हर साल ये बसंत ऋतु आए पौधों पर नए नए पल्लव है आए सब करने बसंत ऋतु का अभिनंदन है आए आसमां में उड़ रही हैं पतंग मानो बंधी हुई है मन की डोर पक्षी निकल पड़े हैं नीडो से कुछ पाने अनाज के दानों को मानो दिल उमड़ पड़ा है बसंत ऋतु मानने को कामना है बसंत ऋतु हर साल आए और सबके दिलो में समाए Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रका...

Mayke Ki Yaad

  _मायके की याद मायके का दिन याद आता है मुझे वो भाई बहनों का साथ याद आता है मुझे याद आते हैं वो कालेज के दिन वो शिक्षको का आशीर्वाद मां की मीठी मीठी डांट वो दादी की बात वो चोरी चुपके खेलना कूदना दोस्तो से दिन भर बात करना और स्कूल में छुट्टी का इंतजार छोटी उम्र के छोटे सपने और प्यार भरी बातें वो तितलियों का पकड़ना और पिकनिक मनाने और परीक्षा की तैयारी सब कुछ याद आता है मुझे कभी कभी लड़ाई झगडे दिल की अकुलाहट कब खत्म हुईं पता ही नहीं चला मन दुखी होता है कभी कभी पंख पसारे उड़ जाऊं बचपन के घर मां दुआओं में कहती थी हरदम याद रखना बंधे रहोगे हरदम अतीत के डोर से तुम बिस्वास से भरे उम्मीद में चलो तुम अपने मजबूत पंखों से आसमां छू लो एक दिन  Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते ...

Bhikchhuk

  _भिक्षुक गरीबी तोड़ देती जो रिश्ते खास बने होते हैं पराए अपने बन जाते हैं जब पैसे पास में होते हैं रिश्ते नाते सब कुछ बेचकर खाता है इंसान पेट की आग बुझाने के लिए दर दर डगमगाता है इंसान भिक्षुक बनकर दर दर भटकता है दो मुट्ठी चावल कि खातिर पेट पालने की खातिर आखों में आशा की किरण लेके हाथों में दया का पात्र सबके आगे झुकता है बेहाल विधाता ने कैसे हाथो की लकीरें बनाई कैसे बना दिए हैं भाग्य इस तकदीर के रंग अजीब है भिक्षुक सोचता है दिन रात कोई उसकी मर्म व्यथा को दूर कर दे कोई उसकी अंधेरी रात में जुगनू की तरह उजाला भर दे जैसे सुदामा के घर आए थे घनश्याम Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना ...

Nahi Karna Chahiye

  _नही करना चाहिए थोड़ा सा सम्मान मिल जाए तो हमे पागल नही होना चाहिए जब धन मिल जाए तो बेकाबू नही होना चाहिए जब यश कीर्ति मिल जाए तो दुनिया पर नही हंसना चाहिए खुद से ज्यादा किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए सौंदर्य मिल जाए तो अपना चरित्र खराब नहीं करना चाहिए थोड़ा सा अधिकार मिल जाए तो किसी को तबाह नही करना चाहिए किसी मजबूरी से हमे भागना नहीं चाहिए हर तरह के गमों में हमे जीना सीखना चाहिए वक्त की आंधी में मौसम की तरह हमे बदलना नही चाहिए खुशी के आंसू रुकने नही देना चाहिए और गम के आंसू किसी के सामने बहने नही देना चाहिए खुशी मिले कहीं उसे इनकार नहीं करना चाहिए अपनो से कभी रूठ कर नही रहना चाहिए ये जिन्दगी है साहब यहां उतार चढ़ाव लगा रहेगा आप सब जानते हैं कि सूरज के बिना सुबह नही होती और चांद के बिना रात ठीक इसी तरह हम लोग अपनी इंसानियत को कैसे भूले Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास ...

Ladki ki Vedna

  _लड़की की वेदना दिल मजबूत है बेटों का दिल में मासूमियत लाते हैं हम चेहरे पर मुस्कान है बेटों के हसीं की विरासत बन जाते हैं हम मन में तरंगे है बेटों के कुछ अलग कर जाते हैं हम आगे बढ़ने का मौका बस बेटों को आगे बढ़ जाते हैं हम खाद बीज डालते हो बेटों को फल फूलकर उग जाते हैं हम कुल का दीपक कहते हैं बेटों को कुल कुल का दीप जलाते हैं हम कुल का सम्मान बेटों को कुल कि लाज रख जाते हैं हम बोलने का मौका बस बेटों को चुप रहते कुछ अलग कह जाते हैं हम समाज में घूमने का मौका बस बेटों को घर में रहते हुए दुनियां घूम जाते हैं हम सहनशील बनाते हैं बेटों को सहनसिलता की मूर्ति बन जाते हैं हम ममता का प्यार दुलार बेटों को ममता की देवी बन जाते हैं हम घर में मुखिया बेटों को घर की लक्ष्मी बन जाते हैं हम अब तो बस करो मुझमें भेदभाव मुझे सम्मान दो आगे बढ़ने दो इसी संकल्प के साथ आओ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी...

Corona virus

  _कोरोना वायरस समय 2020का जैसे आया चीन ने एक हथियार बनाया सारे जहां को डराया भागो भागो कोराेना वायरस आया सर्दी खासी तेज़ बुखार यही बनी इसकी पहचान ना कोई है इसका इलाज़ डर डर भागे हमारा समाज देश के नेता बने महान दिए हैं लॉक डाउन का वरदान मोदी जी है बड़े महान सामाजिक दूरी का दिए हैं ज्ञान पुलिस डॉक्टर सबकी सलाह धोते रहो बस साबुन से हाथ कलयुग में ऐसी बीमारी ना देखी मैने ऐसी महामारी ना देखी भारत हमारा बनेगा महान करेगा एक दिन कोरोना साफ़ विश्व विजेता बनके दिखलाएगा सारे जहां का राजा कहलाएगा Amrita tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita Tripathi EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें। ...

Jindagi Sikhati He

  _जिन्दगी सिखाती हैं ये जिन्दगी तू कितनी अजीब है जन्म से लेकर मृत्यु तक कुछ नया कुछ अलग सिखाती रहती कितनी तकलीफे लाती है तू कभी खुशी है तो कभी गम कभी धूप तो कभी छांव ये जिन्दगी तू है मुस्किलो का एक गांव यहां हर मोड़ पर हमे परीक्षा लेते हुए हमे मंजिल तक पहुंचाती हैं कभी हंसाती है तो कभी रुलाती ये जिन्दगी तू कभी हर चीज़ के लिए संघर्ष कराती इस दुनिया में न जाने कितने मोड़ है कहीं अच्छाई के तो कहीं बुराई के इन सपनों को पूरा करके नई उम्मीद जगाती हमे मृत्यु एक अंतिम पल है जीवन का उसमे भी कर्तव्य निभाती हैं ये जिन्दगी तू कितनी अजीब है कुछ नया कुछ अलग सिखाती रहती हमे Amrita Tripathi 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प...

Mera Kabootar

  _मेरा कबूतर एक दिन सावन की बात निराली बारिश में भीगी मेरी पीली साड़ी भीगा बदन भीगा तन मन और भीगा मेरा आंचल और भीग गए वो दाने मैने जो कबूतर के लिए डाले आता था बस मुझे देखने और खाने वो दाने बारिश हुई वो आ नही पाया दाना पानी कुछ खा नही पाया आज उम्मीद टूट गया है वो भी मुझसे रूठ गया है कलरव उसका मै सुन नही पाई इसी चिंता में नीद गवाई न जाने वो कैसा है भूखा है प्यासा है कैसा है सुना करके मेरा घर आंगन न जाने वो कैसा है पागल दिल लग गया है जिससे उसे प्यार कहते हैं एक दिन वो आएगा दाना पानी कुछ खाएगा मुझे गले लगाएगा और थपकी देकर मुझे गहरी नींद सुलाएगा 👉 हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें 👈 Poet Amrita tripathi EDUCATION : ADDRESS : Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्ह...