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Basant Ritu

 

_बसंत ऋतु

Poet Amrita Tripathi


देखो मां बसंत ऋतु आया है मेरे दिल को भाया है
उपवन में खुशबू का छाया है चारों तरफ़ महकाया है
महका है संसार खिले हैं फूल हज़ार
रंगो की माला से हुआ है बसंत ऋतु का सम्मान
चांद ने अपनी चांदनी है बिखराई धरती पर मानो मनमोहक छटा है छाई
तितलियों के रंग बिरंगे पंख सबके मन को भाए हर साल ये बसंत ऋतु आए
पौधों पर नए नए पल्लव है आए सब करने बसंत ऋतु का अभिनंदन है आए
आसमां में उड़ रही हैं पतंग मानो बंधी हुई है मन की डोर पक्षी निकल पड़े हैं नीडो से कुछ पाने अनाज के दानों को मानो दिल उमड़ पड़ा है बसंत ऋतु मानने को
कामना है बसंत ऋतु हर साल आए और सबके दिलो में समाए

Amrita tripathi

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Amrita Tripathi

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