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संदेश

कोरोना वायरस, मजदूर और सरकार

बाजीकरण के दौर में, कोरोना फैल चुका है,  संक्रमण के चलते देश, व्यापार आदि सब बंद हो चुका है।  ये दौर बहुत मुश्किल है सच में मजदूरों के लिए,  वो पहले भी मरते थे या मारे जाते थे पूंजीपतियों द्वारा फैक्ट्रीयों में, कारखानों में मीलों में और अब भी वो मारे जा रहे हैं भूख द्वारा सडकों पर पैदल चलने से  मालगाड़ीयों से कटने से  और रेलगाड़ी के भटकने से लेकिन दलील यह होगी  मध्यमवर्ग की कि सडको ंं पर  निकलना नहीं चाहिए था उन्हें या पटरी पर सोना नहीं चाहिए था उन्हें मगर मुआफ़ कीजिये यह पूंजीपतियों की ही भाषा है ये हुक्म्रानों  और सत्ताधारीयों की ही जुबान है ,  जो मजदूरों का खून पीकर भी उन्हें ही दोषी मानती है तो इस दलील पर यह सवाल है की मजदूर को रोटी कहाँ से मिलेगी उन्हें आराम की नींद भूखे पेट कैसे मिलेगी?  जब लाॅकडाउन के नाम पर बिना व्यवस्था के सब कुछ बंद कर दिया कोरोना वायरस महामारी ही एक समस्या नहीं है समस्या भूख , सरकार की लापरवाही और अव्यावश्था भी है चाहे मर जाए कोई ट्रेन से कटकरक, हाईवे पर गाड़ीयों से कुचलकर ,  या भूख से बिलखकर सरक...

हमारा प्यारा भारत

   जिससे मिलती सबको आहत,  जीससे मिलती हर चीज़ को राहत।  सबको है, बस एक ही चाहत,  वह है हमारा प्यारा भारत॥                      फूलों की एक बाग सी,                     चिड़ियों की चहचाहट सी।                     वह है हमारा प्यारा भारत,                     जहाँ मिलती है सबको पनाह सी॥  जहाँ चलती है ,हवा सुहानी ,  जो सबके मन को लुभानी।  हर दुश्मन चाहते भारत पे शासन करना,  पर चलती है न यहाँ किसी की मनमानी॥                    दुश्मनों की क्या मजाल,                   जो बुने भारत से दुश्मनी का जाल।                   अगर कोई भारत से औकात पूछले ,            ...

रंग रूप में भेद भाव

   🌿🌿जाहा आस लगाई वही पर निराशा मिली 🌿🌿 🍃🍃जितनी रोशनी कि और गई इतना ही अंधेरा मिला 🌿🌿 😞😞डर लगता है इस अंधरे मे खो ना जाऊ किस्मत को कया मजुर है पता नही लेकिन कही इस समाज के काला गोरा सुदंर बदसूरत भेदभाव के ताने मे कही खुद को खो ना दु🍃🍃 🌿🌿कयोकि ज्यादा यहा सकल सुरत देखी जाती है किसी का सचा दिल नही 🌿🌿 🍃🍃 अब खोना कया पाना कया अब तो सारी उम्र रोना है 🌿🌿 🍃🍃रोना भी एसा आॅसु बाहार ना आए अगर छलक पडे आसु पोछने बाला कोई नही मजाक उठाने बाले हजारो होगे 🌿🌿 🍃🍃इसि भेदभाव को सहते हुए जमाने को यह बतलाना है सकल सुरत से ज्यादा इंसान का गुण और सच्चा दिल देखो 🌿🌿 🍃🍃 या मतलब भरी दुनिया चहरो पर ज्यादा मरती है गुणों पर नही 🌿🌿🌿 Written by          -  Ritu kavar        Anoopshehar, Bhadra,Hanumangar (Rajasthan)  Posted by - Om Tripathi

प्यार कब हो जाए

   प्यार कब हो जाए, कुछ पता नहीं,  प्यार किससे हो जाए, कुछ पता नहीं।  प्यार किस उम्र में हो जाए, पता नहीं,  प्यार में क्या पाएगा कुछ, पता नहीं॥                  प्यार में क्या खोएगा, कुछ पता नहीं,                प्यार में कब तक रहेगा, कुछ पता नहीं।                प्यार किस हद तक जाएगा, पता नहीं,                प्यार में साथ कौन निभाएगा, पता नहीं॥  प्यार में ऋषि कब तक रोए, कुछ पता नहीं,  प्यार उसका कभी वापस नहीं पाएगा, उसे पता नहीं।  क्यों दिल लगाया है, ऋषि एसी लड़की से,  क्या उसके बारे में तुम्हें, कुछ पता नहीं॥                शेयर कर दो यह संदेश हमारा,               ऋषि अब भी रो रहा है, क्या लड़की को पता नहीं।              जीवन भर रोना लिखा है, ऋषि किस्मत में,  ...

आया कोरोना आया कोरोना

  उमड़ धुमड़कर पूरे विश्व में, यह देखो - खूब कहकर बरसाया कोरोना  आया कोरोना- आया कोरोना ||                                                                             देखो देखो सभी गाँव  शहर वाहन इत्यादी हुए बंद,                 इसी से होगा कोरोना का कहर कम;                कितनो देशोमै हड़कंप मचाया कोरोना॥                 आया कोरोना आया कोरोना॥    आज किस गाँव शहर शहर में आया,  किस घर को अपना  शिकार बनाया कोरोना,  बहुतों को सताया कोरोना।  आया कोरोना आया कोरोना॥               देश-विदेश सब गाँव शहर भी,               नगर मुहल्ला बाजार शहर भी;  ...

रक्षाबंधन का महत्व

  बंधन-बंधन प्यार का बंधन।  सबसे न्यारा है, ये रक्षाबंधन॥  बहना जो भाई के कलाई पर राखी बांधी जाए।  भाई जन्मों- जन्मों तक बहन की रक्षा का पात्र निभाता जाए॥ राखी एक ऐसा बंधन कहलाए जो भाई बहन के प्यार एक सूत्र में बाधीं जाए॥  श्रावण माह का ये प्यारा त्योहार।  जो दिखाए भाई-बहनों का अटूट सा प्यार॥  जो भाई अपनी बहनों से अटूट प्यार है करते।  वे ही बहनों की खुशीयों के खातिर दुनिया से है लड़ते॥  यह पर्व भाई-बहन के लिए खास रहे जब किसी मुश्किल घड़ी में बहना आए।  भाई को है रक्षा करना यह पर्व याद दिलाए॥  धर्म गृहों के अनुसार सबसे पहले माँ लक्ष्मी ने राजा बली को बाधीं राखी।  तब से लोग हुए इस पर्व के आदआदि॥  इतिहास में सिकंदर की पत्नी रोकजाना ने पोरस को बाधीं राना सांगा की पत्नी कर्णावती ने हुमायूं को बाँधी राखी ये है हिंदू मुस्लिम के प्यार के साक्षी॥  रक्षाबंधन का लक्ष्य है अभी अधूरा जब भारतीय लोग जात-पात छोड़ कर बनेगें एक दूसरे का सहारा तभी होगा रक्षाबंधन का न पूरा।  हम सब भारतीय भाइयों को रक्षाबंधन में प्रतिज्ञा है करना की भ...

मेरा प्यार

  दुनिया भी बेकार है,  भगवान भी बेकार है। तरस खाता नहीं मेरे ऊपर,  कैसे का भगवान है।            नहीं चाहिए खुदा तुमसे कुछ भी,            स्वर्ग जन्नत अनंत जीवन भी।            देना है तो बस यही दे जाओ,            हर दुख दूर हो, शाम को आए नींद भी।  क्या दिल लगाने की सजा यही है,  जो रो रहा हूँ क्या प्यार यही है।  मान रहा हूँ हर गलती अपनी,  हमें माफ़ करना क्या खता नहीं है।            मैं अंधा था, अज्ञानी था          हममें चंचलता और जवानी थी।           प्यार में उसके रोता मैं,         क्या देखा नहीं प्रभु अंधा था।  प्रभु बिन दुनिया में कुछ हो सकता नहीं,  फिर मेरे आँखों में आँसू आया क्यूँ।  आँसू आए क्या मर्जी तेरी,  तेरी मर्जी है तो मेरा प्रभु क्यूँ।          तुम मर गए प्यार के कारण,...

पिता का प्यार

   भले ही माँ,  जन्म देती है!  पालकर बड़ा करते हैं पापा!!            घुटनों के बल चलते-चलते,           खड़ा होने को करता जब मन,           पकड़ कर हमारी ऊंगली,           चलना सिखाते हैं पापा!  थकान होती है,  जब चलने पर,  उठा अपने कंधे पर,  बेठा लेते हैं पापा!          टूटे ना कोई सपना,          हो पूरी हर ख्वाहिश,          इसके पीछे दिन-रात,          एक कर देते हैं पापा!   Written by - Pooja Jha(Kavya)   Parmanandpur,Arariya  (BIHAR)  Posted by - Om Tripathi

दहेज की मार

जब देखन को  जाते हैं पिता बेटी का वर, सुन उनकी मांग को,  वापस आ जाते हैं घर।                     उनकी मांग                      पूरी करने में,                      रहते हैं असमर्थ,                      सोचन लगते हैं,                      जन्म दिया                     बेटी को व्यर्थ।  पुनः जब  प्रस्ताव लेकर,  जातें हैं दूसरे के द्वार,  घर को भेज देती है,  उसे दहेज की मार।                                                        देख बेटी,               ...

धरती की पूकार

आंखों में थोड़ा अश्क लिए,          ह्रदय द्रवित करके कुछ बोली,  तुम कितने निष्ठुर हो मानव,          नही अवगत मेरे आघात से तुम,  सुनो! मैं तुमसे कुछ कह रही,          करके दुरूपयोग तुम मेरा,    जूझ रहे संकट से आज,          वक्त अभी भी गया नहीं है,  क्षमा के हो हकदार अभी तुम,            प्रलय से बचाकर धरा को आज,  खुद को मुक्त करो कर्ज से तुम,           बचा लो आने वाली पीढ़ी के लिए,  कृतज्ञ होगें वो कल तुम पर,           निर्भर होगा प्रकृति पर उनका जीवन,  जियो ना बनकर मिट्टी के पुतले,           निर्माण करो फिर से इस जग का,  जिसमें बहती मलय पवन हो,           निर्मल अमृत की जल धारा,  कलरव करते विहंग धरा पर,           झूमते तरुवर की मुस्कान हो,  आखों में थोड़ा ...

कोरोना का कहर

अब बस भी करो अपना कहर,                बहुत उगल चुके हो तुम जहर,  छुपने को बचा नही कोना,                  अब बस भी करो कोरोना॥  कितनो का तुमने गोद छीना ?                  कितनो का किया माँग सुना?  रूकने के नाम पर हो रहे दोगुना,                    अब बस भी करो कोरोना॥  मानो तुमने जीना ही सिखा दिया,                    अपने कहर से इतना जो डरा दिया हो गया है मुश्किल अब जीना,                      अब बस भी करो कोरोना॥  आखिर कौन सा-विष तूने अपने अंदर है पाल रखा,                      जिसे बडे़- से- बडे़ वैज्ञानिक भी ना समझ सका,  तुम्हारे कारण अपनों को पड रहा है खोना                  ...

प्राकृति

बयां करूँ मैं तेरा रूप क्या,              तेरा रूप निराला है॥      भारत की आधार भूत ये,                देवों की हाँ भाषा है॥  बयां करूँ मैं तेरा रूप क्या,               तेरा रूप निराला है॥  कई ज्ञानीयों को तूने हाँ,              असमंजस में डाला है॥  बयां करूँ मैं तेरा रूप क्या,                     तेरा रूप निराला है॥ क्या रूप दिखाऊँ तेरा सबको,              तूने सबको पाला है॥  बयां करूँ मैं तेरा रूप क्या,             तेरा रूप निराला है॥    पेड़ लगा कर तुम्हें बचाएं,              मन में यह हमने ठाना है॥  बयां करूँ मैं तेरा रूप क्या,              तेरा रूप निराला है॥    तुम दयावान तुम जगपालक हो,   ...

हिंद प्रेम

मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ भारत मेरा अपना है॥  सब खुश रहैं , आपस में हाँ प्रेम करे बस इतना मेरा  सपना है॥  मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ आर्यवर्त मेरा अपना है॥          हिम्मत जिसमें अपार जो कभी न माने हार यही मेरा अपना है॥ मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ भारत मेरा अपना है॥  जहाँ कभी न होता दुराचार शिक्षा का हो पूरा अधिकार, बस यही मेरा अपनाहै है॥  मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ आर्यवर्त मेरा अपना है॥ हाँ भारत ही विश्व गुरु और अखंड बने, बस सपना मेरा इतना है॥  मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ भारत मेरा अपना है॥  यूवा बालकों को ही देखो, मन में देश प्रेम का सपना है॥  मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ आर्यवर्त मेरा अपना है॥ लगता है इस काबिल बन जाऊँ, अपनों का मैं साथ निभाऊ॥  मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ भारत मेरा अपना है॥  भारत माँ की रक्षा में, मैं सर्वश्य लुटा जाऊँ, बस सपना मेरा इतना है॥  मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ आर्यवर्त मेरा अपना है॥ मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ भारत मेरा अपना है॥ ...

अंतर्मन

मैं नित्य तुम्हे ही याद करूँ,                      तुम तो अंतरयामी हो॥  कई रूप तुम्हारे हैं विकराल,                      पर तुम भोले भंडारी हो॥ मैं नित्य.........॥  हम अज्ञानता पूण हुए हैं,                      तुम ज्ञानी विज्ञानी हो॥ मैं नित्य............॥  जग में तुम ही रास रचाओ,                      तुम ही पालन हारी हो॥ मैं नित्य...........॥  कई कर्म हुए अधर्म हुए,                      पर तुम ही पालन हारी हो॥ मैं नित्य......॥  राम नाम की रास रचाई,                     तुम शंकर अविनाशी हो॥ मैं नित्य.........॥  मैं याद करूँ फरीयाद करूँ,                    तेरा दर संकट हारी है॥ मैं नित...

कहाँ गए हो......

कहाँ गए हो हवा में घुल कर ,                  क्यों इतना याद आते हो॥  एक क्षण के लिए मिल जाओ ना,                  सीने से मुझे लगाओ ना॥  उस रात में घोर अंधेरा,                  क्या समय की ही वो गलती थी॥  कानों तक जब बात वो पहुंची,                  वो रात नहीं थी कटती थी॥  सबकी आँखों में था पानी,                  वो पानी नहीं ये दर्द छिपा॥  कल बुरा हुआ तो क्या हुआ,                  कल अच्छा होगा है मुझे पता॥  जीवन में कुछ करने की आशा,                  लेकर में दृढ़ पथ पर चला॥                                 Written by              ...

मै ठोकर खाता पत्थर हूँ

मै  ठोकर खाता पत्थर हूँ  ,  तुम अडिग खडी़ चट्टान प्रभू  ॥  मै धरती का इक रहवसी हूँ  , तुम तीनों भवनों के नाथ हरि  ॥ मै माया से जकडा  प्राणी हूँ   , तुम माया पति भगवान हरि  ॥ जो भक्त तुम्हारा होगा हरि    , माया उसको न व्यापेगी   ॥  तुम हो साकार  , तुम निराकार  , तुम ही आदि अनंत प्रभू  ॥ हे बृह्मा -विष्णु- महेश सुनों  , है मेरी विनती अब तुम सब से  ॥ ऐसे लोगों को समझाओ  , जो करते हिंसा की बात हरि  ॥  युध्द से भला किसी का  न हो पाया है , इस अग्नि मैं दोनों दल ने कुछ न कुछ गवाया है  ॥  मेरी अतिंम विनती है प्रभू आपसे  , हिंसा वाली प्रथा मिटा  जाओ  , और मानव को मानवता का पाठ पढा जाओ  ,॥                          Written and posted by                    - Om Tripathi