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संदेश

Chand

_  || अधूरे चाँद जैसा इश्क़ || सूनी डगर पे मैं तेरा नाम लेता रहा  हाँ... नाम लेता रहा... तू ग़ैरों की महफ़िल में, मैं तन्हाई सहता रहा बेवफ़ा... तन्हाई सहता रहा | तड़पता छोड़ के मुझको, तेरा कारवाँ चल दिया अधूरे चाँद जैसा, मेरा इश्क़ रह गया अधूरे चाँद जैसा, मेरा इश्क़ रह गया | मिले न मौत मुकम्मल, न चैन पूरा आया कफ़न मिला न मुझको, न तेरा साया आया | ज़िंदा जला दिया मुझे तेरी बेरुख़ी ने इस क़दर कि मेरी राख से भी बस, तेरी ही वफ़ा का धुआँ आया | तू मुकम्मल कहानी किसी और की बन गई मैं अधूरा सा अफ़साना तेरा रह गया | तेरी डोली उठी तो मेरा जनाज़ा भी सज गया तू हँस के रुख़्सत हुई , मेरा ख़ुदा भी रो दिया | तड़पता छोड़ के मुझको, तेरा कारवाँ चल दिया... अधूरे चाँद जैसा, मेरा इश्क़ रह गया...  ~बाल कृष्ण मिश्रा , नई दिल्ली |

wife and wi-fi

_   “ पत्नी और Wi-Fi ” घर में आते ही ऐसा जाल बिछाती है, अच्छे-भले जीवन का डेटा खा जाती है। मुफ़्त का हॉटस्पॉट समझकर पास आए थे, उम्र भर “ अनलिमिटेड प्लान ” का बिल चुकाते हैं। रेंज में रहो तो पूछताछ सुबह-शाम होती है, रेंज से बाहर जाओ तो इमरजेंसी एलान होती है। चैट दोस्तों से करो, तो इसके पास तुरंत 'OTP' जाता है, आधी रात को भी पति का 'बायोमेट्रिक अंगूठा' लग जाता है। सोचा था 'Incognito Mode' में जाकर ज़रा चैन से जिएँगे, ये वो डेंजरस हैकर है जो डिलीटेड चैट भी स्क्रीनशॉट बनाकर लाता है! हर कॉल, हर मैसेज का ऑडिट हो जाता है, घर का ड्रॉइंग रूम ही जाँच आयोग बन जाता है। इसकी मेमोरी ऐसी कि दुनिया दंग रह जाए, दस साल पुरानी गलती भी तारीख़ सहित याद आ जाए। मोबाइल पर मुस्कुराओ तो केस नया बन जाता है, “इतनी खुशी किस बात की?” प्रश्नों का दौर आ जाता है। साले की शादी का फ़ंक्शन हो तो इसकी स्पीड '5G' से तेज़ है, पति बीमार हो तो कहती—'सर्वर डाउन' है, खुद बना लो जो परहेज़ है! शॉपिंग कार्ट में सामान डालते ही 'क्लिक-टू-पे' एक्टिवेट हो जाता है, और पति की सैलरी का मैसे...

श्री जगदम्बा ताण्डव स्तुति

 . ॥ श्री जगदम्बा ताण्डव स्तुति ॥ जयति जयति जगदम्ब भवानी, आदि शक्ति परमेश्वरी कल्याणी। दनुजदलन-दुष्टदमन-कारिणि, जय जय जननि जगत्तारिणि॥ रणमुण्डमाल-विगलद्रुधिरप्रवाह- प्रचण्डचण्डहास-भयङ्करप्रभा। डमड्डमड्डमड्डमड्डमन्निनादित- प्रचण्डताण्डवप्रिया नमोऽस्तु ते शिवा॥ करालवक्त्र-दीप्तदंष्ट्र-कालकाल- कपालमालभूषिते महेश्वरि। त्रिशूलखड्गचक्रशक्तिधारिणि, प्रसीद देवि विश्वमङ्गलेश्वरि॥ प्रभिन्नशुम्भनिशुम्भदैत्यदर्पहा, प्रमथ्यमानरक्तबीजविग्रहा। महिषासुरप्राणहारिणि प्रभो, नमामि सिंहवाहिनीं परां शिवाम्॥ भुजङ्गहारकुण्डलोल्लसत्कच- प्रभञ्जनप्रचालिताम्बरोज्ज्वला। जटाजूटसंभ्रमोन्मथन्महीतलं, नृत्यन्ति यस्याः पदपल्लवा दिशः॥ प्रदीप्तकोटिसूर्यचन्द्रतेजसा, प्रभासिताखिलाण्डकोटिमण्डला। त्रिलोचनप्रियार्धदेहधारिणी, परा परात्परा परेश्वरी शिवा॥ कृपाकटाक्षवृष्टिपूतमानस- प्रसन्नभक्तपालिनी दयामयी। भवाब्धिमग्नजीवमोक्षणोत्सुका, भवानि पाहि पाहि विश्ववल्लभे॥ त्वमेव शक्तिरूपिणी परात्परा, त्वमेव वेदमातृका सनातनी। त्वमेव सृष्टिपालनान्तकारिणी, त्वमेव मुक्तिदायिनी निरञ्जनी॥ नमो नमो महेश्वरी शिवप्रिये, नमो नमो जगद्गुरो जगन्मये।...

Holi

 होली  - रंगों की झोली आया समय दहन का हिरण्यकश्यप की बहन का । भस्म न हुआ प्रल्हाद वो  विष्णु भक्त महान वो । आओ खेलें हीर ,गुलाल की होली  भर दे खुशियों से सबके मन की झोली। होलिका का दहन हुआ  बुराइयों का पतन हुआ । विजय हुई धर्म की पराजय हुई अधर्म की  । आओ खेलें हीर ,गुलाल की होली  भर दे खुशियों से सबके मन की झोली। आई विभिन्न रंगों की होली  नाचते , गाते लोगों की टोली। मिट जाए अंधकार जैसा मल न करे कोई किसी से छल। आओ खेलें हीर ,गुलाल की होली  भर दे खुशियों से सबके मन की झोली। हर दिन हो जाए इंद्रधनुष सा रंगीन  मिटे आपसी मन मुटाव बने जीवन हसीन । रंगों की छटा ऐसी बरसाए  हर एक पल जीवंतता से खिलखिलाए । आओ खेलें हीर ,गुलाल की होली  भर दे खुशियों से सबके मन की झोली। होली की हार्दिक शुभकामनाए ! दीप्ति परचुरे Education -- M.A.English

Parwati Shakti Tandav Stuti

  _  श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति    || संस्कृत काव्य ✒️ ||  || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || _______________________________________ कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी, उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी। अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी, करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी  ||१|| ललाट-बिन्दु-सिन्धु-रक्त-रञ्जिता-स्व-भालका, धनुर्धरा त्रिशूलिनी कपाल-पाश-धारिणी। कराल-काल-मर्दिनी समस्त-दुःख-हारिणी, नमामि शैल-पुत्रिणीं सदा शिवा भवानी  ||२|| रणत्-क्वणत्-कणत्-किङ्किणी-नूपुर-घोष-मण्डिता, चलत्-चलत्-पद-क्रमैः सु-विश्व-चक्र-चालिनी। अघोर-रूप-धारिणी घोर-शत्रु-घातिनी, प्रचण्ड-शक्ति-रूपिणी सदा शिवा भवानी  ||३|| जगज्जननी पावनी प्रसन्न-मन्द-हासिनी, सु-भक्त-वृन्द-वन्दिता समस्त-विघ्न-नाशिनी। प्रलय-वह्नि-रञ्जिता महानिभय-दायिनी, जयतु जयतु पार्वती सदा शिवा भवानी  ||४|| जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी, विलोम-शक्ति-रूपिणी कराल-खड्ग-धारिणी। धगद्-धगद्-धगज्-ज्वलत्-ललाट-पट्ट-पावके, किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिं प्रतिक्षणं मम  ||५|| महा-विचित्र-नृत्त-नाद-डम्ब...

Shree mahakal tandav stuti

_ श्री महाकाल तांडव स्तुति  सदाशिव शंकर महेश्वर महेश, परमेश्वर त्रिलोचन त्रयंबक त्रिनेत्र। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, भव-भय हरन भोलेनाथ, जय जय शिव शंकराय॥ प्रचंड-तांडव-नृत्य-रत, दिगंबर-विश्वरूपम्, शून्य-हृदय-निवासी, पूर्ण-ब्रह्म-अनुपमम्। अनादि-अनंत-कालचक्र-अधिपति, महादेव-महंतम्, क्षण-भंगुर-लीलाधारी, विभु-अविनाशी-अनंतम्॥ जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी, शीश-शशांक-धवल-दीप्ति, अमृत-रस-झरी। व्याल-कराल-माल-कंठ, भस्म-विलेपन-धारी, वैराग्य-पुंज-महायोगी, त्रिपुर-अरि-विनाशकारी॥ त्रिशूल-धारिणी-शक्ति, न्याय-वज्र-प्रहारम्, डमरू-नाद-गुंजित-ब्रह्मांड, सृजन-स्वर-सारम्। महानाश-कुक्षि-स्थित, नूतन-सृष्टि-विधानम्, रुद्र-भीषण-संहार, शिव-सौम्य-निर्माणम्॥ काल-काल-महाकाल, काल-जयी-अनामी, चराचर-जगत-रक्षक, विश्वेश्वर-स्वामी। करुणा-पारावार-शंभू, तारन-तरन-हारी, शरण्य-चरण-कमल-अर्पित, जय-जय-पुरारी॥ ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, हर हर महादेव, जय शिव शंकराय॥ ~ बाल कृष्ण मिश्रा, नई दिल्ली |

Love Shayari -1

 _  लव शायरी – 1 मुझ पर मुकदमा तू दायर कर दे तू अल्फ़ाज़ बन और मुझे शायर कर दे तेरे पैरों की मैं पायल बनके छनकूँ हर वक्त तू अपने नैनों से मुझे कुछ इस तरह घायल कर दे ~Adarsh dixit

Shiv Shakti

_ ॥ शिव-शक्ति संकल्प ॥ शिवालयों से शंखनाद हुआ,  गूंजा यह संदेश, हर नारी में दुर्गा जागे,  हर पुरुष शिव रूप बन जाए। हर थिरकन में सृष्टि की लय, साँसों में ओमकार समाए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। सृष्टि का हर कण है पावन,  शक्ति का हर रूप अनमोल, नारी जब सँवारे घर-आँगन,  और रण में भरती हुँकार। दुर्गा बन संहारे दानव,  काली बन मिटाए अंधकार, उसकी ममता में विष्णु बसें,  संहार में बसा महेश का सार। ब्रह्मा-विष्णु-महेश की शक्ति  हर थिरकन में सृष्टि की लय हर नारी में दुर्गा जागे,  हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पुरुष जब ध्यान में लीन हो,  जटा में गंग बहे अविरल, डमरू की थाप पर नाचता,  काल भी बन जाए शांत और सरल। मिट जाए असुरत्व जगत से, सतयुग सा उजियारा आए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पार्वती संग प्रेम है उसका,  अर्धनारीश्वर रूप महान, हर पुरुष में वही शिवत्व है,  जो त्याग और तप का है ज्ञान। ~ बाल कृष्ण मिश्रा, नई दिल्ली |

Sannata

_  विरह का सन्नाटा सूरज छुपा धुँध के पीछे, आँखों में ठहरा आसमान। इस अकेलेपन की रात में, दिल ढूँढ रहा तेरे निशाँ। शहर सो गया, नींद के आगोश में, मेरा जहाँ बस तेरी यादों में सिमटा। चीख़ रहा अंदर सन्नाटा, बाहर का मौसम बदला। हर साँस में बस तेरी खुशबू, हर धड़कन पे तेरा पहरा। सन्नाटों में तेरा साया, नींद के आगोश में, शहर समाया ।। धुंधले हुए हैं रास्ते सारे, कैसे ढूँढूँ मैं अपनी डगर? खो गए हैं सारे सहारे, कहाँ ले जाएगा यह सफ़र? ख़ामोशी ने शोर मचाया, दिल ने फिर खुद से की उलझन। टूटे सपनों की राख तले, दबी हुई है मेरी चुभन। क्यों थम न जाता ये जीवन, थक-सा गया हर एक क्षण। चाँद भी आज बादलों का, ओढ़कर आया है कफ़न। ~ बाल कृष्ण मिश्रा,    नई दिल्ली 

Haan Tum

 _  हाँ तुम !   मैंने चाहा है तुमको  मेरी चाहतों में तुम I    गुजरे कल में तुम  उगते सूरज में तुम I    बहती हवाओं में तुम  बरसते बादलों में तुम I    खिलते फूलों में तुम  ढलती शामों में तुम I हाँ तुम ! मन की सुंदरता  तन का सुंदर रूप I लब तेरे मधुशाला  हर अंग पुष्प की माला I स्वप्न की परी  तुम  हो यौवन रस का अमृत  प्याला I हाँ तुम ! तुम जीवन ज्योति  तुम करुणा तुम भक्ति   तुम ही मेरा बंधन I मेरा इश्क तुम   मेरी जान तुम  मेरा हर लम्हा तुमसे  तुम ही मेरा दर्पण I हाँ तुम ! बेचैन दिल तन्हा मन  तस्वीर तेरी चूमते नयन I मिलकर तुमसे  लिपटूंँ मैं ऐसे  जैसे चंदन से लिपटे भुजंग I मेरा ख्वाब मेरी हकीकत  मेरी चाहत मेरा जूनू  हाँ तुम !                   -बाल कृष्ण मिश्रा

Dansh le jo tu mujhe

_   दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए ! यह कविता भीतर के सूनापन, अधूरेपन और गहरी मोहब्बत की उस कसक को व्यक्त करती है, जो यादों और चाहत के बीच इंसान को बेचैन भी करती है और सुकून भी देती है। भाव इतने गहरे हैं कि हर पंक्ति दिल की धड़कनों को छूती है। 💔 दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए 💔 बीते लम्हों का सूनापन तेरी यादों का महकता चंदन आंखें में थमी तेरी परछाई, रोशनी बनकर बूंदों में घुल जाए । दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए | कहां मुमकिन है मोहब्बत को लफ्ज़ों में बयां कर पाना । आसान नहीं भुला, यादें सुकून की नींद में सो जाना । ज़िस्म से रूह तलक, बस सुकून छा जाए । दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए | जीवन के पावन ‘निर्झर’ को, तुम यूँ ही बह जाने दो । एक पल, बस एक पल, नीले अँधेरे में गुम हो जाने दो । तारों की चादर ओढ़, चाँद की रोशनी में खो जाऊं । तेरी मोहब्बत की खुशबू में, खुद को फिर से पा जाऊं । ज़िस्म से रूह तलक, बस सुकून छा जाए । दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए | तेरे बिना सारा जहाँ, सूना सा लगता है, जैसे एक सिसकी.… जैसे एक सिसकी । ये कैसा अधूरापन ? ये कैसा सूनापन ? शायद यही है इश्क...

Jindagi

 _   आसान नही होती लड़को की जिंदगी अपने अंदर कितना दर्द छुपा कर रखते है. फिर भी कभी किसी से कुछ कहते नही है. हमने तो यूं ही उन्हे पत्थर समझ लिया।  ना जाने सबके लिए क्या कुछ नही किया।।  जितना हम सोचते उतनी आसान नहीं होती लड़को की जिंदगी उनके कंधो पर बचपन से डाल दी जाती है जिम्मेदारी।  पता नहीं कहाँ से आ जाती इनमे यह समझदारी।।  सब की ख्वाइश इनको करनी होती है पूरी।  क्योंकि इनके लिए वही है सबसे जरूरी।।  जितना हम सोचते उतनी आसान नहीं होती लड़को की जिंदगी मुश्किल है, इनकी तरह हर हाल मे शांत रहना।  अपने आँसुओ को आँखों मे ही रहने देना।।  फिर भी कभी किसी से कुछ न कहना।  इनकी आदत है यह सब कुछ सहना।।  जितना हम सोचते उतनी आसान नहीं होती लड़को की जिंदगी दिल मे हर दर्द को छुपाया है इन्होंने।  हर पल सबको हंसाया है इन्होंने।।  पता नही कितने दर्द दफना दिये। चेहरे पर हमारी मुस्कराहट के लिए।।  जितना हम सोचते उतनी आसान नहीं होती लड़को की जिंदगी लड़कियों के जाने पर तो जमाना रोता है।  इनके जाने से परिवार चैन की नींद सोता है...

Naree Shakti

 _  नारी  शक्ति  नारी  तू  शक्ति  है ,  श्रद्धा  सुमन  भक्ति  है  तू  गौरी  ,  तू  लक्ष्मी  ,  तू  सरस्वती  है || तू करुणा है,  तू ममता है,  तू जननी है,  तू माया है तू शक्तिस्वरुपिणी दुर्गा,  सत्यस्वरुपिणी राधा है || तू  भाव है, तू भावना है,  तू लज्जा है,  तू सज्जा है तू नंदिनी, तू कामिनी, तू सद्गुण वैभव शालिनी  है || तू  इत्र  है ,  तू  मित्र  है ,  तू  चित्र  है ,  तू  चरित्र  है तू  दृष्टि , तू  चेतना , तू  सृष्टि ,  तू  बंदना  है || मीरा  की  भक्ति  तुझमें ,  मां  अहिल्या  का  धैर्य  पद्मावती  सी  साहस  तुम  में,  लक्ष्मीबाई का शौर्य  तेरे  ज्ञान  से  है  जीवन  तेरे  कर्मो  से  है  पहचान ऋृणी रहेगी ये धरती तू है  हाड़ी  रानी  का बलिदा...

Tanha

_ मैं बेचारा तन्हा अकेला  मैं बेचारा तन्हा अकेला भीगी राहों पर ढूँढ रहा, खुद को, कहीं | सड़कें भीगीं, शहर धुंधला, आसमान में घना कोहरा | भीगे आँखों से छलके यादों की धार, हर बूँद में गूँजे तेरा प्यार। शहर की भीड़ में, मैं खुद से पूछता, अपनी परछाई से ही अब मैं रूठता। पत्थरों में चमक, पर दिल में अँधेरा, टूटे सपनों सा लगता जीवन | खोया है कुछ, या पाया सवेरा? मैं मुस्कुराता नहीं मगर, हार भी मानता नहीं | सपनों की राख से, गढ़ता कोई सितारा।  ~ बाल कृष्ण मिश्रा Address: Bal Krishna Mishra          Flat No. 253, Ground Floor, Shri Krishna Apartment, J-2, Sector: 16, Rohini: 110089, New Delhi.          

मातृभूमि

  _ मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम यह कविता मातृभूमि के प्रति गहरी श्रद्धा, प्रेम और गर्व को व्यक्त करती है। कवि बाल कृष्ण मिश्रा ने देश की संस्कृति, त्याग और पावन धरा का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया है। उगता सूरज तिलक लगाता उज्जवल चंद्र किरण की वर्षा , नतमस्तक हूँ तेरे चरणों में तेरे चरणों में चारों धाम | मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || तेरी माटी शीतल चंदन , जिसमें खेले खुद रघुनन्दन । जिसमें कान्हा ने जन्म लिया , कभी खाई , कभी लेप किया । सीता की मर्यादा यहाँ , यहाँ मीरा का प्रेम | मन के दर्पण का तू दर्शन तेरे आँचल में संस्कृति का मान। मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || कल कल करती नदियां अपनी संगीत सुनाए। चू चू करती चिड़िया अपनी गीत सुनाए। मातृभूमि की पावन धरा , हर हृदय में प्रेम संजोए काशी विश्वनाथ की आरती, हर मन में दीप जलाए | आध्यात्म की गहराई यहाँ और विज्ञान की उड़ान | मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || दिव्य अलौकिक अजर अमर कंकर भी बन जाता यहाँ शंकर | बलिदानों की गाथा तू , तू वीरों की पहचान | जय-जय माँ भारती, जय यह पवित्र धरा महान मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || ~ बाल कृष्ण मिश्रा Addres...

Manavata

 _  मानवता 🙏🙏जय माँ सरस्वति🙏🙏 “यह कविता ‘मानवता’ हमारे समाज में बढ़ती ठिठुरन और दया-भाव के अभाव को व्यक्त करती है। खुशबू पांडे त्रिपाठी द्वारा लिखित यह हिंदी कविता विशेष रूप से शीत, कोहरा तथा मानवीय संवेदनाओं पर केंद्रित है।” ठिठुर रहा है सब, वन उपवन ठिठुरा रहा जग सारा । ठिठुर गई हैं सुन्दर कलियाँ, है ठिठुरा हुआ नजारा ।। ठिठुर गई है धरती अम्बर है, ठिठुरा हुआ उजियारा । ठिठुर गई हैं बहती नदियाँ, ठिठुरा हुआ किनारा ।। ठिठुर न ज़ाए पुलकित मानव दया का ह्रदय तुम्हारा । ठिठुर गई हैं गीली रातें हैं, ठिठुरा हुआ दिन बेचारा ।। टपक रहै हैं‌ ओश ऐसे,टपके जैसे मोती। घासों के झुरमुट में गुंथे गुंथी‌‌ हो‌ जैसे‌ चोटी।। धूल लपेटे वृक्ष खड़े हैं, लिपटी हों जैसे धोती। कोहरे की मुस्कान खिली है, नज़र बड़ी खोटी।। सूरज की किरणों को देखकर शर्दी खूब बड़ाए। रातों को यह ठंडे कोहरे फूले नहीं समाए।। ठिठुर रही है ,अब मानवता, प्रेम जगह न पाए। रोश ,क्रोध और निन्दा नफरत दिन प्रति पैर बड़ाए।। ~ खुशबु पांडे त्रिपाठी

शेर भी जानता था

 _ शेर भी जानता था शाम का वक्त था। श्याम जैसे ही दफ्तर से लौटकर घर आया, पूरे घर में रौनक सी फैल गई। बच्चे, बूढ़े, औरतें – सब उसके पास आकर दिनभर की बातें साझा करने लगे। हर दिन की तरह आज भी सबसे अंत में उसका वफादार कुत्ता “शेर” आया। वह चुपचाप श्याम को देखता, सर झुकाकर अपनी खुशी जाहिर करता और फिर पास में बैठ जाता। धीरे-धीरे श्याम की जिंदगी एक ढर्रे पर चलने लगी थी। श्याम की पत्नी विमला, तेज-तर्रार और साफ बोलने वाली महिला थी। अक्सर वह आंगन में खड़ी होकर पड़ोसियों से बातें करती और बीच-बीच में श्याम को ताना भी मारती, "श्याम! आकर खाना क्यों नहीं खा लेते? मैं बाकी औरतों की तरह नहीं हूं जो बार-बार खाना गरम करके दूं।" लेकिन श्याम जानता था कि विमला जैसी दिखती है, वैसी नहीं है। उसके दिल में प्यार भी था, बस तरीका कड़वा था। कुछ दिन पहले विमला के भाई की शादी थी, लेकिन श्याम आर्थिक तंगी के कारण विमला को नए कपड़े नहीं दिला सका था। यही बात विमला के गुस्से की वजह बन गई थी। श्याम पूरे घर का एकमात्र कमाने वाला था। उसकी तनख्वाह से ही सब चलता था। वह दिन-रात मेहनत करता ताकि अपने परिवार की जरूरतें पूर...

Faasle

_ फासले  यूँ फासले जो तेरे मेरे दरमियाँ आने लगे, हमें लगता है, तुम कहीं और दिल लगाने लगे। अपनी थकावट सुना कर अब जो तुम, हमें बहलाकर, हमें ही सुलाने लगे। हम समझ गए हैं — कि "जान", "जानू", "डार्लिंग" कहकर, तुम अब किसी और को बुलाने लगे।  ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)

Pagal

_ पागल हो क्या तुम? क्यों कोई तुमको आँखों में बसा ले काजल हो क्या तुम? शहर की गलियों में गाँव वाली मोहब्बत ढूंढ रही हो, पागल हो क्या तुम? अब कहाँ कोई छत पर आकर तोहफ़े में दुपट्टा दिया करते हैं, अब तो व्हाट्सऐप चैट पर बिना कपड़ों के फोटो मंगा लिया करते हैं। बिना देखे मोहब्बत करने का दौर गुज़रे बरसों हुआ करते हैं, देखो सूरज ढलने को आया, चलो अपने-अपने घर चलते हैं। ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)

Ghar se Nikli

- घर से निकली घर से निकली तब जा कर ये बात समझ आई मुझे, कि कहीं खा न जाए महफ़िल की तन्हाई मुझे, जो लगती थी अक्सर। अपनों की बातें रुसवाई मुझे, लड़खड़ाने पर क़दम मेरे सभाली उनकी ही परछाईं मुझे। पहले नादान थे जो, समझ न पाते थे रिश्तों को, आज जो अकेले हुए तो समझ आई उनकी गहराई मुझे। जो न आती मैं घर वापस तो मार देती लोगों की बेवफ़ाई मुझे | ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)