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मार्च, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Bees rupye ke ek paav

  बीस रूपये के एक पाव   (कहानी)  पिताजी को बागवानी का बेहद शौक था , और उन्होंने एक बार खेत की मेड़ पर शहतूत के कुछ पौधे लगाए , अब उनकी प्रतिदिन की दिनचर्या हो गई की समय निकालकर रोज सुबह खेत पर जाते और नौकर होते हुऐ भी उन शहतूत के पौधो मे खुद पानी देते, उनकी निदाई-गुडाई करते , आसपास की खरपतवार साफ करते, उनकी मेहनत रंग लाई और कुछ महीनों की मेहनत से वे पौधे वृक्ष बनकर लहराने लगे ,गर्मियों मे उनमे फल आना भी शुरू हो गए, पिताजी खेत के आसपास के बच्चो को और हर आने वाले लोंगो को आग्रह कर ताजे ,मीठे और रसीले शहतूत खिलाते , शहतूत भी इतने आने लगे की उन्हें बेचा भी जा सकता था ,परन्तु उन्होने कभी उन्हे बेचने की इच्छा नहीं रखी ,वे रोज उनके फलों को खिलाकर ही खुश होते थे , परिस्थितियां कुछ ऐसी बनी की वह खेत मजबूरी के कारण बेचना पड़ा, पिताजी अब इस दुनिया मे नही है पर आज भी पिताजी के लगाऐ वे शहतूत पेड उनकी याद दिलाते है , वही पेड़, वही रसीले मीठे फल ,सब कुछ वही... बस ! फर्क है तो इतना ही की अब हमे पिताजी के लगाऐ इन पेड़ो के फल बीस रूपये पाव मे खरीदकर खाना पड़ते है !! हमसे जुडन...

Jindigi tere naam

  जिंदगी तेरे नाम (कविता)  1.  जिंदगी के दो पल तेरे नाम कर दू ये       जिंदगी तूने बहुत लोगों को रुला डाला      और कितना रुलाएगा । 2.  सुबह होते ही इंसान अपने घर से बाहर       कमाने निकलता है काम ना मिले       तो वहीं इंसान कई ठोकरें खाकर घर लौटता है।       क्या यही जिंदगी है ? 3. किसी ने मुझसे पूछा जिंदगी आखिर है     क्या ?मै बोलती ही क्या मै     तो यही बोली जिंदगी कोई खेल मजाक नहीं   जिसे जब मन चाहा मजाक बना लिया    “जिंदगी तो वह है जिसे अनुभव के साथ जिया जाए” 4.  जिंदगी के हर मोड़ पर कही सुख है तो      कहीं दुख अगर इंसान के जीवन में दुख आ      जाए तो कई लोग यही बोलते है मुझे अपनी       जिंदगी से नफ़रत है । 5. जिंदगी से नफ़रत करने वाले इंसानों      जिंदगी जी कर तो देखो उन बुलंदियों को       छू कर तो देखो!  6. छोड़ दो नकारात्मक सोचना ...

Kitabein

 किताबें    (हाइकु)    1.        ज्ञान बढ़ाती       किताबों की दुनियाँ         पढ़ो इनको ।। 2.        जिनके पास        किताबों का खजाना            वे धनवान ।। 3.         देश हमारा          पूजा करते लोग         किताबों की भी...? हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Sanjay Daga EDUCATION :b.com ADDRESS :देवी अहिल्या कालोनी हातोद जिला इन्दौर मध्यप्रदेश POST:अध्यक्ष-पत्रलेखक मंच हातोद  Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क क...

Holi

  होली   (गीत)                      राधा ब्रज में आई है,               श्याम संग होली खेलूँगी। कृष्ण रंग गुलाल खेलूँगी,                  प्रेम रंग होली खेलूँगी।  प्रीत के रंग में कान्हा को रंग दिया, श्याम के रंग में राधा को रंग लिया,  प्रीत की बंशी बजाऊंगी, श्याम- - ‐' रंग पिचकारी भर कृष्णा पे डाला, गइयन संग ग्वाल बालन पे डाला, चेहरे पीले कर दूंगी, श्याम- - - -' श्याम हँसे संग ब्रज झूमे है, यमुना तीरे रस रंग जमे है, कण-कण रंग भर दूँगी, श्याम- - - -' मुरली अधर धर कृष्ण बजाए, होली रसिया मुरलिया गाए, बंशी वश में कर लूँगी, श्याम- - - -' कान्हा ने रंग से अंग-अंग रंग दिया, हाथ पकड़ मेरा चेहरा मल दिया, गालियाँ मन भर के दूँगी, श्याम----' राधा कृष्ण की जोड़ी अपार है, मोहिनी मूरत सुख अपरम्पार है, जीवन रंग "श्री" दूंगी, श्याम- - - - '                    हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ ...

Holi Geet

 होली गीत (गीत)  आये लेके पिचकारी गोरी चुनरी सँभाल  कर देंगे हरी पीली नीली और लाल  हम रंग देंगे तेरे अंग सब खेलेंगे होली बड़ी ही गजब रंगने दे घूँघट यूँ रुख पे न डाल।  होली के हुणदंग में रच भी जा आ खुल के होली मेरे सँग मना छोड़ दे शर्म होने दे अब तो बबाल।  छाँनेंगे भंग और भँगडा करेंगे  हम आज तो न किसी से डरेंगे खुल कर के नाँचेंगे दे दे के ताल।  गुस्साओ न जान शरमाओ न होली की मस्ती में आ जाओ न होली का मतलब ही होता धमाल।  है *राज* रंगीला सारा समां बौराये है अब जमीं आसमां बरसे है रंग देखो उड़ता गुलाल।  हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Raj Shukla(Gazalraj)  EDUCATION :B.A ADDRESS : Auraiya, U. P Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो U...

Vishwa jal diwas

विश्व जल दिवस    (हाइकु)

Tera Bharosa

तेरा भरोसा  (कविता)  जब तेरा भरोसा मिला मुझे, जीवन मेरा आसान हुआ। मुझे इतना प्यार दिया तुमने, मुझे स्वयं मुझी पर मान हुआ।। तुम मेरा भरोसा मैं तेरा, बन्धन अपना ये निराला है।  जब जब विश्वास डिगा मेरा , मुझे तुमने सजन संभाला है।। तुम प्रेम मेरा, अभिमान मेरा , तुम ‌मेरा भरोसा हो प्रियतम। जिसकी उपमा संभव ही नहीं, वो प्रेम स्नेह दिया अनुपम।। मेराआज तुम्हीं कल भी हो तुम ‌संसार तुम्हीं से है मेरा तुम बिन मैं शून्य सरीखी हूं आधार तुम्हीं से है मेरा एक तेरे भरोसे पे साजन, मैं सातों भंवर लांघ जाऊं, तू एक इशारा जो कर दें , चुपचाप आग‌में जल जाऊं।। बस हाथ में हाथ रहे तेरा, दुनिया के खजाने सब‌ झूठे। नागेश्वर से विनती है मेरी ,कभी साथ तुम्हारा ना छूटे।। हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Mukta Sharma EDUCATION : M. A, B. Ed ADDRESS : Coral springs colony meerut Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अ...

Gouraiya

  गौरैया (कविता)  प्यारी  गौरैया,  क्यूं  तुमने ‌आना  छोड़  दिया। चीं चीं चीं ,करके क्यूं हमें जगाना  छोड़ दिया।। बचपन तेरे संग कटा, और ‌बीती संग जवानी। हुई अचानक से तू गायब ,कितनी हुई हैरानी। तुझको कितना ढूंढा पर तू नज़र कहीं ना आई। चीं  चीं नहीं सुनाई पड़ती वो जानी पहचानी काहे मेरे घर में आना  जाना  छोड़ ‌दिया।। प्यारी गौरैया क्यूं तुमने......... हमने देखा था तू‌ तिनका   तिनका लाती थी।  बड़े जतन से फिर ,अपना घोंसला बनाती थी। देखा करते हम तेरे,   बच्चों के पंख निकलते। बड़े प्यार से जब तू  चुग्गा, उन्हें खिलाती थी। पर अब मेरे का ‌हाय,  ठिकाना छोड़ दिया।। प्यारी गौरैया क्यूं तुमने.......... तेरे घोंसले पर, एक नजर हमारी रहती थी। हम बिल्ली से भी तेरे ‌बच्चों‌ को‌ बचाते थे । तेरे लिए बचा लेते थे ,अपना एक निवाला। बड़े प्यार से ,पास बुला कर ,तुझे खिलाते थे। कहां पे जा बैठी है ,क्यूं ये दाना छोड़ दिया प्यारी गौरैया क्यूं तुमने.......... आजा फिर से तेरे लिए,हम पेड़ लगाएंगे। हरा भरा रक्खें ,धरत...

Holi

होली (कविता  )  रंगों से यूं दूनियाँ निखरी रंगो से ही खुशियाँ बिखरी आसमान से धरती पर  अपनी छटा लहराते है  रंग जीवन के हर पहलू पर अपना बखान सुनाते है। प्रकृति में सौगात  रंगो की  तीज त्यौहार पर बात  रंगो की  व्यवहार में दिखती झलक रंगो की  चित्रों में बसी गहराई  रंगो की  सोने की चमक बनी शोभा  रंगो की  श्रृंगार में डूबी पहचान  रंगो की  मूल्य नहीं कोई रंगो का रिश्ते नाते और संबंधो का प्यार के रंग में रंगकर ये अनमोल हो जातें है  हर चेहरे पर अन्दर का ये भाव बताते हैं।   हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet सोनू रैबारी  EDUCATION :Graduate ADDRESS : Ambeshwar colony, Kaithal, Haryana Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित...

Bhool gye

भूल गए (कविता)  भूल गए आज उनको सब है ,  जिन्होंने देश आजाद करवाया ।  इंकलाब, जय हिंद का नारा ,  अंग्रेजों के कानों तक पहुंचाया ।  जान अपनी कुरबान कर गए ,  हमें आजादी का अधिकार दिलाया उमर ना देखी, दुख सब सह के  अपने तिरंगे को ऊंचा उठाया  ।  शहीदी दिवस पर फूलों की माला से हमने अपना फर्ज निभाया  क्या थे उनके सपने, क्या पद चिन्ह उनको हमने दाग लगाया।  सोचते होंगे वह ऊपर बैठे  जीवन खोकर क्या हमने पाया।  क्या ऐसे भारत देश का   हमने था सपना सजाया।  हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Anita Mishra EDUCATION : ADDRESS : H. No. 105 Mohalla Bhallian V.P.O.Hariana Distt. Hoshiarpur Punjab 144208 Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित ...

Sabji wala

. सब्जीवाला (लघुकथा) दस-बारह साल का एक बालक सड़क किनारे टोकनियों मे कुछ सब्जियां लेकर आवाज लगा-लगा कर सब्जियां बेच रहा था, मैंने पास से गुजरते हुऐ रूककर पूछा -क्यों भाई पालक है क्या...?उसने जो जवाब दिया ,वह बहुत कुछ मन को झझकोर गया, उसने कहा पालक होता तो मुझे यहाँ सड़क पर सब्जियां नहीं बेचना पड़ती ! हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Sanjay Daga EDUCATION : B. Com ADDRESS : देवी अहिल्या कालोनी हातोद जिला इन्दौर मध्यप्रदेश POST:   अध्यक्ष-पत्रलेखक मंच हातोद Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Rango ka Tyohaar

.  रंगो का  त्यौहार                दिल में छाई  है उमंग ।              हम मिलके संग संग।               मचाएंगे हुड़दंग।               हम सभी खेलेंगे रंग । आया है फाग। हम गाएगें राग । द्वेष जाएगा भाग।  प्रेम जाएगा जाग।              गुलाल उडे़ चहुँओर ।              मच रहा है शोर ।               मन मे नाचे है मोर |               आई है नई भोर | मस्ती की पी लो भंग।  मीठी गुझिया के संग।  पिचकारी में हो हर रंग।  प्रेम में भीगे अन्तरंग।    हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Vartika Dubey EDUCATION :M.A, B. Ed from Allahabad university ADDRESS : Phulpur, Prayaagraj, U. P Publisher Om Tripathi Contact No...

Gajal

गज़ल  देखकर आपको हम मनाते रहे,  रात भर ख्वाब यूं हम सजाते रहे। तुम खफा हो गए पर वजह ना मिली, सोचकर यूं तुम्हें दिल जलाते रहे। हैं सजर झूमते छा गईं बदलियाँ, ये फिजा देख हम गुनगुनाते रहे। याद से खुशनुमा ये महकती हवा,    साथ मिल आज हम भी बहकते रहे। आपकी छाँव बंधन रही है बहुत,  तोड़कर कब इसे छटपटाते रहे। ख्वाहिशें चाह दीदार की रात दिन, टूटकर याद में “श्री" बिखरते रहे।         हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Sarita Shrivastav (Shri)  EDUCATION : ADDRESS :Khosla vihar colony Dhoulpur , Rajasthan Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

Ek kavita

. एक कविता  एक कविता कहने में जग ने, क्या क्या कह डाला रसवंती‌ रसधार ‌कहीं पर, बनी‌ ये‌‌ मधुशाला। चन्द ने एक कविता के सहारे, कह दी सारी रासो खुसरो ने कविता में पूछा दुखड़ा कहूं मैं कासों।  रूप पदमिनी का विरह का गीत भी कह डाला रसवंती ‌रसधार‌ कहीं............ कबिरा की साखी में देखा,इसका रूप अनोखा। सूर ने दिखलाया ,भक्ति का रूप ‌बड़ा ही चोखा । तुलसी ने कविता में, चरित राम का कह डाला।। रसवंती ‌रसधार‌ कहीं............ , रहिमन के दोहों में देखा ,इसका रूप निराला। कविता ने देखा ,भूषण का‌‌ रौद्र रूप मतवाला।। और बिहारी ने गागर में सागर भर डाला।। रसवंती ‌रसधार‌ कहीं.......... ‌ भारतेन्दु से लेकर दिनकर तक के‌, नाम निराले।  ‌ गुप्त के बाद पधारे ,देवी, पंत, ‌प्रसाद निराले । श्रद्धा के दुःख को , इसने आंसू से धो ‌ डाला ।। रसवंती ‌रसधार‌ कहीं............ जग में कितने कवि हो चुके, और कितनी कविताएं। कितना कहा जा चुका ,फिर भी कुछ ना ‌कुछ‌ रह‌‌ जाए। इसने शब्दों से कितनों का दर्द मिटा डाला ।।। रसवंती ‌रसधार‌ कहीं...........…. एक कविता कहने में जग ने क्या‌ क्या कह‌‌ ...

Charo or dikhe jo

  चारों ओर दिखे  चारों ओर दिखे जो मुझे हरियाली । कुछ अलग अलग सा नजर आऐ मुझे। मैं कहूँ यह कैसा बदलाव है। छाही हैं जहाँ घटा हरियाली की।  लो आ गया वंसन्त आ गया वंसन्त। पक्षियों की प्रभात की ध्वनि से । मन प्रसन्न हो उठता है। आजकल का मौसम बडा़ सुहाना। लगता है जैसे खुशी से झूम उठे। कोयल की कू - कू कर मन खुशी से भर उठता है। लो आ गया वंसन्त आ गया वंसन्त।  खिले है जहाँ पीत ,रक्त ,हरित पुष्प। देखकर मन उल्लास से भर उठता है‌। मैं अपने मन से कह उठता हूँ।   फाल्गुन क्यों अपने में ऐसा महत्व रखता है। यह सोच में पड़ जाता हू़ँ। वंसन्त क्यों अपने में ऐसी सुन्दरता रखता है।  लो आ गया वंसन्त आ गया वंसन्त। वंसन्त का नजारा देखकर ,मन प्रसन्न हो उठता है। वंसन्त आया वंसन्त आया कहां करता हूँ मैं। वंसन्त की चटकती धूप से। मन ही मन उदास हो उठता हूँ। याद कर बचपन की उन यादों को। जिनमें कभी प्रकृति के साथ बड़े ही आनंदित रहते थे। इन यादों को याद कर कभी उदास तो कभी खुश हो उठता हूँ। लो आ गया वंसन्त आ गया वंसन्त। देख उन नन्हें पुष्पों को । जो त्याग कर अपनी माँ के बिना भी प्रसन्नच...

Saraswati Vandana

सरस्वती वंदना   ( गीत )  हे भारती माँ  सिद्धार्थी माँ , तू है जगत की परमार्थी माँ । विद्या नहीं है अज्ञानी हूँ मै, झोली से बिल्कुल खाली हूँ मैं, कोई नहीं है मेरा सारथी माँ, हे भारती-----' तेरे ही दर पर मैं आकर खड़ा हूँ, तेरी कृपा का मैं याचक बड़ा हूँ, चौखट का तेरी शिक्षार्थी माँ, हे भारती-----‘ ज्ञान सुधा की तू खान है माँ, वेदों में तेरा ही बखान है मा, मैं भी हूँ तेरा दया प्रार्थी माँ, हे भारती------' तेरी महिमा किसी ने न जानी, तेरी कृपा बिन पंडित न ज्ञानी, मुझको बना“श्री"विद्यार्थी माँ, हे भारती-----'    हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Sarita Shrivastav (Shree)  EDUCATION : ADDRESS :Khosla Vihar colony Dhoulpur (Rajasthan)  Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कवित...

Naye jamane ke badalte rishte

नये जमाने के बदलते रिश्ते       ( गीत )  पास में हैं पर पास नहीं है  साथ में हैं लेकिन साथ नहीं है  कैसा ये आया अब नया दौर  अपने तो हैं पर अपने नहीं है । हुए पराए अपने ,अपने पराये हो गये  प्रेम भी अब तो नफरत सी हो गये चलने लगे जब घर दूसरो से  ये समझो कि घर अब अदालत हो गये । जिसे समझा अपना वही दर्द दे गये  उम्रभर साथ क्या सारे मर्ज दे गये जमाने को हमने बहुत ही टटोला  जिसे समझा सच वही झूठे निकल गये । अधेरो में रहना अब तो पसंद है  दीपक की लौ से भी अब तो जलन है  उजालो में दिखता साफ चेहरा नजर  कम से कम अंधेरो में सारे रंग भंग है । देखा है हमने जमाना कितना झूंठा है  जो मीठा बोलता वह कितना जहरीला है  मीठी मीठी बातों में फसते गये हम  उलझे अभी तक सुलझे नहीं हम। हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Geeta Patel EDUCATION :Asawalpur, Pindra, Varanasi (U.P)            ADDRESS :असवालपुर पिन्डरा वाराणसी  Publisher Om Tripathi Contact No. 9...

Kavita

. कविता हदय का उदगार है कविता । रस की फूहार है कविता ।  भावों की अभिव्यक्ति है कविता |  भाषा की व्यक्ति है कविता ।  प्रेम और प्यार है कविता।  नारी का श्रृंगार है कविता ।  आस्था और भक्ति है कविता।  पूजा की शक्ति है कविता |  देश प्रेम की भावना कविता |  जीवन की उद्भावना है कविता।  माता की लोरी है कविता।  गाँव की गोरी है कविता | राग और विशेष है कविता।  अभी जीवन शेष है कविता। जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि।  कविता से हमें मिले, प्रेरणा की छवि।  हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet Vartika Dubey EDUCATION :M.A, B. Ed from Allahabad university ADDRESS :Phulpur, Prayaagraj,( U. P)  Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व...

Aabhas

   आभास रात के सपने और दिन के काम में  कुछ हुआ यूं अहसास  तेरे जाने और फिर से आने का  कुछ हुआ यूं "आभास",  विपरीत समय में ये मालूम हुआ  भावनाओं का मटका चकना-चूर हुआ  जैसे टूटा सा यूं विश्वास था  ये कुछ नही !सिर्फ एक "आभास" था ना जाने कब ये प्रीत लगी  तेरे होने की यूं उम्मीद जगी  भनक सी होने लगी यूं बात-बात में  सब खुशियां देखीं "आभास" में। हमसे जुडने के लिए👉 यहाँ click करें 👈 Poet  सोनू रैबारी  EDUCATION : Graduate ADDRESS : Ambeshwar colony, Kaithal, Haryana Publisher Om Tripathi Contact No. 9302115955 आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं। Social Media Manager Shourya Paroha अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।