. एक कविता
एक कविता कहने में जग ने, क्या क्या कह डाला
रसवंती रसधार कहीं पर, बनी ये मधुशाला।
चन्द ने एक कविता के सहारे, कह दी सारी रासो
खुसरो ने कविता में पूछा दुखड़ा कहूं मैं कासों।
रूप पदमिनी का विरह का गीत भी कह डाला
रसवंती रसधार कहीं............
कबिरा की साखी में देखा,इसका रूप अनोखा।
सूर ने दिखलाया ,भक्ति का रूप बड़ा ही चोखा ।
तुलसी ने कविता में, चरित राम का कह डाला।।
रसवंती रसधार कहीं............ ,
रहिमन के दोहों में देखा ,इसका रूप निराला।
कविता ने देखा ,भूषण का रौद्र रूप मतवाला।।
और बिहारी ने गागर में सागर भर डाला।।
रसवंती रसधार कहीं..........
भारतेन्दु से लेकर दिनकर तक के, नाम निराले।
गुप्त के बाद पधारे ,देवी, पंत, प्रसाद निराले ।
श्रद्धा के दुःख को , इसने आंसू से धो डाला ।।
रसवंती रसधार कहीं............
जग में कितने कवि हो चुके, और कितनी कविताएं।
कितना कहा जा चुका ,फिर भी कुछ ना कुछ रह जाए।
इसने शब्दों से कितनों का दर्द मिटा डाला ।।।
रसवंती रसधार कहीं...........….
एक कविता कहने में जग ने क्या क्या कह डाल ।
रसवंती रसधार कहीं पर बनी यह मधुशाला।।
Publisher
Om Tripathi
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Shourya Paroha
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