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 गौरैया

(कविता) 

प्यारी  गौरैया,  क्यूं  तुमने ‌आना  छोड़  दिया।

चीं चीं चीं ,करके क्यूं हमें जगाना  छोड़ दिया।।


बचपन तेरे संग कटा, और ‌बीती संग जवानी।

हुई अचानक से तू गायब ,कितनी हुई हैरानी।

तुझको कितना ढूंढा पर तू नज़र कहीं ना आई।

चीं  चीं नहीं सुनाई पड़ती वो जानी पहचानी

काहे मेरे घर में आना  जाना  छोड़ ‌दिया।।

प्यारी गौरैया क्यूं तुमने.........


हमने देखा था तू‌ तिनका   तिनका लाती थी।

 बड़े जतन से फिर ,अपना घोंसला बनाती थी।

देखा करते हम तेरे,   बच्चों के पंख निकलते।

बड़े प्यार से जब तू  चुग्गा, उन्हें खिलाती थी।

पर अब मेरे का ‌हाय,  ठिकाना छोड़ दिया।।

प्यारी गौरैया क्यूं तुमने..........


तेरे घोंसले पर, एक नजर हमारी रहती थी।

हम बिल्ली से भी तेरे ‌बच्चों‌ को‌ बचाते थे ।

तेरे लिए बचा लेते थे ,अपना एक निवाला।

बड़े प्यार से ,पास बुला कर ,तुझे खिलाते थे।

कहां पे जा बैठी है ,क्यूं ये दाना छोड़ दिया

प्यारी गौरैया क्यूं तुमने..........


आजा फिर से तेरे लिए,हम पेड़ लगाएंगे।

हरा भरा रक्खें ,धरती‌ को स्वच्छ बनाएंगे।

तेरे घोंसले में बच्चों को, हम ना सताएंगे।

आजा फिर से,जीवन तेरा सुगम बनाएंगे।

क्यूं तूने बचपन की याद दिलाना छोड़ दिया।।

प्यारी गौरैया क्यूं तुमने..........


प्यारी गौरैया क्यूं तुमने आना छोड़ दिया।

चीं चीं चीं करके क्यूं हमें जगाना छोड़ दिया




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Poet

Mukta Sharma

EDUCATION :M.A. B.Ed
ADDRESS :Coral springs colony meerut



Publisher

Om Tripathi

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