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keh do ki chaand

_ कह दो की चाँद



कह दो की चाँद हमारा नही है ,
इस दुनियां से नाता गवारा नही है
  मै मर तो गई थी उस रात मगर ,
अभी उसने मुझे दफनया नही है, 
ये दिल ये जिस्म ये रूह है उसकी ,
अभी उसने मुझे भुलाया  नहीं है 
 बरिश कि बून्दे क्या कहती है  
भला ,अभी उसने मुझे कुछ सुनाया नही हैै ,
तुम ठहरो, तुम ठहरो, तुम ठहरो जरा ,
अभी उसने मुझे सीने से लगाया नही है

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Poet

 Nirmala Rawat

EDUCATION :
ADDRESS : Lucknow







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