Nyi Umang सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Nyi Umang

 

_नई उमंग




नई शाम के नया सबेरा होता है छोटी छोटी कलियों से बगिया में फूल खिलता है
दुःख जायेंगे सुख आयेंगे एक पत्थर हमको सिखाता है
बनती है प्रतिमा काट काट के मंदिर में जब लगती है फूल बरसता है प्रतिमा पर दुनियां सारी पूजती है
इसी प्रकार जीवन है निर्मल कभी सहे जेठ की तपन तो कभी सावन की फुहार
दुःख से तुम ना घबराओ जीवन है अनमोल उपहार कभी हसीं है कभी नमी और कभी मां की ममता सा प्यार
धरा पर जीवन ऐसा जीओ छाई हो बसंत की बहार

Amrita tripathi

👉हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें👈

Poet

Amrita Tripathi

अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

हमें बताएं आपको यह कविता कैसी लगी।