पिता
कविता
विचित्र मन की छवि पिता हैं !!
आसमान में रवि पिता हैं!!
मांँ हैं शीतल छांव अगर तो
धूप में जलती चिता पिता हैं!!
मांँ हैं मन का सम्मान अगर तो, जीवन का आधार पिता हैं!!
बहुत सुनी मांँ की गाथा मगर ,, जो टुटकर भी लिपट कर ना रो पाएं
वो एक ऐसा इंसान पिता हैं!!
मां हैं अगर परवाह संतान की तो,, सबसे बड़ा चौकीदार पिता हैं !!
शब्द मेरे निशब्द हैं मगर
अंतर्मन की परिभाषा में
मां अगर हैं अन्नपूर्णा घर की तो,, खेत में चलता वो हल पिता हैं !!
मांँ हैं अगर ममता की मूरत
तो,, उस मूरत का श्रृंगार पिता हैं!!
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Poet
Brijesh kawar
EDUCATION :
ADDRESS :Kota, Rajasthan
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Publisher
Om Tripathi
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Shourya Paroha
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Woow beautiful lin
जवाब देंहटाएंWoow beautiful lin
जवाब देंहटाएंSuppprb lines
हटाएंबहुत शानदार कविता शब्द चयन बहुत अच्छा है
जवाब देंहटाएंVery nice impressive
जवाब देंहटाएंबहुत खूब
जवाब देंहटाएंसुन्दर कविता my side 100%
जवाब देंहटाएंNyc
जवाब देंहटाएंSuch a wonderful lines👍👍👍
जवाब देंहटाएंBht hi gajab ji
जवाब देंहटाएंBahut hi emotions h
जवाब देंहटाएंInki kavita m , or padne k baad lagta hi nahi ki puri ho gyi h,
thodi or ...thodi or .
Go Ahead..��
Thanks
lovely lines .....best of luck for your sucesss
जवाब देंहटाएंपिता जीवन का आधार है
जवाब देंहटाएंBeautiful lines and good thinking
जवाब देंहटाएंBhut sunder .. awesome god bless u
जवाब देंहटाएंBhut sunder .. awesome god bless u
जवाब देंहटाएंWow
जवाब देंहटाएंSuper
जवाब देंहटाएंToo good
जवाब देंहटाएंSuper post
जवाब देंहटाएंNice
जवाब देंहटाएंExcellent ��
जवाब देंहटाएंबहुत ही शानदार
जवाब देंहटाएं