Pita सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Pita

पिता

कविता

विचित्र मन की छवि पिता हैं !!

आसमान में रवि पिता हैं!!

मांँ हैं शीतल छांव अगर तो 

धूप में जलती चिता पिता हैं!!

मांँ हैं मन का सम्मान अगर तो, जीवन का आधार पिता हैं!!

बहुत सुनी मांँ की गाथा मगर ,, जो टुटकर भी लिपट कर ना रो पाएं  

वो एक ऐसा इंसान पिता हैं!!

मां हैं अगर परवाह संतान की तो,, सबसे बड़ा चौकीदार पिता हैं !!

शब्द मेरे निशब्द हैं मगर 

अंतर्मन की परिभाषा में

मां अगर हैं अन्नपूर्णा घर की तो,, खेत में चलता वो हल पिता हैं !! 

मांँ हैं अगर ममता की मूरत 

तो,, उस मूरत का श्रृंगार पिता हैं!!


👉हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें👈

Poet

Brijesh kawar

EDUCATION :
ADDRESS :Kota, Rajasthan

Publisher

Om Tripathi

Contact No. 9302115955
आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं।

Social Media Manager

Shourya Paroha

अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

टिप्पणियाँ

  1. बहुत शानदार कविता शब्द चयन बहुत अच्छा है

    जवाब देंहटाएं
  2. सुन्दर कविता my side 100%

    जवाब देंहटाएं
  3. Such a wonderful lines👍👍👍

    जवाब देंहटाएं
  4. Vishal9:56 pm

    Bahut hi emotions h
    Inki kavita m , or padne k baad lagta hi nahi ki puri ho gyi h,
    thodi or ...thodi or .
    Go Ahead..��
    Thanks

    जवाब देंहटाएं
  5. बेनामी10:09 pm

    lovely lines .....best of luck for your sucesss

    जवाब देंहटाएं
  6. पिता जीवन का आधार है

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत ही शानदार

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

हमें बताएं आपको यह कविता कैसी लगी।