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Mahila divas

. महिला दिवस

आठ मार्च को हम अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हैं । जिस दिन हर क्षेत्र में नारी की उपलब्धियां व स्त्री- पुरुष समानता की चर्चा करते हैं। नारी की  उपलब्धियों  की संख्या तो अनगिनत है। कल्पना चावला की अन्तरिक्ष यात्रा से लेकर महिलाओं के लडाकू  विमान चलाने तक, पहली महिला आई. पी. एस. किरन बेदी से लेकर एक  ऑटो रिक्शा चालक की बेटी के मिस इंडिया  रनर अप बनने तक । खेल, राजनीति ,शिक्षा ,चिकित्सा ,विज्ञान हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी सफलता का परचम लहराया और अपनी योग्यता  सिद्ध की।  अब बात आती है समानता की , जहांँ पर  वो  अपने अस्तित्व बचाए रखने के लिए वो  संघर्षरत हैं।  वह नारी ही हैं जो एक पुरुष को जन्म देती हैं।  परंतु जब एक लड़की गर्भ में होती है तो पिता (पुरुष) निर्धारित करता है कि वो जन्म लेगी या नहीं।  अबोध बालिका से लेकर युवा होने तक हर जगह उसे सुरक्षा की आवश्यकता है। हर जगह वो बंधनों में जकड़ी हुई है। अपने घर से लेकर बाहर तक वो कहीं सुरक्षित नहीं है।  अपने घर वालों रिश्तेदारों पड़ोसियों व अन्य की गिद्ध दृष्टि उस पर लगी है। सभी कहते हैं 'बेटी बचाओ ' जबकि होना यह चाहिए बेटों को समझाओ नहीं तो थप्पड़ लगाओ। हमसे समाज है समाज से हम नहीं। हमें अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है। नारी से ही है सृष्टि ,समाज ,व परिवार है। 


 सोच बदलो  - व्यक्ति बदलो - समाज बदलो - देश  बदलो


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Poet

Vartika Dubey

EDUCATION :M.A, B.ed from Allahabad university
ADDRESS : Phulpur, Prayaagraj, (U. P) 



Publisher

Om Tripathi

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Dansh le jo tu mujhe

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