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पैरों में पायल

 


पैरों में पायल बंधी, 

               लगा महावर अंग।

मेहंदी ऐसे सज रही,

              मानो सजे अनंग।।

कदमताल हिरणी सदृष्य,

             गज सममंथर चाल।

 नागिन सम लहरा चले, 

          देख ठहर जाए काल।।

नयन झुके पलकें तंद्रिल,

                कंपन अधरों मध्य।

अलकों से मुक्ता झरे, 

                 गौरी स्नाता सध्य।।

सूर्योदय सम लालिमा, 

                लज्जा रक्त कपोल।

पिया मिलन की सोचकर, 

                हिय में उठी हलोल।।

क्षीण कटि उतंग उरोज,

                 अलकें पलकें स्याह।

यौवन भार हल्का करे,

             प्रेम का अमित उछाह।।

अयि ललना कछु धीर धरो, 

               कह समझाये #राज"।

लांछन कछु न लगाय दे, 

         ईर्ष्यागत कुटिल समाज।।


Written by


Rajendra Sharma




Posted by

Om Tripathi

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