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Ghar se Nikli

- घर से निकली

घर से निकली
तब जा कर ये बात समझ आई मुझे,
कि कहीं खा न जाए
महफ़िल की तन्हाई मुझे,
जो लगती थी अक्सर।

अपनों की बातें रुसवाई मुझे,
लड़खड़ाने पर क़दम
मेरे सभाली उनकी
ही परछाईं मुझे।

पहले नादान थे जो,
समझ न पाते थे रिश्तों को,
आज जो अकेले हुए तो
समझ आई उनकी गहराई मुझे।

जो न आती मैं घर वापस
तो मार देती लोगों की बेवफ़ाई मुझे |

(Age: 22)
Varanasi(U.P)

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