_आधुनिक एकल परिवार विघटन
आज हमारे सामने एक ऐसे समाज की तस्वीर सामने आती है जहां परिवार और घर जैसे शब्द विलुप्त होते जा रहें हैं ।आज की पीढ़ी में आत्मनिर्भर बनने के साथ -साथ ,माता-पिता, भाई -बहन ,पति- पत्नी ,सभी निजी संबंधों में निजता की कमी देखने को मिलती है ।आज के समय में अस्तित्ववाद अहम भूमिका निभा रहा है लेकिन अनेक विसंगतिया भी दिखाई दे रही है जैसे आजकल गाव् लड़की भी नौकरी पर जाने लगी है जिससे पति पत्नियों के बीच अहं की भावना के कारण दाम्पत्य जीवन में भी अनेक कठिनाई हो गयी है। इस वैश्विकरण का प्रभाव सबसे ज्यादा ग्रामीण समाज पर अधिक दिखाई दे रहा है ।ग्रामीण लड़की और लडके एक शहरी जीवन जीते है जिससे उसका परिवार और समाज के साथ तालमेल स्थापित नही हो पाता जिससे समाज उसे गलत तरीके से देखने लगता है ना तो वह शहरी बन पाता है और ना ही ग्रामीण । आगे बढ़ने की होड़ में वह कुंठा से भर जाता है। जिससे परिवार और घर से अनमना रहता है ओर अवसाद ग्रसित हो जाता है जिससे परिवार और एकल परिवार भी विघटित होते नजर आ रहे है ।वह अपना सम्पूर्ण खाली समय सोशल मीडिया पर ही व्यतीत करता है और आज प्रत्येक व्यक्ति एक परिवार एक फोन पर सीमित हो गया हैओर परिवार व्यक्तिगत में मिलता नजर आ रहा है ।

bhot sundar
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