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Chand

_ चाँद



चाँदनी रात मे चाँद कि याद मे,
कागज कलम लिए बैठा था मैं,
सवाल था खुद से कि,

क्या लिखु  और कहां से शुरूआत करू मे ?

ख्वाबों से, हकिकत से, या करू पहली मुलाकात से,

तेरी रेशमी बालों से या माथे कि बिंदिया  से,
तेरी छोटी सी मुस्कान से या तेरे नन्हें  होठों से।
तेरी मोती सी आंखों से या गुलाबी गालो से,
तेरी मीठी सी आवाज से, या तेरे मोर पंख के झुमके से।
तेरी मटकती चाल से या दौड़ भाग कि मस्ती से,
तेरे प्यार भरे हेलो से या मखमल जैसे हाथो से।
सोचता रहा, सोचता रहा, ख्यालों  मे खो गया मैं,
कलम हाथ से गिर गई, कागज उड़ गया हवा मे।
मेरे सपनों कि  रानी सपनों मे खो गई,
ख्वाब, ख्वाब ही रह गया और नीदं टूट गई।


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Poet

 Neelkamal Malviya

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Ummeede

_   उम्मीदें उम्मीदें इस जहाँ में बस ख़ुदा से रखना तुम साबरी इंसान कभी किसी के साथ वफ़ा नहीं करते। जो क़ैद कर ले किसी को अपनी यादों में, तो मरने तक उनको उस यादों से रिहा नहीं करते। रूह से इश्क़ करना ये बस ख़्वाबों-ख़यालों  फिल्मों में सुन रखा होगा सबने, हक़ीक़त में इस जहाँ में लोग बिना जिस्म के इश्क़ का सौदा नहीं करते। वादे करके भूल जाना तो इंसान की फ़ितरत है। यहाँ वादे ख़ुदा से भी करके लोग पूरा नहीं करते। ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)

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