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Mayke Ki Yaad

 

_मायके की याद

Poet Amrita Tripathi



मायके का दिन याद आता है मुझे वो भाई बहनों का साथ याद आता है मुझे याद आते हैं वो कालेज के दिन वो शिक्षको का आशीर्वाद मां की मीठी मीठी डांट वो दादी की बात वो चोरी चुपके खेलना कूदना दोस्तो से दिन भर बात करना
और स्कूल में छुट्टी का इंतजार छोटी उम्र के छोटे सपने और प्यार भरी बातें वो तितलियों का पकड़ना और पिकनिक मनाने और परीक्षा की तैयारी
सब कुछ याद आता है मुझे
कभी कभी लड़ाई झगडे दिल की अकुलाहट कब खत्म हुईं पता ही नहीं चला
मन दुखी होता है कभी कभी पंख पसारे उड़ जाऊं बचपन के घर मां दुआओं में कहती थी हरदम याद रखना बंधे रहोगे हरदम अतीत के डोर से तुम
बिस्वास से भरे उम्मीद में चलो तुम अपने मजबूत पंखों से आसमां छू लो एक दिन 

Amrita tripathi

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Amrita Tripathi

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Ummeede

_   उम्मीदें उम्मीदें इस जहाँ में बस ख़ुदा से रखना तुम साबरी इंसान कभी किसी के साथ वफ़ा नहीं करते। जो क़ैद कर ले किसी को अपनी यादों में, तो मरने तक उनको उस यादों से रिहा नहीं करते। रूह से इश्क़ करना ये बस ख़्वाबों-ख़यालों  फिल्मों में सुन रखा होगा सबने, हक़ीक़त में इस जहाँ में लोग बिना जिस्म के इश्क़ का सौदा नहीं करते। वादे करके भूल जाना तो इंसान की फ़ितरत है। यहाँ वादे ख़ुदा से भी करके लोग पूरा नहीं करते। ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)

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_  विरह का सन्नाटा सूरज छुपा धुँध के पीछे, आँखों में ठहरा आसमान। इस अकेलेपन की रात में, दिल ढूँढ रहा तेरे निशाँ। शहर सो गया, नींद के आगोश में, मेरा जहाँ बस तेरी यादों में सिमटा। चीख़ रहा अंदर सन्नाटा, बाहर का मौसम बदला। हर साँस में बस तेरी खुशबू, हर धड़कन पे तेरा पहरा। सन्नाटों में तेरा साया, नींद के आगोश में, शहर समाया ।। धुंधले हुए हैं रास्ते सारे, कैसे ढूँढूँ मैं अपनी डगर? खो गए हैं सारे सहारे, कहाँ ले जाएगा यह सफ़र? ख़ामोशी ने शोर मचाया, दिल ने फिर खुद से की उलझन। टूटे सपनों की राख तले, दबी हुई है मेरी चुभन। क्यों थम न जाता ये जीवन, थक-सा गया हर एक क्षण। चाँद भी आज बादलों का, ओढ़कर आया है कफ़न। ~ बाल कृष्ण मिश्रा,    नई दिल्ली