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Radha ka Viyog

 

_राधा का वियोग

Kavi Amrita Tripathi


राधा बैठी हुई है आस लगाए दिल मेरा प्रियतम दिन रात बुलाए आंसू की धारा बहाऊ नदिया किनारे
बिखरा हुआ है तन मन और बिखरा हुआ ये वस्त्र
तन मन मेरा लकड़ी हुआ है तुम्हारे यादों की चादर में लिपटी हूं मैं कंपित कर रही हैं निशा घनेरी
यमुना किनारे बैठी हूं आस लगाए कृष्ण मेरे दिल में बंसी बजाए
किस किस को दुख बताएं नदियों की कल कल धारा से प्रार्थना करू कृष्ण को मेरे जल्दी बुलाए
ये धरती ये नदियां अंबर सब मिल के यही गाए कृष्ण राधा का मिलन हो फिर बृज में खुशी छाए
चले आओ प्रियतम दिल फिर मेरा आज बुलाए


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Poet

Amrita tripathi

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Poet Amrita Tripathi


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Om Tripathi

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