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Kisan


           "किसान"

Poem by Naresh Gora


देश की शान होते हैं किसान, 

करना चाहिए इनका सम्मान | 

पोषण करते हैं सबका किसान, 

उपजाते हैं ये विभिन्न धान ||


है किसान एक इक ऐसा नाम,

 "जिससे बची है सबकी जान |

 करते हैं ये आजीवन श्रम,

छिल जाती है इनकी चर्म ।।


सुबह-शाम और रात दिन, 

हो गर्मी या फिर सर्दी ।

रहता है बस एक ख्याल, 

जैसे-तैसे हो अन्न का भंडार ||


है किसान जगत के पालक, 

चैन इनको नहीं सुहावत।

होते हैं ये दीन-दुःखी, 

मत आँको इनका जीवन सुखी ॥


है किसानों की क्या हस्ती,

 बस करते रहो खेतों मे मस्ती |

हरियाली की चुनर धानी, 

फसले लगती है मस्तानी ।     

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Poet

Naresh Gora

EDUCATION :
ADDRESS :v/p Goro ka Tala Dhanau Barmer Rajasthan(344702)
From Rajasthan



Publisher

Om Tripathi

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