_ससुराल
क्या है ससुराल,
रिश्तों का माया जाल।
तू चलना जरा संभाल,
नहीं तो गिरना है तत्काल।
अपना घर तो सपना है,
तानो से रोज गुजरना है।
सास यहाँ की डीएम है,
उसके सारे नियम है।
ससुर यहाँ पर जेलर है,
बाहर निकलना आज्ञा लेकर है।
देवर जी का तो अलग रुतबा है,
उनसे डरता सारा कस्बा है।
ननद, जेठानी रोज हवन करवाएं,
आग में चुगली का घी डलवाएँगे।
पति देव का कहना ही क्या,
उनकी मर्जी के बिना रहना ही क्या।
जो वो कहे कर जाओ तुम,
हमारा जीवन बस कठपुतली है।
जिसकी डोर दूसरों के हाथों में है।
अपनी डोर अब उनसे छुडानी है।
अब अपनी मर्जी चलानी है।
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Poet
Vartika Dubey
EDUCATION :B.A, BTC
ADDRESS :Prataapgarh
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Publisher
Om Tripathi
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Social Media Manager
Shourya Paroha
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