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बंदे मातरम्

 नमन मां शारदे 🙏🙏🙏

वंदे मातरम् 🙏🙏🙏

 

जब तक रहे हृदय में स्पंदन

करती ‌रहूं‌ तुम्हारा  ही वंदन

ऐ मेरे भारत के कण-कण।।



मां ‌तेरा श्रंगार अलौकिक

स्वयं प्रकृति ने आन किया है।

और विधाता ने मां तुमको

छ ऋतुओं का वरदान दिया है।

स्वर्ण सरीखी रज देकर तुम्हें

औषधियों की खान किया है।

फल और फूल हैं ‌अमृत जैसे

अन्नपूर्णा बन दिये हमें अन्न।।


ऐ मेरे भारत के कण-कण।।


एक‌  से एक अनोखे परबत

पग पग जिनका तीरथ पावन।

नदियां घाटियां झीलें अद्भुत

करें कहां तक लेखनी वर्णन।।

इसका तो मरूस्थल भी सुंदर

और मैदानों ‌का‌‌ क्या‌‌ ही कहना।

सागर  और  पठार  निराले

देश  मेरा  संसार ‌ का ‌गहना।

पावन  है  हर  नदी  यहां  पर

और माटी है इसकी चन्दन।।


ऐ मेरे भारत के कण-कण।।


धूल में तेरी लोट -लोट कर

हमने खुद को संवार लिया है

तेरा‌ अमृत सा‌ जल‌ पी कर

अपना  रूप ‌निखार लिया है

नख से शिख तक रूप है ऐसा

जिसका वर्णन किया ना जाए

पवन  सुगंधित  सदा  तुम्हारी

देश का हर आंगन महकाए।।

जितना विस्तृत हृदय तुम्हारा

हैं विशाल उतना ही आंगन।


ऐ मेरे भारत के कण-कण।


कितना  कुछ ‌ पाया है तुमसे

हमसे गया ना कुछ लौटाया।

जितना स्नेह मिला है मां से 

तुमसे  भी  उतना  ही ‌ पाया।

तुमने  बड़ा  ना  छोटा  देखा

सब पर अपना स्नेह ‌लुटाया

कोई  राजा  हो  या  रंक  हो

सबने प्रेम तुम्हारा है पाया।

किया सदा उपभोग तुम्हारा

कुछ भी नहीं कर पाए अर्पण


ऐ मेरे भारत के कण-कण।।


कभी कभी आता है ये मन में

मैं भी  कुछ काम तुम्हारा करती।

किसी  क्षेत्र में किसी रोज़ तो

मैं भी  तो नाम तुम्हारा  करती।

मैं कुछ भी नहीं कर पाई मां

एक वचन पर भर जाऊंगी

जब भी जहां पुकारा मां ने

प्राण न्यौछावर कर जाऊंगी

काम देश के आ ना सके तो

 भला है ‌किस काम का‌‌ तन मन।


ऐ मेरे भारत के कण-कण।।

ऐ मेरे भारत के कण-कण।।


कवि- mukta Sharma

 पता-Coral springs colony Meerut


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