गरीब
👉🏻गरीब हूँ तो क्या हुआ अपने हद मे रहिए,
किसी को सराहना दे नही सकते तो,अपने मुँह को विराम दीजिये!
वर्षो से हम नमन करते, फिर भी इज्जत गवाइं है,
घर में आपके काम करके, जूठन चावल खाई है!
तेरे घर की इज्जत है तो मेरे घर की क्या इज्जत नही,
क्या हुआ जो महल मे है तु, मेरे घर मे क्या छत नही!
रूखी सूखी खाता हूं फिर भी, लेता हूं मैं प्रभु का नाम!
तकलीफ मे अपनी रहकर भी,
करता रहता तेरा काम!
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Publisher
Om Tripathi
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Shourya Paroha
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Fantastic
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