देखो आया फिर कोरोना,
कविता
देखो आया फिर कोरोना,
लाया फिर भय का डेरा।
इस बार आया बहुत विकट रुप में,
देखो आया फिर कोरोना।
इसको फिर लाने की जिम्मेदारी,
हर उस वयक्ति की है,
जिसने वरती लपरवाही,
देखो आया फिर कोरोना।
हमने इससे लडने के सारे हथियार छोड़ दिये थे,
न हम ने सोशल डिस्टेंसिंग रखी
न हमने मास्क लगाया
देखो आया फिर कोरोना।
उसने जान लिया था अब नहीं है मेरा डर,
वह निकला चालाक देखलो,
उसने चुपके, चुपके अपने पैर जमाए,
और लगा लिया भारत को अपने पीछे,
आज देख लो लपरवाही का अंजाम
देखो आया फिर कोरोना,
देखो आया फिर कोरोना।
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Poet
Reetu Raghuvanshi
EDUCATION :
ADDRESS :Jabalpur, M. P
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Publisher
Om Tripathi
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Shourya Paroha
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