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Barish

बारिश

 तपती धरती पर पड़ी है बारिश की बूंदे। 
धरा को करार आ रहा है।
 छा गई हैं काली घटाएं।
 पेड़ पौधों का जीर्णोद्धार हो रहा है।
 भर गए हैं सब ताल तलैया। 
मिट्टी की सोंधी महक से प्यार हो रहा है।
 छट रहे हैं निराशा के बादल।
 मन में आशा का संचार हो रहा है।
 चारों ओर हरियाली है छाई।
 नवजीवन का व्यापार हो रहा है।
 वर्षा बहार के आगमन से।
   अन्नदाताओं में हर्ष का त्यौहार हो रहा है।
  चल रही है पुरवाई  हवाएं।
 सारा उपवन फूलों का हार हो रहा है।
   धुल  रही हैं सारी मलिन यादें।
 शीतल व स्वच्छ गगन का दीदार हो रहा है।
 बदल रहा है मौसम का मिजाज।
 पृथ्वी का श्रृंगार हो रहा है 
 लग रहा है सब कुछ अच्छा अच्छा।
 खुशनुमा सा दिल में एहसास हो रहा है।

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Vartika Dubey

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