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Nafrate bhula do

नफरतें भुला दो

(गीत) 

नफरतें भुला दो गमे जिन्दगी है,

खुशी कहाँ है उम्मीद बंदगी है।


मैं हूँ अकेला तू भी अकेला,

मेला यहाँ है पर सब अकेला,

चार दिनों की मिली जिन्दगी है।


आए जगत में कुछ अच्छा कर लें,

सबको अपने गले से लगा लें,

गिरते थामे यही तो खुशी है।


भाई-भाई का दुश्मन बना है,

प्यार दिलों से बिल्कुल फ़ना है,

कैसे दुनिया धरा पर टिकी है।


कुछ मैं जगाऊँ कुछ तुम जगाओ,

सबके जहन से नफरत मिटाओ,

प्रेम खुदा है प्रेम निशानी है।


गले लगाओ अपनों को लोगो,

मत दुत्कारो अपनों को लोगो,

याद करें सब यही बंदगी है।


प्यार से ज्यादा नफरत दिलो में,

सब जल रहे हैं पल-पल पलों में, 

"श्री" दुनिया प्यार की भूखी है।  

                           

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Poet

Sarita Shrivastav

EDUCATION :
ADDRESS : Dhoulpur, Rajasthan
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Publisher

Om Tripathi

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