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Chand dekha to

चाँद देखा तो

(गज़ल ) 

चाँद देखा तो चाँद डूब गया,

मेरा मुझसे कोई रूठ गया।


पत्ता-पत्ता मुरझाया लगता है,

कोई पत्ता शाख से दूर गया।


तेरी खामोशी का सबब क्या है,

क्या था तेरा तुझसे छूट गया।


गुफ्तगू में मगन घटाएँ सभी,

अंतर्मन भीगने से छूट गया।


सितारों जमीन पर देखो कभी,

घर कोई रोशनी से छूट गया।


देने वाले तूने दिया सब कुछ, 

मेरी किस्मत का जाम टूट गया।


जाने वाले की याद बिखरी हैं,

कैसे कह दूँ कि उसे भूल गया।


कोई अजनबी गज़ल सुनाता है,

ख्वाब आँखों से मेरी टूट गया।


मौत के पैगाम पर दस्तखत करके,

तेरी दुनिया में रहना भूल गया।


आइना उठा के क्या देख लिया,

शख्स कोई जिसे "श्री"भूल गया। 



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