Bhawani mata सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Bhawani mata

 (भवानी माता)

(गीत) 

भवानी माता पहाड़ों से आई मेरे आंगन,

जगदम्बा माता नौ दिन विराजे मेरे आंगन।


शैलपुत्री देवी पहले दिवस में पधारी,

आरोग्य आशीष वरदान संग पधारी,

चरणों में गऊ घृत अर्पण करूँ मेरे आंगन।


ब्रह्मचारिणी माता दूजे दिवस में आई,

चिरायु आशीष संग में लेकर माँ आई,

शकर के भोग से हुई प्रसन्न मेरे आंगन। 


चंद्रघंटा मैया तीजे दिवस में विराजी,

मन इच्छा पूरी करने को है मैया राजी,

पायस का भोग तुझको जिमाऊँ मेरे आंगन। 


कूष्मांडा देवी चौथे दिवस में आई,

रोग शोक मेरे नष्ट करने को आई,

मालपुए अपने हाथ खिलाऊँ मेरे आंगन।


स्कंदमाता पंचम दिवस में पधारी,

सिद्धि देने माँ मेरे भवन में पधारी,

केले के भोग से हुई प्रसन्न मेरे आंगन। 


कात्यायनी मैया छठवें दिवस घर आई,

आकर्षण देने सुन्दर बनाने चली आई,

शहद का भोग भेंट करूँ मेरे आंगन। 


कालरात्रि देवी सप्तम दिवस में आई,

रोगों से मुक्ति देने को माँ चली आई,

मीठे के भोग से मैया प्रसन्न मेरे आंगन। 


महागौरी देवी आठवें दिन घर आई,

असंभव कार्य करने तुरन्त चली आई, 

नारियल का भोग हाथ खिलाऊँ मेरे आंगन। 


सिद्धिदात्री मैया नवें दिवस घर आई,

मृत्यु का भय डर को मिटाने चली आई,

तिली के भोग से हुई प्रसन्न मेरे आंगन। 



हमसे जुडने के लिए👉यहाँ click करें👈

Poet

Sarita Shrivastav

EDUCATION :
ADDRESS : Dhoulpur, Rajasthan



Publisher

Om Tripathi

Contact No. 9302115955
आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं।

Social Media Manager

Shourya Paroha

अगर आप अपनी कविता प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप नंबर 7771803918 पर संपर्क करें।

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

हमें बताएं आपको यह कविता कैसी लगी।