भूल गए
(कविता)
भूल गए आज उनको सब है ,
जिन्होंने देश आजाद करवाया ।
इंकलाब, जय हिंद का नारा ,
अंग्रेजों के कानों तक पहुंचाया ।
जान अपनी कुरबान कर गए ,
हमें आजादी का अधिकार दिलाया उमर ना देखी, दुख सब सह के
अपने तिरंगे को ऊंचा उठाया ।
शहीदी दिवस पर फूलों की माला से हमने अपना फर्ज निभाया
क्या थे उनके सपने, क्या पद चिन्ह उनको हमने दाग लगाया।
सोचते होंगे वह ऊपर बैठे
जीवन खोकर क्या हमने पाया।
क्या ऐसे भारत देश का
हमने था सपना सजाया।
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Poet
Anita Mishra
Publisher
Om Tripathi
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Social Media Manager
Shourya Paroha
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