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nari par kavita

nari par kavita नारी देश का स्वाभिमान








प्रकृति का उपहार है ये,

 मर्यादाओं की है आन ,

ममता की मूरत है वो । 

नारी देश का स्वाभिमान ।


पग रखे जिस भवन में,

बन जाये मंदिर के समान 

वनिता की महिमा वेदों ने कही, 

नारी गृहलक्ष्मी का वरदान ।

नारी- - - - - - - - -


करती कुलों को उजागर ये,

दीपक में ज्योति के समान,

 सौन्दर्य प्रतिमा का स्वरूप,

 गुणों से है जिसकी पहचान ।

 नारी देश- - - - - - -


त्याग और बलिदान की है स्वामिनी, 

समाज में जिसकी ऊँची शान,

धन्य है ये धरा जिससे, 

उस नारी को शत-शत प्रणाम। 

नारी देश- - - - - - -


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Written by

Tamanna Kashyap

Rajparapur, Sitarpur
(U.P) 









Posted by

Om Tripathi

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