जब हम पढ़ेंगे
*************************
मेरे किस्मत के सारे भाग्य खुल जायेंगे,जब हम पढ़ेंगे ।
जब हम पढ़ेंगे-पढ़ेंगे रोज़ पढ़ेंगे।।
मेरे किस्मत के सारे भाग्य खुल जायेंगे
जब हम पढ़ेंगे।।
जब मैं पडूंगा तो हाकिम बन जाउंगा।
हाकिम बन के मैं अलख जगाउंगा.।।
मेरे किस्मत के सारे ताले खुल जायेंगे,जब हम पढ़ेंगे।
मेरे किस्मत के सारे भाग्य खुल जायेंगे,जब हम पढ़ेंगे।।
जब मैं पढूंगा तो डॉक्टर बन जाउंगा ।
डॉक्टर बनके मै सबको ईलाज करूंगा ।।
मेरे किस्मत के सारे राह खुल जायेंगे जब हम पढ़ेंगे ।।
मेरे किस्मत के सारे भाग्य खुल जायेंगे,जब हम पढ़ेंगे ।
जब हम पढ़ेंगे-पढ़ेंगे रोज़ पढ़ेंगे ।
मेरे किस्मत के सारे भाग्य खुल जायेंगे
जब हम पढ़ेंगे ।।
जब मैं पढूंगा तो मास्टर साहब बन जाउंगा ।
मास्टर साहब बनके मै सबको पढ़ाऊंगा ।।
मेरे अखियां के तारे सारे खुल जायेंगे जब हम पढ़ेंगे ।
मेरे किस्मत के सारे भाग्य खुल जायेंगे,जब हम पढ़ेंगे ।।
जब मैं पढूंगा तो नेताजी,बन जाउंगा ।
नेता बनके मै देश का सेवा करूंगा ।।
मेरे किस्मत के चाभी सारे खुल जायेंगे,जब हम पढ़ेंगे।
जब हम पढ़ेंगे- पढ़ेंगे रोज पढ़ेंगे ।।
नन्द बिहारी जी का कविता सुनके हम गाएंगे जब पढ़ेंगे ।
मेरे किस्मत के सारे भाग्य खुल जायेंगे,जब हम पढ़ेंगे ।।
*रचनाकर कवि*
*नन्द बिहारी*
गांव - जमैला,पोस्ट - मदना,थानाही- रुद्रपुर, जिला - मधुबनी बिहार ।
संपर्क न0- 9110183942
दिनांक 23/02/2024

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
हमें बताएं आपको यह कविता कैसी लगी।