Sikhsha सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Sikhsha


 शिक्षा हैं शेरनी का दूध*

*************************************
  शिक्षा वो शेरनी का दूध जो पियेगा दहारेगा।
अपनी बदहाली जीवन खुशी-खुशी बितायेगा।
आओ शिक्षा का संकल्प लेकर शिक्षित समाज बनाते है।
आने वाले पीढ़ियों को उज्ज्वल भविष्य बनाते है।
शिक्षा वो शेरनी का दूध जो पियेगा दहारेगा।

शिक्षा से हीं सब कुछ होता,मानव का यह श्रृंगार है।
इसके बिना जीवन अधूरा,यही तो हम सबका सूत्रधार है।
आओ मिलकर शिक्षा का ज्योति जलाए,फर्ज अपना निभाना है।
खाओ कसम मातृ-भूमि का हर घर तक शिक्षा पहुंचाना है।
शिक्षा वो शेरनी का दूध जो पियेगा दहारेगा।

शिक्षा विहीन मानव पशु,यही कलंक हैं दूर करो।
नर- नारी ना रहे अब वंचित, सबकी भ्रम को दूर करो।
पढ़ेगा मुन्ना बढ़ेगी मुनियां सपना भी साकार करो।
अलख जगाओ भरपुर शिक्षा का  
आपस में सब विचार करो।
शिक्षा वो शेरनी का दूध जो पियेगा दहारेगा।

चाहे लाख मुसीबत आवे पतझड़ बनके न जीना है।
शिक्षा कि वारिश में भिंग कर 
नये उमंग में रहना है।
जो कोई शिक्षा को जाना चांद भी उसे सलाम किया।
सोने वाले सोता ही रहा जागने वाले सब कुछ पा गया।
शिक्षा वो शेरनी का दूध जो पियेगा दहारेगा ।।

करता हूं विश्वास खुद पे इरादे भी स्वीकार है।
अब तो मैं जाग गया,अब आपकी ही बारी है।
संकल्प लिया हूं कर्तव्य निभाएंगे मन में विश्वास जाग गया।
नन्द बिहारी के वाणी से सोया उमंग भी जाग गया।
शिक्षा वो शेरनी का दूध जो पियेगा दहारेगा।।

             नन्द बिहारीए
 ग्राम - जमैला,पोस्ट- मदना, थाना- रुद्रपुर, प्रखंड-अंधराठाडी, जिला- मधुबनी,बिहार-847401
संपर्क 9110183942.
दिनांक 13/09/2023

👉हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें👈

Poet

 Nand Bihari

EDUCATION :
ADDRESS :







टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Shiv Shakti

_ ॥ शिव-शक्ति संकल्प ॥ शिवालयों से शंखनाद हुआ,  गूंजा यह संदेश, हर नारी में दुर्गा जागे,  हर पुरुष शिव रूप बन जाए। हर थिरकन में सृष्टि की लय, साँसों में ओमकार समाए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। सृष्टि का हर कण है पावन,  शक्ति का हर रूप अनमोल, नारी जब सँवारे घर-आँगन,  और रण में भरती हुँकार। दुर्गा बन संहारे दानव,  काली बन मिटाए अंधकार, उसकी ममता में विष्णु बसें,  संहार में बसा महेश का सार। ब्रह्मा-विष्णु-महेश की शक्ति  हर थिरकन में सृष्टि की लय हर नारी में दुर्गा जागे,  हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पुरुष जब ध्यान में लीन हो,  जटा में गंग बहे अविरल, डमरू की थाप पर नाचता,  काल भी बन जाए शांत और सरल। मिट जाए असुरत्व जगत से, सतयुग सा उजियारा आए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पार्वती संग प्रेम है उसका,  अर्धनारीश्वर रूप महान, हर पुरुष में वही शिवत्व है,  जो त्याग और तप का है ज्ञान। ~ बाल कृष्ण मिश्रा, नई दिल्ली |

Dansh le jo tu mujhe

_   दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए ! यह कविता भीतर के सूनापन, अधूरेपन और गहरी मोहब्बत की उस कसक को व्यक्त करती है, जो यादों और चाहत के बीच इंसान को बेचैन भी करती है और सुकून भी देती है। भाव इतने गहरे हैं कि हर पंक्ति दिल की धड़कनों को छूती है। 💔 दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए 💔 बीते लम्हों का सूनापन तेरी यादों का महकता चंदन आंखें में थमी तेरी परछाई, रोशनी बनकर बूंदों में घुल जाए । दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए | कहां मुमकिन है मोहब्बत को लफ्ज़ों में बयां कर पाना । आसान नहीं भुला, यादें सुकून की नींद में सो जाना । ज़िस्म से रूह तलक, बस सुकून छा जाए । दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए | जीवन के पावन ‘निर्झर’ को, तुम यूँ ही बह जाने दो । एक पल, बस एक पल, नीले अँधेरे में गुम हो जाने दो । तारों की चादर ओढ़, चाँद की रोशनी में खो जाऊं । तेरी मोहब्बत की खुशबू में, खुद को फिर से पा जाऊं । ज़िस्म से रूह तलक, बस सुकून छा जाए । दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए | तेरे बिना सारा जहाँ, सूना सा लगता है, जैसे एक सिसकी.… जैसे एक सिसकी । ये कैसा अधूरापन ? ये कैसा सूनापन ? शायद यही है इश्क...

Ummeede

_   उम्मीदें उम्मीदें इस जहाँ में बस ख़ुदा से रखना तुम साबरी इंसान कभी किसी के साथ वफ़ा नहीं करते। जो क़ैद कर ले किसी को अपनी यादों में, तो मरने तक उनको उस यादों से रिहा नहीं करते। रूह से इश्क़ करना ये बस ख़्वाबों-ख़यालों  फिल्मों में सुन रखा होगा सबने, हक़ीक़त में इस जहाँ में लोग बिना जिस्म के इश्क़ का सौदा नहीं करते। वादे करके भूल जाना तो इंसान की फ़ितरत है। यहाँ वादे ख़ुदा से भी करके लोग पूरा नहीं करते। ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)