ISRO सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ISRO


_ इसरो (ISRO)तुझे सलाम

************************************



   हे भारत के लाल तूने कर दिया कमाल।
जो न कर सकी पूरी दुनियां,तूने मचा दिया धमाल।।
नमन है तुमको शत-शत मेरा, अभिनंदन भी तुमको करता हूं।
तुम जिओ हजारों साल यही कामना करता हूं।।
हे भारत के लाल तूने कर दिया कमाल।

 सपना जो सजाया हूं वह भी करना तू पूरी।
रचना है पूर्ण इतिहास मानव कि कमी पूरी।।
देख रहा है केवल तुमको,बस तुम पर ही सब आश है।
 कैसे मैं शुक्रियादा करूं नयन मेरा हताश हैं।।
हे भारत के लाल तूने कर दिया कमाल।

 गर्व है हमको सबसे पहले भारत का वासी हूं।
दुनियां है मेरा परिवार उसका छोटा सिपाही हूं।।
बचाऊंगा जीवन का सभ्यता,यही सोच के जीता हूं।
शरीर का एक-एक कतरा हिंद को समर्पित करता हूं।।
हे भारत के लाल तूने कर दिया कमाल।

 जीना है तो पीना होगा,पी पी कर मुझे-तुझे जीना है।
मानव का जो कर्तव्य है मुझमें, वही हमे निभाना है।।
समय मिले तो बस आशीष देना,तुम अपना फर्ज निभाना।
मै तो बस कोशिश करुंगा,केवल आप अपना मर्ज बताना।।
हे भारत के लाल तूने कर दिया कमाल।

याद आती है दादी की कहानी, चंदा मामा दूर के।
नानी को अब मैं कहूँगा मामा हो गए बस टूर के।।
मिशन है आदित्य का अब,शुक्र मंगल न अक्रूर के।
विजय विश्व तिरंगा होगा,कहे नन्द बिहारी सब जरूर के।।
हे भारत के लाल तूने कर दिया कमाल।
जो न कर सकी पूरी दुनियां,तूने मचा दिया धमाल।।

              *नन्द बिहारी*
ग्राम-जमैला, पोस्ट- मदना,भाया- अंधराठाड़ी,मधुबनी- बिहार।
         ९११०१८३९४२
         28/08/2023


👉हमसे जुडने के लिए यहाँ click करें👈

Poet

 Nand Bihari

EDUCATION :
ADDRESS :







टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Ummeede

_   उम्मीदें उम्मीदें इस जहाँ में बस ख़ुदा से रखना तुम साबरी इंसान कभी किसी के साथ वफ़ा नहीं करते। जो क़ैद कर ले किसी को अपनी यादों में, तो मरने तक उनको उस यादों से रिहा नहीं करते। रूह से इश्क़ करना ये बस ख़्वाबों-ख़यालों  फिल्मों में सुन रखा होगा सबने, हक़ीक़त में इस जहाँ में लोग बिना जिस्म के इश्क़ का सौदा नहीं करते। वादे करके भूल जाना तो इंसान की फ़ितरत है। यहाँ वादे ख़ुदा से भी करके लोग पूरा नहीं करते। ~ Drx Ashika sabri (Age: 22) Bsc ,D pharma Varanasi(U.P)

Shiv Shakti

_ ॥ शिव-शक्ति संकल्प ॥ शिवालयों से शंखनाद हुआ,  गूंजा यह संदेश, हर नारी में दुर्गा जागे,  हर पुरुष शिव रूप बन जाए। हर थिरकन में सृष्टि की लय, साँसों में ओमकार समाए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। सृष्टि का हर कण है पावन,  शक्ति का हर रूप अनमोल, नारी जब सँवारे घर-आँगन,  और रण में भरती हुँकार। दुर्गा बन संहारे दानव,  काली बन मिटाए अंधकार, उसकी ममता में विष्णु बसें,  संहार में बसा महेश का सार। ब्रह्मा-विष्णु-महेश की शक्ति  हर थिरकन में सृष्टि की लय हर नारी में दुर्गा जागे,  हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पुरुष जब ध्यान में लीन हो,  जटा में गंग बहे अविरल, डमरू की थाप पर नाचता,  काल भी बन जाए शांत और सरल। मिट जाए असुरत्व जगत से, सतयुग सा उजियारा आए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पार्वती संग प्रेम है उसका,  अर्धनारीश्वर रूप महान, हर पुरुष में वही शिवत्व है,  जो त्याग और तप का है ज्ञान। ~ बाल कृष्ण मिश्रा, नई दिल्ली |

Sannata

_  विरह का सन्नाटा सूरज छुपा धुँध के पीछे, आँखों में ठहरा आसमान। इस अकेलेपन की रात में, दिल ढूँढ रहा तेरे निशाँ। शहर सो गया, नींद के आगोश में, मेरा जहाँ बस तेरी यादों में सिमटा। चीख़ रहा अंदर सन्नाटा, बाहर का मौसम बदला। हर साँस में बस तेरी खुशबू, हर धड़कन पे तेरा पहरा। सन्नाटों में तेरा साया, नींद के आगोश में, शहर समाया ।। धुंधले हुए हैं रास्ते सारे, कैसे ढूँढूँ मैं अपनी डगर? खो गए हैं सारे सहारे, कहाँ ले जाएगा यह सफ़र? ख़ामोशी ने शोर मचाया, दिल ने फिर खुद से की उलझन। टूटे सपनों की राख तले, दबी हुई है मेरी चुभन। क्यों थम न जाता ये जीवन, थक-सा गया हर एक क्षण। चाँद भी आज बादलों का, ओढ़कर आया है कफ़न। ~ बाल कृष्ण मिश्रा,    नई दिल्ली