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_तितली 

Written by Atul Kumar


इक तितली है जो फूलों पर।                                                बचपन खुश है झूलो पर।                                                 इक शाम जो बैठी मां के पास।                                          लेकर अपना टूटा विश्वास ।                                               नम होकर फिर आंखे बोली ।                                           मानो तनिक सी हवा भी डोली ।                                       अब मुख भी अपने आप खुले ।                                        लगी बताने अपने गम ।                                                   इक इक कर,सब बात बताई।                                           यह देख मां का भी दिल डोला।                                       उसके नेत्र भी जैसे ताल हुए ।                                          आंखे भी उसकी फूल गई ।                                             मानो वह ढलता सूर्य हुई।                                                फिर मां ने हमको समझाई ।                                                टूटी हुई विश्वास जगाई ।                                                    मां ने बोला ओ मेरी बेटी ।                                                  तू रख हौसला और हिम्मत रख ।                                          तू भी गर्व करेगी इक दिन।                                                होगा सपना तेरा भी साकार ।                                             खुद को तू बना कठोर आकार ।                                        इक दिन विजय का सहरा जब तू बांधेगी ।                         दुनिया भी तेरे पीछे भागेगी ।                                             खुद पर तुझको तब होगा नाज ।                                       मगर तू हिम्मत ना हार आज ।                                         देखना दुनिया करेगी प्रायश्चित अपने भूलो पर ।                      इक तितली है जो फूलों पर।                                           बचपन खुश है झूलो पर।

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Poet

Atul Kumar

EDUCATION :
ADDRESS :Name- Atul Kumar address. Baida Kala. Post . Gulriha sirma disst . Basti
His first poem is Titli



Publisher

Om Tripathi

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