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मांँ
(कविता)
मांँ शब्द कोई क्या करेगा परिभाषित।
मांँ शब्द में पूरी दुनिया है समाहित।
मांँ ही है संपूर्ण सृष्टि।
खुशनसीब है वो जिसे मिले मां की दृष्टि।
मांँ ने बच्चों पर अपना सारा जीवन वार दिया।
पर बच्चों ने क्या मां को अपने हिस्से का प्यार दिया।
मांँ होती है ममता की मूरत।
मांँ है दुनिया में सबसे खूबसूरत।
मांँ से ही है बचपन , प्यार और दुलार।
मांँ तो माने बच्चों की हर मनुहार।
मांँ ने किए अपने सारे सुख समर्पित।
मांँ को कभी भी ना करें अपमानित।
मांँ के लिए क्या कर पाएंगे हम।
मांँ के ऋण कैसे चुकाएंगे हम।
अब तो जगा लो अपना जमीर।
जिसके पास मां है वह सबसे अमीर।
रिश्ते की बगिया में मांँ है गुलाब।
सभी तारों के बीच में मांँ आफताब।
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Om Tripathi
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Shourya Paroha
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Heart touching poem...keep it up vartika 👍👍
जवाब देंहटाएंVery nice 👌👌
जवाब देंहटाएंbahut hi sundar aur heart touching rachna
जवाब देंहटाएंaise hi lagatar likhti rahe
Gajab
जवाब देंहटाएंToo good .
जवाब देंहटाएंAccuracy of words are outstanding